साथियों
आजकल उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों का शोर जोरों पर है। चुनाव लड़ने वाले सभी दल सभाओं में, घरों में आकर वोट मांग रहे हैं। बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं। यह सारे दल जनता को भरमाने के लिए एक के बाद एक चुनावी घोषणाएं कर रहे हैं। भाजपा पिछले 5 साल से सत्ता में थी। वह इन 5 सालों का हिसाब नहीं दे रही है। वह 'डबल इंजन' के नाम पर बनाई सरकार के कुकर्मों को खुद याद नहीं करना चाहती है। आज भाजपा फिर नई घोषणाएं कर रही है।
पिछले 5 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस अपना पुराना हिसाब नहीं दे रही है। वह नई घोषणा कर चुनाव में अपनी वैतरणी पार करना चाहते हैं। आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में एक के बाद एक नई घोषणा कर रही है। अपने कथित 'दिल्ली मॉडल' का हिसाब नहीं दे रही है। इन दलों को जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है।
इन राजनीतिक दलों की नूरा-कुश्ती के बीच छात्र-नौजवानों की स्थिति पहले से और बुरी हो रही है। साल 2000 में अस्तित्व में आए हमारे इस युवा राज्य को 21 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इन 21 वर्षों में इन राजनीतिक पार्टियों ने 11 मुख्यमंत्री बदल दिए। लेकिन हम छात्र-युवाओं के हिस्से समस्याएं ही मिली हैं।
जिन भावनाओं, संघर्षों, कुर्बानियों, त्याग-समर्पण के साथ हमारे साथियों ने लड़कर उत्तराखंड हासिल किया था। वह राज्य इन राजनैतिक पार्टियों के लिए केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी बनकर रह गया है।
अलग राज्य बनने के बाद हमारे यहां शिक्षा की हालत ठीक होनी चाहिए थी। परंतु हमारे यहां स्कूलों की हालत सुधारने के बजाए 2018 में 700 से अधिक प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए गए। इसी तरह आजकल 'स्किल इंडिया' का नारा जोर-शोरों से उछाला जा रहा है। लेकिन हमारे यहां उत्तराखंड में 2017 में 28 आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) कॉलेज बंद कर दिए गए।
उच्च शिक्षा की बुरी हालत हम से छिपी नहीं है। अप्रैल 2017 में 2,130 पद उच्च शिक्षा में खाली पड़े थे। उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आज भी हमें बड़े शहरों या उत्तराखंड से बाहर का रुख करना पड़ता है। शिक्षा में बढ़ती फीसें छात्रों को शिक्षा हासिल करने से बाहर कर रही है।
अलग उत्तराखंड बनाने की मूल वजहों में एक रोजगार की समस्या भी थी। रोजगार ना होने के कारण आज भी पहाड़ों से पलायन बड़ी समस्या बनी हुई है। पहाडों में कई गाँव खाली हो गये हैं। और कई गांवों में नौजवान हैं ही नहीं। सीआईएमई के अनुसार दिसंबर 2021 में उत्तराखंड में बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत थी। हम जानते हैं यह आंकड़े वास्तविकता से काफी कम है। अप्रैल 2021 में सरकारी विभागों में 56,944 पद खाली थे। यह स्थिति हमारे यहां रोजगार की समस्या को और विकराल बना देती है।
इको सेंसटिव जोन के नाम पर हमें हमारे जंगलों, पानी, रास्तों के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। जंगली जानवरों का खतरा, फसलों की बर्बादी हमारे यहां एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। पर्यावरण की घोर उपेक्षा की जा रही है। उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजना, रिजॉर्ट बड़े पैमाने पर चल रहे हैं। बड़े-बड़े बाँध बनाए जा रहे हैं। डायनामाइट से पहाड़ों को उजाड़ कर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। प्रकृति का मनमर्जी से बिना वैज्ञानिक मानकों के, भयानक दोहन किया जा रहा है। इस वजह से पहाड़ों की स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी है। बादल फटने, पहाड़ दरकने, जमीन खिसकने की घटनाएं आए दिन होने लगी हैं। प्रकृति का यह भीषण दोहन कॉर्पोरेट पूंजीपतियों; अंबानी-आड़ानी, टाटा जैसे पूंजीपतियों; के हितों के लिए किया जा रहा है। जबकि इसकी कीमत उत्तराखंड के आम लोगों को चुकानी पड़ती है। इन चुनावों के मौके पर हमारे मुद्दे गायब हैं।
आइए! इस चुनाव के मौके पर हम छात्र-नौजवान भी अपना मांग पत्र इन राजनीतिक पार्टियों, विधायकों के घोषणा पत्र के सामने रखें। और मांग करें-
1- कोरोना के नाम पर शिक्षा में थोपी गई पाबंदियां खत्म करो।
2- कम छात्र संख्या के नाम पर सरकारी स्कूलों एवं आईटीआई को बंद करने के कदम वापस लो।
3- सभी रिक्त पदों को तत्काल भरो।
4- उत्तराखंड सरकार रोजगार नीति लागू करो।
5- उपनल, आउट सोर्स, स्कीम कर्मचारी, गेस्ट टीचरों आदि को स्थाई करो।
6- उत्तराखंड सरकारी शिक्षा, उच्च शिक्षा, मेडिकल कॉलेजों में फीस बढाना बंद करो।
7- कोरोना के नाम पर बंद किए छात्रसंघ बहाल करो।
8- दोहरी शिक्षा प्रणाली ख़त्म कर सबको एक समान व निःशुल्क वैज्ञानिक शिक्षा उपलब्ध हो।
9- कोविड काल में छात्रों की फ़ीस माफ़ की जाये। छात्रों से ली गयी फ़ीस वापस हो।
10- छात्रों की पढ़ाई/तैयारी हेतु पुस्तकालयों/ वाचनालयों को खोला जाये। इनमें इंटरनेट की मुफ़्त व्यवस्था हो।
11- ऑनलाइन शिक्षा हेतु आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मोबाइल/ टैबलेट उपलब्ध कराओ तथा इंटरनेट की भी व्यवस्था करो।
12- छात्र विरोधी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को वापस लो। शिक्षा का साम्प्रदायिकरण बंद करो।
13- काम करने योग्य सभी आबादी को रोजगार उपलब्ध कराओ। रोजगार न मिलने तक जीवन- निर्वाह लायक बेरोजगारी भत्ता दो।
14- सरकारी विभागों में रिक्त सभी पदों पर तत्काल स्थायी नियुक्तियां की जायें।
15- सरकारी/सहकारी कंपनियों को बेचना बंद करो। निजीकरण-विनिवेशीकरण-मौद्रिकरण की जनविरोधी नीतियां वापस लो।
16- छात्रों को ठेका मज़दूर बनाने वाली F.T.E. , N.E.E.M. इत्यादि योजनायें वापस लो।
17- NTPC/ RRB भर्ती प्रक्रिया को बिना कोई बदलाव किये समयबद्ध तरीके से पूरा करो। भर्ती परीक्षाओं में लेट-लतीफी, भ्रष्टाचार बंद हो। समय पर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण न करने व पेपर लीक करने वाली एजेन्सियों को ब्लैक लिस्ट कर दोषियों पर कार्यवाही करो।
18- सभी भर्ती परीक्षाओं के फॉर्म निःशुल्क हों एवं भर्ती परीक्षाओं में आने- जाने का खर्च सरकार वहन करे।
19- सभी के लिये निःशुल्क व बेहतर इलाज की व्यवस्था करो।
20- बढ़ती महंगाई पर रोक लगाओ। सभी आवश्यक वस्तुओं के दाम रियायती मूल्य पर सरकार निर्धारित करे।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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