इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 19 दिसंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन की शह पर छात्रों के ऊपर लाठी-डंडों, रॉड, गोली इत्यादि से हमला किया गया। जिसमें दर्जनों छात्रों सहित कई पूर्व छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं। कई छात्रों के सर फूटे हैं व कई छात्रों को लाठी, रॉड से मारकर चोटिल किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एक पूर्व छात्र विवेकानंद पाठक कैंपस के अंदर मौजूद बैंक की शाखा में केवाईसी फॉर्म भरवाने के लिए आए थे। इस दौरान अंदर जाने के लिए गेट खोलने को लेकर सुरक्षा गार्ड से विवाद हुआ। उस समय किसी तरह मामला सुलझा और वह अंदर गये। बाद में सुरक्षा कर्मियों ने सुनियोजित तरीके से छात्रों पर हमला बोल दिया।
ज्ञात रहे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 400 प्रतिशत की फ़ीस वृद्धि को लेकर छात्र पिछले 120 से अधिक दिनों से संयुक्त संघर्ष समिति बनाकर संघर्ष कर रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर 2019 से ही छात्रों का संघर्ष जारी है। साथ ही कुलपति की अवैध नियुक्ति को लेकर भी संघर्ष जारी है।
छात्रों का कहना है कि जब वह छात्रसंघ भवन के सामने धरना स्थल पर बैठे थे तो तभी 30-40 सुरक्षाकर्मियों ने पीछे से आकर डंडे-रॉड से हमला किया। छात्र बीच-बचाव कर ही रहे थे कि किसी सुरक्षाकर्मी ने फायरिंग कर छात्रों के आक्रोश को भड़का दिया। वह भी अपने बचाव में सुरक्षाकर्मियों से उलझे। इस दौरान विश्वविद्यालय में कुछ तोड़फोड़ व आगजनी भी की गई। जिसमें छात्रों का कहना है कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन के लोगों ने ही किया है ताकि छात्रों का और दमन किया जा सके। बाद में प्रयागराज पुलिस ने कैंपस के अंदर आकर और सुरक्षा कर्मियों ने छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। और कैंपस को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया।
विश्वविद्यालय की कुलपति संगीता श्रीवास्तव, फीस वृद्धि के खिलाफ़ पिछले लंबे समय से आंदोलनरत, छात्रों से बातचीत करना छोड़कर अपने अड़ियल रुख के कारण उन्हें नजरअंदाज करती रही हैं। फीस वृद्धि के खिलाफ छात्रों ने शानदार संघर्ष चलाया है। यही संघर्ष कुलपति व विश्वविद्यालय प्रशासन की नजरों में चुभ रहा है। वह मौके की तलाश पाकर किसी तरह आंदोलित छात्रों को विश्वविद्यालय के अंदर धरना स्थल से उठाना चाहते हैं। इसी कारणवश लाठी-डंडों से लैस गुंडों की तरह छात्रों पर यह हमला किया गया है।
19 दिसंबर को काकोरी कांड के शहीदों की शहादत दिवस पर, छात्रों के ऊपर विश्वविद्यालय प्रशासन का यह हमला, छात्रों के जनवादी अधिकारों पर हमला है। ब्रिटिश साम्राज्यवादियों की तरह ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन भी तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाकर छात्रों का दमन कर रहा है।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन व पुलिसिया दमन की कड़े शब्दों में घोर निंदा करता है। साथ ही मांग करता है कि छात्रों पर हमला करने वाले सुरक्षाकर्मियों, पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त कर उनपर कानूनी कार्यवाही की जाए। किसी छात्र को परेशान ना किया जाए। छात्रों की 400 प्रतिशत फीस वृद्धि और छात्र संघ चुनाव की जायज मांग को तत्काल पूरा किया जाए।
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