





मोदी सरकार ने छात्रों पर नया हमला करते हुए अल्पसंख्यकों को मिलने वाली मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप(MANF) को खत्म कर दिया है। यह अब वर्ष 2023 से नहीं दी जाएगी।
यह फेलोशिप सच्चर कमेटी की सिफारिशों के बाद वर्ष 2009 से दी जा रही है। यह फेलोशिप गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले मुस्लिम, जैन, बौद्ध, सिख, इसाई और पारसी समुदाय के छात्रों को दी जाती थी। इन समुदायों से आने वाले चंद गरीब छात्रों को ही शोध में यह स्कॉलरशिप दी जाती थी। यह स्कॉलरशिप मुस्लिम, जैन, बौद्ध, सिख, इसाई और पारसी समुदाय के केवल उन छात्रों को दी जाती थी जिनके परिवार की कुल वार्षिक आय 5 लाख से कम हो। यह कितनी सीमित है यह UGC के आंकड़े से पता चल जाता है। UGC के आकंड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 और 2021-22 के बीच कुल 6,722 छात्रों को 738.85 करोड़ रुपये की यह फैलोशिप दी गई थी। लेकिन मोदी सरकार ने ये मामूली राहत भी छीन ली है। इस तरह गरीबों और अल्पसंख्यकों पर नया हमला बोला गया है।
इस स्कालरशिप को खत्म किए जाने का मोदी सरकार ने ये बहाना बनाया है कि यह फेलोशिप उच्च शिक्षा में अन्य योजनाओं को ओवरलैप कर रही थी। यह तो सभी जानते हैं कि एक समय में एक छात्र एक ही योजना का लाभार्थी हो सकता है। चाहे कितनी भी योजनाएं हो वो किसी एक का ही लाभ उठा सकता है। लेकिन झूठ बोलकर शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में बजट कटौती करना मोदी सरकार का सगल बन गया है। मोदी सरकार को इतिहास में मजदूर - मेहनतकशों, गरीबों, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों को मिलने वाली राहतों को छीनने के लिए याद किया जाएगा। साथ ही इस लिए भी याद किया जायेगा कि मजदूर - मेहनतकशों, गरीबों, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों को मिलने वाली राहतों को छीनकर कार्पोरेटों को दिया गया।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन MANF खत्म किए जाने का पुरजोर विरोध करता है। छात्रों से इस हेतु एकजुट होने का आह्वान करता है।




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