विगत 1 जुलाई को बांग्लादेश के ढाका उच्च न्यायालय के आदेश पर आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बहाल करने के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन शुरू हुए। 2018 में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के दबाव में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आरक्षण समाप्त कर दिया था। अदालत के रास्ते आरक्षण के पक्ष में फैसला आने से छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए। प्रदर्शनों का पुलिस ने आंसू गैस, लाठीचार्ज, गोली मारकर दमन किया। पुलिस के अलावा सेना का भी इस्तमाल किया गया है। देशव्यापी इंटरनेट सेवाएं बन्द की गई हैं। छात्रों के इस जुझारू संघर्ष में अब तक 115 लोगों के मारे जाने की खबर है। 21 जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने आरक्षण को सीमित करने का फैसला दिया। साथ ही छात्रों से विश्वविद्यालयों में जाकर पढ़ने की अपील की है।

