2014 से देश की सत्ता पर काबिज मोदी सरकार और एकाधिकारी पूंजीपतियों का गठबंधन जनतांत्रिक मूल्यों पर लगातार हमलावर है। देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय पर संघ-भाजपा की तीखी नजर रही है। इन्होंने JNU को, वहां की जनपक्षधर संस्कृति को बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सरकार लगातार नियोजित तरीके से जेएनयू पर हमलावर है। उसे ध्वस्त करने के लिए सारी तरकीबें अपना रही है। वहीं इसके खिलाफ छात्रों का संघर्ष भी जारी है।
कैंपस के छात्रों से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण मांगों (Charter Of Demands) को लेकर JNU छात्र संघ, JNU के छात्र-छात्राओं के साथ परिसर में 11 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठा है। छात्र संघ की कुछ मांगें बेहद बुनियादी हैं। जैसे: छात्रों से जुड़े किसी मामले में विरोध/प्रदर्शन करने पर JNU प्रशासन विरोध का दमन करने के लिए फाइन लगाता है और अनुशासनात्मक कार्यवाही करता है। वे मांग रहे हैं कि विश्व विद्यालय में ऐसी कार्यवाही बंद हो। CUET द्वारा नामांकन प्रक्रिया रद्द कर जेएनयू अपनी प्रवेश परीक्षा करवाए। छात्रवृत्ति की राशि में वृद्धि की जाए। छात्रों को हॉस्टल नहीं मिलने की वजह से बाहर महंगे कमरे लेकर रहना पड़ रहा है, जबकि विश्वविद्यालय में बराक हॉस्टल 2 वर्षों से बनकर तैयार है। उसे जल्द से जल्द खोला जाए। जेंडर सेंसटाइजेशन कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरेसमेंट (GSCASH) को फिर से स्थापित किया जाए।
JNU VC शांतिश्री पंडित ने छात्र संघ की मांगों को पहले ये कहकर ठुकरा दिया कि ये यूनियन नोटिफाइड नहीं है। भूख हड़ताल लंबी चलने पर जब वो मिलने पहुंची तो कहती हैं कि -''There were no funds". VC कहती हैं पैसा नहीं है। छात्र इस बात को समझते हैं कि फंड कट की ये साजिश इसलिए है ताकि औने- पौने दामों पर JNU की संपत्ति कॉरपोरेट घरानों के हाथों बेचने में सरकार को आसानी हो सके। नहीं तो क्या कारण है कि देश के सबसे अच्छे रिसर्च इंस्टीट्यूट को चलाने के लिए सरकार पैसा नहीं दे रही है।
15 दिनों से ये भूख हड़ताल जारी है। लेकिन JNU प्रशासन का रवैया अभी तक छात्र-छात्राओं के मांग पत्र को लेकर बहुत सकारात्मक नहीं दिखा है। इसी बीच शिक्षा मंत्रालय तक शांतिपूर्ण लॉन्ग मार्च निकाल रहे JNU छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और शांतिपूर्ण लॉन्ग मार्च को नहीं निकालने दिया गया। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबियत हर बदलते दिन के साथ बिगड़ती जा रही है।
सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की हठधर्मिता तथा इस दमनकारी और छात्रविरोधी कृत्य का परिवर्तनकामी छात्र संगठन पुरजोर विरोध करता है। हम JNU के छात्रों और JNUSU की भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए JNU प्रशासन और सरकार से मांग करते हैं कि छात्रों की जायज मांगों को तत्काल पूरा किया जाए।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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