लगभग पिछ्ले डेढ़ साल से अमेरिकी साम्राज्यवादियों की शह पर फिलिस्तीनी जनता पर इजराइली शासकों द्वारा जनसंहार जारी है। 22 जून की सुबह अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने सीधे संप्रभुता सम्पन्न ईरान पर हमला कर इस युद्ध के और बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है। इस हमले से पहले से ही पश्चिम एशिया के सीरिया, यमन, लेबनान, जॉर्डन जैसे देश भी युद्ध की चपेट में हैं। अब इसके और फैलाव का खतरा है।
विगत 13 जून को ईरान पर हमला कर इजरायल ने अमेरिकी साम्राज्यवादियों की मंशा को जाहिर कर दिया था। इस हमले का डोनाल्ड ट्रम्प ने "हमने ईरान को परमाणु समझौते के लिए 60 दिन का समय दिया था, आज 61वां दिन है" कहकर समर्थन किया था। इस हमले के लिए इजरायल ने ईरान के परमाणु शक्ति सम्पन्न होने से उसके "अस्तित्व को खतरे" का बहाना बनाया। ईरान के परमाणु शक्ति सम्पन्न होने से शिकायत करने वाला अमेरिका खुद परमाणु हथियारों का जखीरा रखे हुए है। जिसकी धौंस वह जब तब दिखाता रहता है, इतिहास में हारे हुए जापान पर परमाणु बम गिराकर लाखों बेकसूर जनता की हत्या करने का कलंक अमेरिका पर ही है। अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी साम्राज्यवादी ईरान को रूसी-चीनी साम्राज्यवादी धड़े से अपने पाले में लाना चाहते हैं।
ईरान पश्चिम एशिया में अमेरिकी हितों के खिलाफ चलता रहा है। वह रूसी-चीनी साम्राज्यवादियों के खेमे में चलता रहा है। ईरान पश्चिम एशिया में एक प्रमुख क्षेत्रीय ताकत बनता है। अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध संप्रभु ईरान पर हमला करने पर उसने भी "परिणाम भुगतने" की धमकी दी थी। इस पर रूसी-चीनी साम्राज्यवादी ईरान के प्रतिरक्षा के अधिकार का समर्थन कर रहे हैं। अन्य पश्चिमी साम्राज्यवादी ईरान के परमाणु शक्ति सम्पन्न होने को तो खतरा बता रहे हैं पर अमेरिकी हमले को गलत मान रहे हैं। जाहिर है दुनियाभर में लूट मचाने वाले ये शासक युद्ध के फैलाव में अपने-अपने फायदे के हिसाब से ही बोल रहे हैं।
इस युद्ध के फैलाव की सबसे ज्यादा कीमत आम मेहनतकश जनता को ही चुकानी होगी। यह कीमत न सिर्फ युद्ध क्षेत्र की जनता चुकाएगी बल्कि पूरी दुनिया की मेहनतकश जनता पर भी इसका बोझ पड़ेगा। कच्चे तेल, व्यापार का प्रमुख मार्ग होने से अभी ही महंगाई के रूप में इसके असर की बात हो रही है। यह मेहनतकश जनता के दुश्मन शासकों का अन्यायपूर्ण युद्ध है। यह पश्चिम एशिया में वर्चस्व कायम करने की लड़ाई है। इसके सरगना अमेरिकी साम्राज्यवादी हैं तो अन्य भी अपनी हैसियत के हिसाब से युद्ध की तरफ बढ़ रहे हैं। ये अपनी मेहनतकश जनता सहित पूरी मानवता के दुश्मन हैं।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन अमेरिकी साम्राज्यवादियों के ईरान पर हमले का विरोध करते हुए निंदा करता है। हम छात्रों-नौजवानों सहित सभी इंसाफपसंद जनता से इस अन्यायपूर्ण युद्ध के खिलाफ आवाज बुलंद करने की अपील करते हैं। साथ ही भारत सरकार से मांग करते हैं कि संप्रभु ईरान पर अमेरिकी हमले की निंदा करे।


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