21 July 2025

क्लस्टर/मर्जर के नाम पर स्कूलों को बंद करना नहीं चलेगा!


जनविरोधी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 वापस लो!!

    'राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020' के कुप्रभावों में से एक 'स्कूलों को मर्जर/क्लस्टर के नाम पर बंद करने' के खिलाफ खासा विरोध हो रहा है। उत्तर प्रदेश में लगभग 27,000 स्कूलों के बन्द होने की संभावना के खिलाफ प्रदेश भर में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों की विरोध में आवाज़ उठ रही है। उत्तराखंड में भी कई जिलों से स्कूलों के मर्जर का विरोध हो रहा है। इससे पहले हरियाणा, मध्य प्रदेश में भी सरकारें स्कूल बन्द कर चुकी हैं।


    सरकारों का तर्क है कि छात्र संख्या कम होने के कारण स्कूल मर्जर "जरूरी" है। कई राज्यों में उच्च न्यायालय ने भी इस तर्क को सही माना है। हालांकि यह 'शिक्षा का अधिकार कानून, 2009' के हर एक किलोमीटर में स्कूल के तर्क के खिलाफ है।यह शिक्षा के निजीकरण की पिछले साढ़े तीन दशक की नीतियों का परिणाम है। जिसके तहत सरकारी शिक्षा पर बजट क्रमशः कम करते जाने और निजी स्कूलों की मनमानी की छूट दी गई। इससे वह हालात बनते गए कि कभी गुणवत्ता तो कभी संसाधनों के अभाव में सरकारी शिक्षा को क्रमशः बर्बाद किया गया। इस तरह कानूनी तौर पर शिक्षा के अधिकार की बातें करते हुए भी शिक्षा से सरकार हाथ पीछे खींचती रही। सरकार की सामान्य नीति भी मेहनतकश आबादी के खिलाफ जारी हैं, जिस कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के कारण पलायन, बाल मजदूरी आदि समस्याएं बनी रही कई मायने में तो और गहरा गई। 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020' अब शिक्षा के बचे हुए ढांचे को "बोझ" बता खत्म करने पर उतारू है।


    राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 न सिर्फ मर्जर जैसे निजीकरण के जनविरोधी कदमों के आधार पर भेदभाव बढ़ाती है, बल्कि शिक्षा से वैज्ञानिक, ऐतिहासिक तत्वों को हटाकर कूपमंडूकता, अंधविश्वास से भगवाकरण को बढ़ाने और उच्च शिक्षा में छात्रों के जनवादी अधिकारों को कुचलने के कदमों से भरी हुई है। इसी कारण कभी कॉलेज-कैंपसों में सारे दबाव के बावजूद छात्र इसका विरोध कर रहे हैं। भाषाई आधार पर दक्षिण के राज्य नाराजगी जता रहे हैं तो भगवाकरण के खिलाफ बुद्धिजीवी इसकी निंदा कर रहे हैं। मर्जर के नाम पर स्कूल बंदी जैसे कदमों के खिलाफ तो अभिभावक, आम जन भी संघर्ष में शामिल हुए हैं।


    मर्जर के नाम पर स्कूल बंदी के खिलाफ संघर्ष करना शिक्षा तक हर मेहनतकश के बच्चे की पहुंच के लिए जरूरी है। जरूरी है कि इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 वापस लेने का सरकार पर दबाव बनाया जाए। परिवर्तनकामी छात्र संगठन स्कूल बंदी को मर्जर के कदमों के खिलाफ संघर्षों का पुरजोर समर्थन करता है। हम सभी छात्रों-नौजवानों सहित इंसाफ पसंद नागरिकों, संगठनों से भी संघर्ष में शामिल होने की अपील करता हैं।

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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