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10 April 2026

ईरान से युद्ध विराम पर मजबूर हुए आततायी अमेरिकी शासक


     8 अप्रैल को 40 दिनों से ईरान पर अमेरिका, इजरायल द्वारा थोपे गए युद्ध पर विराम के लिए अमेरिकी-इजरायली शासक मजबूर हुए। 28 फरवरी को ईरान पर बिना उकसावे के अमेरिका-इजरायल ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई के साथ अन्य उच्च अधिकारियों को निशाना बनाया गया। स्कूल पर हुए हमले में मासूम स्कूली बच्चियां भी मारी गयीं। ईरान ने इन हमलों पर पलटवार किया। इजरायल के साथ ही खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों और प्रमुख जगहों पर हमला किया। यह गौर करने लायक है कि ईरान पर अन्यायपूर्ण हमले के खिलाफ ईरानी जनता सहित दुनियाभर की मेहनतकश जनता खड़ी थी।

5 January 2026

हमलावर अमेरिकी साम्राज्यवादियों का विरोध करें!



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश से 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर लिया गया। अमेरिकी सैनिक मादुरो व उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका ले आये। जहां उन पर ड्रग माफियाओं से सम्बन्ध के तथाकथित आरोप में मुकदमा चलाया जाएगा। वेनेजुएला में हुई इस अस्थिरता को सामान्य करने के लिए सैनिक रखने तक कि बात डोनाल्ड ट्रंप ने कही।

8 September 2025

नेपाल के संघर्ष को हमारा सलाम!


     परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) नेपाल में हो रहे Gen Z के आंदोलन के साथ सम्पूर्ण एकता व्यक्त करते हैं। यह संघर्ष भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया प्रतिबंध और राजनीतिक दमन के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है।

22 June 2025

जनसंहारक इज़रायली-अमरीकी शासकों द्वारा ईरान पर हमले का विरोध करो!



     लगभग पिछ्ले डेढ़ साल से अमेरिकी साम्राज्यवादियों की शह पर फिलिस्तीनी जनता पर इजराइली शासकों द्वारा जनसंहार जारी है। 22 जून की सुबह अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने सीधे संप्रभुता सम्पन्न ईरान पर हमला कर इस युद्ध के और बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है। इस हमले से पहले से ही पश्चिम एशिया के सीरिया, यमन, लेबनान, जॉर्डन जैसे देश भी युद्ध की चपेट में हैं। अब इसके और फैलाव का खतरा है।

22 July 2024

बांग्लादेश के छात्रों का आरक्षण विरोधी संघर्ष


विगत 1 जुलाई को बांग्लादेश के ढाका उच्च न्यायालय के आदेश पर आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बहाल करने के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन शुरू हुए। 2018 में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के दबाव में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आरक्षण समाप्त कर दिया था। अदालत के रास्ते आरक्षण के पक्ष में फैसला आने से छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए। प्रदर्शनों का पुलिस ने आंसू गैस, लाठीचार्ज, गोली मारकर दमन किया। पुलिस के अलावा सेना का भी इस्तमाल किया गया है। देशव्यापी इंटरनेट सेवाएं बन्द की गई हैं। छात्रों के इस जुझारू संघर्ष में अब तक 115 लोगों के मारे जाने की खबर है। 21 जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने आरक्षण को सीमित करने का फैसला दिया। साथ ही छात्रों से विश्वविद्यालयों में जाकर पढ़ने की अपील की है।

26 April 2024

अमेरिकी विश्वविद्यालयों के छात्रों को सलाम!


फिलिस्तीनियों का नरसंहार बंद करो!

पिछले कई दिनों से अमेरिका में एक के बाद एक विश्वविद्यालयों में छात्रों के प्रदर्शन हो रहे हैं। लगभग 25 विश्वविद्यालय के छात्र अपने कैंपस में प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन फिलिस्तीन पर जारी नरसंहार के खिलाफ हैं। छात्रों की मांग है कि यह नरसंहार तुरंत रोका जाय।

19 June 2022

छात्र-युवा विरोधी 'अग्निपथ' योजना को तत्काल वापस लो!

मोदी सरकार होश में आओ, नौजवानों से मत टकराओ।
अग्निपथ-अग्निवीर के नाम पर बेरोजगारों को ठगना बंद करो।
सेना में 4 साल के लिए ठेके पर भर्ती की योजना वापस लो।
सेना में रिक्त एक लाख पदों पर तत्काल स्थाई नियुक्तियां करो।
प्रदर्शनकारी नौजवानों पर लाठीचार्ज करना बन्द करो। और दर्ज मुकदमे वापस लो।
देशभर में खाली पड़े 60 लाख पदों पर भर्ती निकालकर पदों पर स्थाई नियुक्ति दो।
सरकारी संस्थानों को बेचना बंद करो। ठेकेदारी प्रथा खत्म कर सबको स्थाई रोजगार दो।

दोस्तो,
          केन्द्र की मोदी सरकार ने हम बेरोजगार नौजवानों पर एक बार फिर से हमला बोला है। इस बार ये हमला 'अग्निपथ' योजना के नाम पर बोला गया है। इस योजना के तहत भारतीय सेना में हर साल 40 से 50 हजार पदों पर भर्ती निकाल कर युवाओं को सिर्फ 4 साल के लिए सेना में भरती किया जायेगा। 4 साल बाद इनमें से 25% को रिटेन किया जायेगा बाकी 75% को अपने-अपने 'अग्निपथों' पर भटकने के लिए छोड़ दिया जायेगा।

18 January 2022

परिवर्तनकामी छात्र संगठन का दो दिवसीय केंद्रीय सम्मेलन सफलता पूर्वक संपन्न!



पछास का दो दिवसीय केंद्रीय सम्मेलन 25-26 दिसंबर को बरेली में सम्पन्न हो गया। इस सम्मेलन में संगठन ने दो दिनों तक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय परिस्थितियों और शिक्षा जगत में आए बदलावों पर गहन चर्चा करते हुए राजनीतिक रिपोर्ट को पास किया। साथ ही इन बदलावों की रोशनी में संगठन के लिए नई कार्य दिशा को भी सूत्रित किया।

19 May 2021

फिलीस्तीन पर इस्राइली हमलों का विरोध करो!

इस्राइली शासकों द्वारा फिलीस्तीनियों के नरसंहार का विरोध करो!!


     पिछली 10 मई से इस्राइली शासकों द्वारा फिलीस्तीनियों पर हमले जारी हैं। अब तक इन हमलों में 200 से भी अधिक लोगों की हत्या की जा चुकी है। इन हमलों में मासूम बच्चों को भी मिसाइली हमले का शिकार बनाया गया है। भारी संख्या में इस्राइली मिसाइलों ने फिलीस्तीन के अस्पतालों, स्कूलों व घरों को निशाना बनाया है। फिलीस्तीन की तरफ से कट्टरपंथी संगठन हमास भी इस्राइली हमले का जवाब दे रहा है। लेकिन हमास के हमले इस्राइली हमलों के आगे कहीं नहीं ठहरते। इस्राइल हमास के ज्यादातर मिसाइलों को हवा में नष्ट कर दे रहा है। अमेरिकी और यूरोपीय साम्राज्यवादियों की मदद से अपना सैन्यकरण करने वाले इस्राइल के पास जनसंहारक हथियार हैं। वह इन हथियारों का इस्तेमाल फिलीस्तीन पर कर रहा है। जिसकी कीमत फिलीस्तीन के मासूम बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।

17 May 2021

ये मौतें नहीं नरसंहार है!

     इस समय हमारा देश और हम एक ऐसा दर्द सह रहे हैं जिससे बचा जा सकता था। इस समय हमारा देश एक ऐसा देश बना दिया गया है जहां अपने प्रिय परिजनों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए रोते-गिड़गिड़ाते लोगों और ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण तड़प-तड़प कर मर जाने वाले लोगों का मंजर, आम मंजर बन गया है। इस वक्त हमारा देश ऐसा देश बना दिया गया है जहां पर लोग अपने प्रियजनों की लाशों को अपने ही कंधों पर ढोने को मजबूर कर दिये गये हैं। हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि मृृतकों के लिए शमशान, लकड़ी और कब्रें भी कम पड़ गयी हों और सैकड़ों की संख्या में लाशें नदी में तैर रही हैं। इन तैरती लाशों को कुत्ते नोंच रहे हैं। कई परिवार तो ऐसे हैं जहां एक की मौत का मातम भी पूरा नहीं हुआ था कि दूसरी, तीसरी,.... मौतें हो गयीं। लोग अपने एक प्रिय की मौत पर सही से रो भी नहीं पाए थे कि अन्य प्रियजनों को बीमारी ने आ घेरा। कई परिवार तो ऐसे हो गये हैं जहां सिर्फ दुधमुहें बच्चे ही बचे हैं, जिनके सिर पर अब किसी का भी आसरा नहीं बचा।

25 November 2020

26 नवंबर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में ....

छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !

 


26 नवंबर को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व विभिन्न मजदूर संगठनों द्वारा देशव्यापी आम हड़ताल करना तय किया गया है। इस हड़ताल के साथ ही किसान संगठनों ने भी देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन मजदूरों की आम हड़ताल व किसानों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करता है। साथ ही, छात्रों का आह्वान करता है कि देश के मजदूरों-किसानों के संघर्ष से जोड़ते हुए छात्रों व शिक्षा पर हो रहे हमलों के विरोध में एकजुट आवाज उठाएं।

26 June 2020

लचर सरकारी स्वास्थ्य तन्त्र, आलीशान निजी अस्पताल और कोरोना के खिलाफ जंग

कोरोना महामारी की शुरुआत दुनिया भर में दिसंबर के समय चीन से हो चुकी थी। उस समय भारत सरकार का रुख उदासीनता भरा था। यहां तक की 30 जनवरी को भारत में कोरोना का पहला मरीज मिलने के बावजूद सरकार के रुख में कोई गंभीरता नहीं आई। पहला लॉकडाउन लगाए जाने तक सरकार ने फरवरी-मार्च के माह तक भी कोई विशेष तैयारी नहीं की थी। इस दौरान चर्चाएं चीन को महामारी से होने वाले नुकसान का फायदा भारतीय उद्योग व अर्थव्यवस्था को मिलने के कयास लगाए जा रहे थे, ट्रंप के स्वागत में भीड़भाड़ भरे भव्य कार्यक्रम, मध्यप्रदेश में सरकार बनाने बिगाड़ने का खेल, विदेश से आने वाले लोगों पर भी कोई रोक या समुचित जांच न करना, आदि सरकार की मुख्य हरकतें थी। इस बीच कोरोना के बारे में खतरनाक तरीके से अंधविश्वासों और कूपमंडूकता भरी बातों ने जगह पाई। गाय के गोबर, गोमूत्र, हल्दी, लहसुन, अदरक, गिलोय, आदि से कोरोना के इलाज के दावे किए जाने लगे। मांसाहार को कोरोना का कारण गिनाया जाने लगा। लेकिन वक्त के साथ संकट (कोरोना) के अधिकाधिक वास्तविक होते जाने के बाद अंधविश्वास और कूपमंडूकता भरी बातें कमजोर तो हुईं, पर सरकार से लेकर मीडिया तक ने उनके लिए जगह बचाये रखी। 

27 March 2020

कोरोना महामारी के दौरान मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करो।

इस दौरान भ्रांतियां और अंधविश्वास फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करो।


कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया जूझ रही है। भारत समेत कई देशों की सरकारों द्वारा इस महामारी से निपटने को ‘लाॅक डाउन’ जैसे आपातकालीन कदम उठाये गये हैं।


25 March 2020

इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है

प्रिय साथियों,
आशा है आप स्वस्थ होंगे

'कोरोना' नामक महामारी के चलते हमारे संगठन की गतिविधियां बुरी तरह से बाधित हो गई हैं। हम अपने साथियों सहित जनता से कट गए हैं। यह स्थिती अभी कई दिन कायम रहनी है।

2 December 2019

तुम तो हम जैसे ही निकले अब तक कहां छुपे थे भाई! वो मूरखता-वो घामड़पन जिसमें हमने सदी गंवाई !!

   


        कुछ सालों पहले पाकिस्तान की मशहूर मानव अधिकार कार्यकर्ता फहमीदा रियाज ने उक्त पंक्तियां भारत के हाल को देखते हुए लिखी थी। इस कविता के माध्यम से वो बता रही थी कि भारत का हाल भी पाकिस्तान की तरह ही होता जा रहा है। अभी 1 साल पहले ही उनका देहांत हुआ है।

30 June 2016

शहीद शिक्षकों का खून रंग लाएगा

मैक्सिको के बर्बर शासकों ने किया 9 शिक्षकों का कत्ल


        19 जून को मैक्सिको सरकार ने ओक्साका प्रांत में 500 हड़ताली शिक्षकों व उनके समर्थकों पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर 9 शिक्षकों की हत्या कर दी तथा दर्जनों को घायल कर दिया। ये शिक्षक लंबे समय से जनविरोधी ‘शैक्षिक सुधारों’ के खिलाफ संघर्षरत थे और विरोध की इसी कड़ी में उन्होने सड़क जाम कर दी थी। जिसका खूनी दमन मैक्सिको पुलिस द्वारा बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलीबारी कर के किया गया। मरने वालों व घायलों में ज्यादातर युवा हैं। परिवर्तनकामी छात्र संगठन शिक्षकों की नृशंस हत्या का विरोध करते हुए शहीद शिक्षकों को श्रृद्धांजली अर्पित करता है।

13 September 2015

साम्राज्यवादी कुकर्मों के कारण दर-दर भटकते लोग

      सीरिया से बड़े पैमाने पर लोग अपना घर-बार छोड़कर दर-दर भटक रहे हैं।ये सभी यूरोपीय देशों में शरण लेने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। असुरक्षित यात्रा में कई लोग भूख-प्यास से भी मर जा रहे हैं। बीबीसी के अनुसार इस वर्ष 3 लाख 40 हजार लोग अपना वतन छोड़कर शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं। सीरियाई लोगों का दर्द देखकर यूरोपीय देशों के नागरिकों ने उनका साथ देने के लिए प्रदर्शन किये। इसके बावजूद पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासक शरणार्थियों को अनचाहा बोझ समझकर तरह-तरह के बहाने बनाकर इसे रोकना चाहते हैं। हंगरी ने तो शरणार्थियों को रोकने के लिए तार-बाड़ खड़ी कर दी है। साम्राज्यवादी आईएसआईएस की उनके देश में घुसपैठ का बहाना बनाकर शरणार्थियों को शरण देने में अडंगे लगा रहा है। इस सबके बावजूद एक दिन भी ऐसा नहीं गया जबकि पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासकों ने मानवता के नाम पर झूठे आंसू ना बहाये हों।

24 November 2011

हम मिश्र में सैनिक तानाशाही के खिलाफ चल रहे आंदोलन का पुरजोर समर्थन करते हैं

मिश्र के नौजवान एक बार फिर तहरीर चौक पर एकत्रित हो चुके हैं। इस बार उनके निशाने पर सैनिक तानाशाही है। पिछले पांच दिनों से सैनिक सरकार और विरोधियों के बीच जबरदस्त संघर्ष चल रहा है। सैनिक सरकार का मुखिया तंतवई विरोधियों के दमन पर उतरा हुआ है। अब तक पुलिस की गोलीबारी में दो दर्जन से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन विरोधी जनता इस दमन के बावजूद घबरा नहीं रही है। उनके इरादे काफी मजबूत हैं।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन मिश्र के बहादुर नौजवानों के इस संघर्ष में उनके साथ पूरी तरह से खड़ा है। हम तंतवई सरकार के द्वारा जनता के दमन का घोर विरोध करते हैं। मुबारक सरकार के पतन के बाद से ही तंतवई सरकार की कोशिश है कि मिश्र पर सेना का शिकंजा कमज़ोर न पड़ने पाए। इस षड़यंत्र में उसे अमेरिकी साम्राज्यवादियों का भी समर्थन मिल रहा है। मिश्र की जनता आज किसी भी ढंग का सैनिक शासन नहीं चाहती है। उसे भरोसा नहीं है कि तंतवई सरकार आगामी चुनावों में कोई वास्तविक जनतांत्रिक सरकार बनने देगी, इसीलिए जनता चाहती है कि चुनाव से पहले तंतवई सरकार खुद को बर्खास्त करके सत्ता किसी जनवादी निकाय को सौंपे।
पछास मानता है कि मिश्र की जनता की यह मांग जायज़ है। हम इस मांग का समर्थन करते हैं। हमें भरोसा है कि इस बार मिश्र की जनता बिना ठोस नीजे के तहरीत चौक नहीं छोड़ेगी। हम भारत के सभी छात्रों-नौजवानों का आह्वान करते हैं कि वे मिश्र की जनता के साथ अपनी मजबूत एकजुटता दिखाएं।
इंकलाब जिंदाबाद!
द्वारा-
अध्यक्ष
परिवर्तनकामी छात्र संगठन