21 June 2026

पेपर लीक पर जवाबदेही किसकी?


धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो!

देश में पेपर लीक का सिलसिला जारी है। एक एग्जाम के लिए छात्र सालों मेहनत करते हैं। पेपर देने के लिए बसों, ट्रेनों में भारी परेशानी झेलते हैं। अपने परिवार का काफी पैसा और समय लगाते हैं। इस उम्मीद में कि नौकरी के बाद जिंदगी सुधर जाएगी। पेपर लीक ऐसी उम्मीदों पर पानी फेर देता है। छात्र, उनका परिवार, दोस्त सब एक-दूसरे को ढांढस बंधाते हैं, अफसोस जताते हैं। लाचारी और गुस्सा साथ-साथ आता है। लाखों लोग इस लाचारी और गुस्से से गुजरते हैं। सालों से हो रहे पेपर लीक से अब इनकी संख्या करोड़ों में है। कई तो इतने टूट जाते हैं कि अपनी जिंदगी ही खत्म कर लेते हैं। इस पेपर लीक के बाद नागपुर की आकांक्षा चतुर्वेदी, जयपुर के प्रदीप मेघवाल आदि कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली।

पिछले दशकों में सरकारों की नीतियों के कारण भारत में बेरोजगारी बढ़ती चली गई है। बेरोजगारी ने छात्रों के ज्ञान और उनके गरिमामय जीवन जीने के अधिकार की धज्जियां उड़ा दी है। छात्र लाखों रुपये खर्च कर, गरीब-किसान-मजदूर कर्ज लेकर या अपनी बची संपत्ति घर-खेत बेच कर अपने बच्चों को पढ़ाता है। उसके बाद भी उसके बच्चों के पास कोई काम नहीं है। और ऐसे में परीक्षाओं का पेपर लीक होना सारी उम्मीदों पर पानी फेर देता है।

कौन है इसका जिम्मेदार? कौन इन बेरोजगारों और उनके परिवार वालों को जवाब देगा? कौन टूट गए लोगों के परिवार से माफी मांगेगा, उन्हें सांत्वना देगा? शिक्षा मंत्री 

धर्मेंद्र प्रधान को जानलेवा लापरवाही के कारण छात्रों युवाओं को हुई परेशानी और आत्महत्याओं की जिम्मेदारी लेनी होगी, इस्तीफा देना होगा। क्योंकि सत्ता में बैठे लोग हद दर्जे के बेशर्म हो गए हैं तो यह हम नौजवानों की जिम्मेदारी है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफे के लिए मजबूर करें। इसके लिए सड़कों से लेकर मीडिया, सोशल मीडिया तक हर जगह कोशिश करें। और यह कोशिश जारी है। यह कोशिश 'कॉकरोच जनता पार्टी' के साथ जुड़कर करोड़ों-करोड़ छात्र-युवा या कहें जेन-जी कर रहे।

'कॉकरोच जनता पार्टी' इन हालातो में सीजेआई सूर्यकांत के "कॉकरोच" और "परजीवी" वाले शर्मनाक बयान के कारण ही पैदा हुई। अच्छी पढ़ाई और नौकरी देने में फेल सिस्टम जब छात्रों-युवाओं को "कॉकरोच" और "परजीवी" कहता तो और क्या करते? गहरे दर्द में मुस्कुराते हुए इस बेज्जती को स्वीकार करने का व्यंग्य (satire) किया। अभिजीत दीपके का यह (satire) आज छात्रों-युवाओं का बड़ा अभियान बन गया है। यह खास तौर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे का अभियान है।

इस अभियान ने सिस्टम के हर अंग; न्यायालय, सरकार, अफ़सरशाही; के फेल्योर को उजागर किया है। जो संविधान से चलने चाहिए और चलते हैं। आज सिस्टम इंसाफ की हर आवाज को संविधान के तहत कुचल रहा है, लाठी मार रहा है, मुकदमे लगा रहा है, जेल में ठूंस रहा है। यहां तक की संविधान से बाहर जाकर "देशद्रोही", "पाकिस्तानी", "अर्बन नक्सल" और न जाने क्या-क्या कहकर बदनाम कर रहा है। इस सबके बावजूद हम अंबानी-अडानी जैसों के सेवक सिस्टम की कठपुतली, लठैत या अंधभक्त बनने से इंकार करते हैं। इसकी हर हिटलरी चाल का हम मुकाबला करें।

यह आंदोलन देश के छात्रों-युवाओं का ही नहीं बल्कि हर मजदूर मेहनतकश का है। पसीने में लथपथ किसानों का है। मेहनती कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों का है। उनके बच्चों के बेहतर भविष्य का आंदोलन है। हमें याद रखना चाहिए कि चाहे किसान आंदोलन रहा हो या मजदूर आंदोलन या महिलाओं के सम्मान का संघर्ष इंसाफ की हर लड़ाई में छात्रों-युवाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। और यह भागीदारी आगे भी जारी रहेगी। 

यह साफ है की मौजूदा सिस्टम सड़ चुका है। यहां मेहनती और ईमानदार मुश्किल से जी पा रहे हैं। इस सिस्टम को चलाने वाले अफसर, नेता, जज मजे से बचे-खुचे सिस्टम को लूट रहे हैं। मेहनतकश जनता के यह लुटेरे छात्रों-युवाओं को 'कॉकरोच' कह रहे हैं।

हमारी यह जिम्मेदारी भी है और जरूरत भी कि हम इस लूट के तंत्र की तह तक जाएं। यह समझें कि इसके असल कारण क्या हैं? जैसा कि नौजवानों के दिलों में बसने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह ने किया। वह कैसी दुनिया और कैसा भारत चाहते हैं उसके बारे में शहीदे आजम भगत सिंह ने कहा था- "जहां एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का और एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति का शोषण ना हो।" ऐसा समाज सिर्फ समाजवादी क्रांति से ही हासिल हो सकता है। भगत सिंह और क्रांतिकारियों के सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी अब हम नौजवानों या जेन-जी की।

आइए! पेपर लीक की जवाबदेही तय करवाएं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लें। हम यह वायदा करें कि समाज को सभी मेहनतकशों के सम्मान से रहने लायक बनाने तक 'कॉकरोच' संघर्ष करते रहेंगे। इस तरह 'कॉकरोच' से इंसान बनने की राह में चलते रहेंगे, समूह में, एक संगठन में। परिवर्तनकामी छात्र संगठन भी इंकलाब की इस राह पर है। आइए! आपका भी स्वागत है।

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

10 June 2026

केतन के हत्यारों को सजा दो!

जातिवाद का विरोध करो!

     उत्तराखंड के टिहरी में जातीय दंभ के कारण 18 वर्षीय बारहवीं के छात्र केतन की हत्या कर दी गयी। देवल गांव निवासी केतन लाल का कुछ माह पहले पड़ोसी लम्बगांव निवासी लड़की से परिचय हुआ। फोन पर बातचीत करते हुए, दोनों का प्रेम प्रसंग चला। लड़की के परिवार वालों ने ऊंची जाति के दम्भ में केतन की हत्या की साजिश रची। लड़की से फोन करवा 8 जून की रात पहले लड़के को गांव में बुलाया और वहां केतन और उसके दोस्त की बुरी तरह पिटाई की। सुबह केतन के परिजनों को फोन पर "अपने लड़के को यहां से ले जाओ" कहा। अस्पताल में केतन की मौत हो गई जबकि उसका दोस्त गम्भीर रूप से घायल है।

8 May 2026

बिहार में TRE-4 का नोटिफिकेशन तुरन्त जारी करो !


आंदोलित छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त करो!!

     आज पटना के जेपी गोलंबर पर BPSC (Bihar public service commission) के छात्र TRE-4 (Teacher Recruitment Examination) का नोटिफिकेशन तुरंत जारी करने की मांग कर रहे थे। वह पिछले दो साल से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा किया गया बर्बर लाठीचार्ज भाजपा की सम्राट चौधरी सरकार के युवा-विरोधी चरित्र को बेनकाब करता है। भाजपा गठबंधन वाली ये सरकार नरेंद्र मोदी के फासीवादी शासन की राह पर है। यहां बेरोजगारी की भयावहता और छात्रों का सिर फोड़ने के बाद भी "सब चंगा सी" का शोर करती है। दूसरी तरफ मंत्रिमंडल विस्तार कर नई-नई कुर्सियां बांट नए-नए पड़ बांटती है।

10 April 2026

ईरान से युद्ध विराम पर मजबूर हुए आततायी अमेरिकी शासक


     8 अप्रैल को 40 दिनों से ईरान पर अमेरिका, इजरायल द्वारा थोपे गए युद्ध पर विराम के लिए अमेरिकी-इजरायली शासक मजबूर हुए। 28 फरवरी को ईरान पर बिना उकसावे के अमेरिका-इजरायल ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई के साथ अन्य उच्च अधिकारियों को निशाना बनाया गया। स्कूल पर हुए हमले में मासूम स्कूली बच्चियां भी मारी गयीं। ईरान ने इन हमलों पर पलटवार किया। इजरायल के साथ ही खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों और प्रमुख जगहों पर हमला किया। यह गौर करने लायक है कि ईरान पर अन्यायपूर्ण हमले के खिलाफ ईरानी जनता सहित दुनियाभर की मेहनतकश जनता खड़ी थी।

18 March 2026

उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों का बंद होना: घोर नीतिगत लापरवाही का उदाहरण


     उत्तराखंड आज शिक्षा के क्षेत्र में एक गंभीर संकट का शिकार है। जो राज्य सरकार की नीतिगत असफलता और दूरदर्शिता की पूर्ण कमी को उजागर करता है। पिछले पांच वर्षों (2020-25) में 826 सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद हो चुके हैं। टिहरी गढ़वाल में 262, पौड़ी गढ़वाल में 120, पिथौरागढ़ में 104 और अल्मोड़ा में 83 स्कूलों पर ताले लग चुके हैं। यही हालात राज्य के अन्य जिलों में है। यह जानकारी उत्तराखंड सरकार ने एक सवाल के जबाव में गैरसैंण में विधानसभा सत्र में दी।

4 February 2026

UGC रेगुलेशन 2026 हंगामा है क्यों बरपा


     UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने 13 जनवरी 2026 को एक अधिसूचना जारी की। इसका नाम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 रखा गया। इसके जरिए देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के तहत प्रत्येक संस्थान में समान अवसर केंद्र (EOC) स्थापित करना अनिवार्य होगा। जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समाज के सभी वर्गों के लिए समान अवसर और समावेशन सुनिश्चित करना है। EOC के अंतर्गत इक्विटी कमेटी (समता समिति) गठित होगी, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के प्रमुख करेंगे। कमेटी में OBC, विकलांग, SC, ST और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा। EOC को अर्द्धवार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

5 January 2026

हमलावर अमेरिकी साम्राज्यवादियों का विरोध करें!



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश से 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर लिया गया। अमेरिकी सैनिक मादुरो व उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका ले आये। जहां उन पर ड्रग माफियाओं से सम्बन्ध के तथाकथित आरोप में मुकदमा चलाया जाएगा। वेनेजुएला में हुई इस अस्थिरता को सामान्य करने के लिए सैनिक रखने तक कि बात डोनाल्ड ट्रंप ने कही।