जातिवाद का विरोध करो!
उत्तराखंड के टिहरी में जातीय दंभ के कारण 18 वर्षीय बारहवीं के छात्र केतन की हत्या कर दी गयी। देवल गांव निवासी केतन लाल का कुछ माह पहले पड़ोसी लम्बगांव निवासी लड़की से परिचय हुआ। फोन पर बातचीत करते हुए, दोनों का प्रेम प्रसंग चला। लड़की के परिवार वालों ने ऊंची जाति के दम्भ में केतन की हत्या की साजिश रची। लड़की से फोन करवा 8 जून की रात पहले लड़के को गांव में बुलाया और वहां केतन और उसके दोस्त की बुरी तरह पिटाई की। सुबह केतन के परिजनों को फोन पर "अपने लड़के को यहां से ले जाओ" कहा। अस्पताल में केतन की मौत हो गई जबकि उसका दोस्त गम्भीर रूप से घायल है।
जातिवादी हिंसा-हत्या की घटनाएं आज भी जारी हैं। उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। सरकारों ने कभी इसे खत्म करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। उल्टा जातिवादी हिंसा-हत्या के मामलों में आरोपियों को बचाने की कोशिशें भी होती रहीं। भाजपा बढ़-चढ़ कर हिंदूवादी राजनीति की बात करती है, जिसमें जातिवादी हिंसा-हत्या को वर्ण-जाति के सामंती विचारों के जरिये जायज ठहराया जाता है। प्रेम को "लव जिहाद" घोषित कर भाजपा मुसलमानों पर हमलावर है तो दूसरी तरफ अंतरजातीय प्रेम भी उसे नागवार गुजरता है। आज निम्न मानी जाने वाली जातियों ने जातीय दम्भ के चलते होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया है। इसके चलते कानूनी तौर पर आरोपियों को कभी सजा भी मिल जाती है, पर सामाजिक तौर पर जातिवाद की जड़ें अभी भी बहुत गहरी हैं। यही केतन लाल की हत्या का मुख्य कारण है।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन जातिवाद को समाज का दुश्मन मानता है। हम केतन लाल के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा की मांग करते हैं। आज हर तरह की गैरबराबरी का आधार पूंजीवादी व्यवस्था है। पछास छात्रों-नौजवानों को हर तरह की गैरबराबरी के खिलाफ, समाजवादी समाज के निर्माण के संघर्ष में उतरने का आह्वान करता है।
केंद्रीय कार्यकारणीपरिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)
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