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25 November 2025

शिक्षण संस्थाओं का साम्प्रदायिक विभाजन के लिए दुरुपयोग


    जम्मू-कश्मीर के 'श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस' में 2025-26 के सत्र में 90% कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का चयन हुआ। यानी 50 सीटों में 42 पर कश्मीरी और 8 सीटों पर जम्मू के छात्रों का नाम आया। जम्मू कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेकेबीओपीईई) पर किसी तरह की अनियमितता का आरोप भी नहीं है। तब भाजपा ने वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा मेडिकल इंस्टिट्यूट के संचालन का हवाला दे, प्रवेश रद्द करने की मांग की। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपाल मनोज सिन्हा ने ज्ञापन स्वीकार कर लिया।

8 April 2024

लोकसभा चुनाव के मौके पर छात्रों-नौजवानों का मांग पत्र


साथियो,
पूरे देश में चुनावी माहौल गर्म हो चुका है। नेतागण वायदों-जुमलों-गारंटियों की घोषणायें कर जनता को लुभाने में मगन हैं।

इन चुनावों में हमारे सामने एक ओर पिछले 10 वर्षों से सत्ता में बैठी भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन सरकार है। जो तमाम सारे वायदे कर सत्ता में आई थी। लेकिन सत्ता में आने के बाद इस सरकार ने इसके एकदम उलट ही काम किया है। हम देख सकते हैं देश भर में छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान, महिलाएं, छोटे व्यापारी, कर्मचारी आदि सभी वर्ग-तबके इस सरकार की नीतियों का दंश झेल रहे हैं। बढ़ती बेरोजगारी ने हम छात्र-युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना दिया है। वहीं श्रम कानूनों पर हुये हमले ने मज़दूरों के काम के हालात और कठिन बना दिये हैं। इसी सरकार के कार्यकाल में किसानों के ऊपर काले कानून लाद दिए गए। किसानों के लंबे संघर्ष और 700 से अधिक बलिदानों के बाद यह सरकार कानून वापस करने को मजबूर हुई। एक ओर मोदी सरकार 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का नारा देती है तो दूसरी ओर आईआईटी बीएचयू में छात्रा के साथ बलात्कार में भाजपा आईटी सेल के कार्यकर्ता संलिप्त होते है। इनका नारी विरोधी चरित्र महिला कुश्ती पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपी भाजपा सांसद ब्रजभूषण सिंह को बचाने व पुलिस द्वारा महिला पहलवानों के साथ किये दुर्व्यवहार के रूप में दिखा। महंगाई, गरीबी से आमजन के हालत बेहाल है। दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों पर इस सरकार में हमले बढ़ें हैं।

13 March 2024

नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर सांप्रदायिकता का जहर घोलने की कोशिशों का विरोध करो!


विश्वविद्यालय कैंपसों में छात्रों का दमन बंद करो।

      11 दिसंबर 2019 को संसद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पारित कर दिया गया। धर्म के आधार पर नागरिकता देने में भेदभाव करने वाले इस कानून का उस समय देशभर में तीखा विरोध हुआ था। भारी विरोध के कारण मोदी सरकार कानून को लागू करने के लिए बनने वाली नियमावली जारी करने से बचती रही। अब मोदी सरकार ने 11 मार्च को सीएए कानून की नियमावली जारी कर दी। जिस बिल को पढ़ते वक्त भारत के गृह मंत्री अमित शाह बोलते हैं कि इस बिल के द्वारा पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से मुस्लिमों को छोड़कर हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी सभी अल्पसंख्यकों (उक्त देशों के) को नागरिकता देने का रास्ता प्रशस्त होगा।

11 December 2022

मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप (MANF) को खत्म करने का फैसला वापस लो!




       मोदी सरकार ने छात्रों पर नया हमला करते हुए अल्पसंख्यकों को मिलने वाली मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप(MANF) को खत्म कर दिया है। यह अब वर्ष 2023 से नहीं दी जाएगी।

9 December 2022

आर्थिक आधार पर आरक्षण के बहाने गरीब सवर्णों को छलती मोदी सरकार


      आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद सवर्णों हेतु 'आर्थिक आधार पर आरक्षण' पर मुहर लग गई। सर्वोच्च न्यायालय की 5 जजों की पीठ के 3:2 के फैसले के आधार पर सवर्णों हेतु 'आर्थिक आधार पर आरक्षण' जारी रहेगा। इस तरह सर्वोच्च न्यायालय ने मोदी सरकार के पक्ष में फैसला 
सुनाया।

22 October 2022

CUET के दावों की खुल गई पोल ... बोल रे साथी हल्ला बोल ।।



       16 सितंबर को, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 114 CUET टॉपर्स के नामों की घोषणा की जिन्होंने कम से कम चार या अधिक पेपर में 100 पर्सेंटाइल हासिल किए थे। इंडियन एक्सप्रेस ने 114 टॉपर्स में से 103 से बात की। इन बातों में जो निष्कर्ष निकल कर आए वो CUET लागू करते समय किए गए दावों की पोल खोल रहे हैं। आइए उन दावों और हकीकत को जानते हैं।

15 September 2022

युवा बेरोजगारों की आवाज सुनो मोदी सरकार, बताओ! कहां है हमारा रोजगार?


राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस पर

        17 सितम्बर को विगत दो वर्षों से छात्र-युवा राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मना रहे हैं। 2020 में थाली, ताली, दिये जलाकर सरकार को जगाने के साथ ही युवाओं-बेरोजगारों ने सड़कों पर उतरकर भी रोजगार की मांग की। छात्रों-युवाओं के आक्रोश का उद्देश्य था कि सरकार रोजगार के मामले में जाग जाये। इस सबके बावजूद सरकार रोजगार उपलब्ध करवाने के मामले में युवा विरोधी, बेरोजगार विरोधी कदम उठाने पर ही लगी हुयी है। यह मांग करता है कि हम छात्र-युवा रोजगार के और अधिक मजबूती से एकजुट हो अपने संघर्ष को आगे बढ़ायें।

12 March 2022

शिक्षण संस्थानों में लैटरल इंट्री का आरंभ।

ये कदम लाखों छात्रों का भविष्य खत्म करने वाला है ।


        यूजीसी द्वारा हाल ही में एक प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस प्रस्ताव द्वारा UPSC की तरह ही उच्च शिक्षण संस्थानों में किए जाने वाले शिक्षण कार्यों में भी लैटरल इंट्री को लागू किया जाएगा।

24 February 2022

वंचितों के हकों पर डकैती नहीं चलेगी।

ज्ञान पर पाबंदी नहीं चली है, नहीं चलेगी।


        केन्द्र की भाजपा सरकार ने सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा एक संशोधित गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलान के तहत नेशनल ओवरसीज स्कालरशिप (NOS) के तहत मिलने वाली स्कालरशिप अब ‘भारतीय संस्कृति’, ‘विरासत’, ‘इतिहास’ और ‘सामाजिक अध्ययन’ जैसे विषयों पर विदेशी विश्व विद्यालयों में शोध करने के लिए नहीं दी जायेगी। अभी तक इसमें छात्र अपनी इच्छानुसार किसी भी विषय पर शोध कर सकता था।

23 February 2022

हिजाब के बहाने साम्प्रदायिक धुर्वीकरण करते, संघ-भाजपा


        कर्नाटक से उपजा हिजाब विवाद अब पूरे देश में चर्चा में है। कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने के बाद पहले वहां एक स्कूल की मुस्लिम छात्राओं ने इसका विरोध किया। मुस्लिम छात्राओं के विरोध के बाद हिन्दू छात्र-छात्राएं भी भगवा शाल व पगड़ी पहनकर स्कूल आने लगे। जिससे आमने-सामने टकराहटें होने लगीं और मसला पूरे कर्नाटक में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का जरिया बन गया। आज कर्नाटक सहित देश में हिजाब के समर्थन और विरोध में ध्रुवीकरण तेजी पर है और लगातार प्रदर्शन जारी हैं।

25 January 2022

सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन हेतु संघर्ष के लिये आगे आयें!

भगत सिंह ने यह बात अंग्रेजों की संसद के बारे में कही थी लेकिन यह आज भी 100 फीसदी सच है।भगत सिंह ने कहा था-
**....... बहुत कुछ सोचने के बाद भी एक ऐसी संस्था के अस्तित्व का औचित्य हमारी समझ में नहीं आ सका जो, बावजूद उस तमाम शानो-शौकत के, जिसका आधार भारत के करोड़ों मेहनतकशों की गाढ़ी कमाई है, केवल मात्र दिल को बहलाने वाली, थोथी, दिखावटी और शरारतों से भरी हुई एक संस्था है। हम सार्वजनिक नेताओं की मनोवृत्ति को समझ पाने में भी असमर्थ हैं। हमारी समझ में नहीं आता कि हमारे नेतागण भारत की असहाय परतंत्रता की खिल्ली उड़ाने वाले इतने स्पष्ट एवं पूर्वनियोजित प्रदर्शनों पर सार्वजनिक सम्पत्ति एवं समय बर्बाद करने में सहायक क्यों बनते हैं।**

18 January 2022

परिवर्तनकामी छात्र संगठन का दो दिवसीय केंद्रीय सम्मेलन सफलता पूर्वक संपन्न!



पछास का दो दिवसीय केंद्रीय सम्मेलन 25-26 दिसंबर को बरेली में सम्पन्न हो गया। इस सम्मेलन में संगठन ने दो दिनों तक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय परिस्थितियों और शिक्षा जगत में आए बदलावों पर गहन चर्चा करते हुए राजनीतिक रिपोर्ट को पास किया। साथ ही इन बदलावों की रोशनी में संगठन के लिए नई कार्य दिशा को भी सूत्रित किया।

17 May 2021

ये मौतें नहीं नरसंहार है!

     इस समय हमारा देश और हम एक ऐसा दर्द सह रहे हैं जिससे बचा जा सकता था। इस समय हमारा देश एक ऐसा देश बना दिया गया है जहां अपने प्रिय परिजनों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए रोते-गिड़गिड़ाते लोगों और ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण तड़प-तड़प कर मर जाने वाले लोगों का मंजर, आम मंजर बन गया है। इस वक्त हमारा देश ऐसा देश बना दिया गया है जहां पर लोग अपने प्रियजनों की लाशों को अपने ही कंधों पर ढोने को मजबूर कर दिये गये हैं। हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि मृृतकों के लिए शमशान, लकड़ी और कब्रें भी कम पड़ गयी हों और सैकड़ों की संख्या में लाशें नदी में तैर रही हैं। इन तैरती लाशों को कुत्ते नोंच रहे हैं। कई परिवार तो ऐसे हैं जहां एक की मौत का मातम भी पूरा नहीं हुआ था कि दूसरी, तीसरी,.... मौतें हो गयीं। लोग अपने एक प्रिय की मौत पर सही से रो भी नहीं पाए थे कि अन्य प्रियजनों को बीमारी ने आ घेरा। कई परिवार तो ऐसे हो गये हैं जहां सिर्फ दुधमुहें बच्चे ही बचे हैं, जिनके सिर पर अब किसी का भी आसरा नहीं बचा।

23 February 2021

एक अविस्मणीय व्यक्तित्व



क्रांतिकारी अजीत सिंह

इस समय जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन फैलता जा रहा है। सम्पूर्ण देश में एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग के हितों के लिए लाए गए कृषि कानूनों का विरोध जारी है तब बरबस ही सरदार अजीत सिंह का जिक्र भी सामने आ जाता है। सरदार अजीत सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह के चाचा थे। सन् 1906 में ब्रिटिश उपनिवेशवादी शासन द्वारा लाए गए किसान विरोधी तीन काले कानूनों के खिलाफ उन्होंने सन् 1907 में किसानों के आन्दोलन की अगुवाई की थी। ये काले कानून थे- दोआब बारी एक्ट, पंजाब लैंड काॅलोनाइजेशन एक्ट और पंजाब लैंड एलियनेशन एक्ट।

25 November 2020

26 नवंबर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में ....

छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !

 


26 नवंबर को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व विभिन्न मजदूर संगठनों द्वारा देशव्यापी आम हड़ताल करना तय किया गया है। इस हड़ताल के साथ ही किसान संगठनों ने भी देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन मजदूरों की आम हड़ताल व किसानों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करता है। साथ ही, छात्रों का आह्वान करता है कि देश के मजदूरों-किसानों के संघर्ष से जोड़ते हुए छात्रों व शिक्षा पर हो रहे हमलों के विरोध में एकजुट आवाज उठाएं।

14 September 2020

मैं अपनी जिंदगी से परेशान हो गया हूँ ...


ये 32 वर्षीय राजीव सुसाइड नोट के अंतिम शब्द हैं। जिसने इलाहाबाद में बेरोजगारी के चक्र में फँसकर आत्महत्या का रास्ता चुना। राजीव ने पीसीएस इंटरव्यू में असफल होने के बाद ये कदम उठाया। इसके जैसे हज़ारों बेबस मज़दूर, किसान, छात्र तथा नौजवान रोज ऐसे ही मौत को गले लगा ले रहे हैं।

योगी सरकार का नया फैसला देश के युवाओं के साथ धोखा है!


भारत आज बेरोजगारी के चरम दौर से गुजर रहा है। देश का युवा रोजगार को तरस रहा है। वो हताश, निराश, बेबस है। रोज हताश बेरोजगारों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हों। ऐसे में उन्हें रोजगार देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के बजाए यूपी की योगी सरकार एक युवा विरोधी फैसला लागू करने जा रही है। प्रदेश की सरकार एक नया बिल कैबिनेट के समक्ष पेश करने जा रही है। इस बिल के अनुसार समूह ख और ग के तहत भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों को 5 साल के लिए संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के तौर पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित रखा जायेगा।

4 September 2020

नौजवानों-किसानों को मौत बांटती पूंजीवादी व्यवस्था

एन आर सी बी के आंकड़े


नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन सी आर बी) देश में हत्या दुर्घटना, आत्महत्या, सहित अपराध के आंकड़े जारी करने वाली सरकारी संस्था है। 2 सितंबर 2020 को इसने वर्ष 2019 में दुर्घटना और आत्महत्या के आंकड़े पेश किए। जिसमें बताया गया कि 2018 में 1,34,516 आत्महत्या की घटनाएं हुई और 2019 में 3.4% की बढ़ोतरी के साथ यहां आंकड़ा 1,39,123 हो गया। विकास के दावों और "सब चंगा सी" के बीच आत्महत्या के मामले अपनी कहानी आप ही बयां करते हैं।

22 August 2020

बेरोजगारों के लिए नया झुनझुना भर है NRA और CET

        2020 के बजट में सरकार ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी (NRA) के गठन के बारे में बताया था। जिसको 19 अगस्त 2020 को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। NRA विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CRT) करवाएगा। मंत्रिमंडल से मंजूरी के बाद प्रधानमंत्री से लेकर विभिन्न मंत्रियों ने दावा किया है कि इससे रोजगार मिलने में मदद मिलेगी।

                                     

13 August 2020

गोवा में भाजपा सरकार ने IIT को आवंटित जगह का एक हिस्सा मंदिर को सौंपा


गोवा में IIT स्थापित करने की योजना के तहत 10 लाख वर्ग मीटर जमीन दिये जाने की जुलाई में सरकार द्वारा घोषणा की गयी थी। गोवा के गुलेली गांव में यह जमीन आवंटित भी कर दी गई। स्थानीय लोगों ने जमीन दिये जाने का विरोध किया। जिस पर केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद सरकार का कहना है कि स्थानीय लोगों के विरोध के कारण 45,000 वर्ग मीटर जमीन  धार्मिक कार्यों के लिए दे दी जायेगी। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा- 'हमने 45,000 वर्ग मीटर जमीन मंदिर के लिये चिन्हित की है। उनका ध्यान भटकेगा और अंतिम योजना से दूर रहेंगे...... यह गांव वालों के फायदे और विरोध को शांत करने के लिए किया गया। यह गांव वालों के भले में है।'

आज आधुनिक समाज में कोई साधारण सा व्यक्ति भी मंदिर और IIT में से IIT को ही अधिक महत्व देगा। पर सरकार क्या कहती है- 'मंदिर लोगों के हित में है।' साफ है कि आज संघी फासीवादी सरकार के लिए शिक्षा के बजाय मंदिर बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। जमीनों को उद्योगपतियों और औद्योगिक क्षेत्र के लिए तो सरकार जबरन आवंटित कर देती है। गांव के गांव उजाड़ दिये जाते हैं पर IIT के लिए जमीन का विरोध होने पर जमीन मंदिर को आवंटित कर दी गयी। जुलाई में कई गयी घोषणा अगस्त में वापस ले ली जाती है। शिक्षा से समझौता किया जाएगा पर मंदिर से नहीं। अगर कुछ लोग किसी वजह से विरोध कर भी रहे थे तो क्या उन्हें इस बारे में शिक्षित कर, उनके बीच आईआईटी की जरूरत का प्रचार कर उनको मनाया नहीं जा सकता था बिलकुल मनाया जा सकता था परन्तु भाजपा सरकार जिसका पूरा जीवन तन्त्र मंदिर की राजनीति से चलता हो उससे इस तरह के कदम उठाए जाने की उम्मीद करना बेईमानी ही है।

और ये सब कोरोना काल में हो रहा है जिसने पूरे समाज में मजबूती से यह साबित किया है कि सामान्य समय के अलावा इस संकट के समय भी शिक्षा, उच्च शिक्षा, शोध, आदि ही अधिक जरूरी हैं।

संघी फासीवादियों का यही नजरिया है कि ज्ञान-विज्ञान के विकास के बजाय अज्ञान-अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जाए। इस कूपमंडूकता में ही ये पूरे देश और समाज को धकेलना चाहते हैं। निश्चित ही छात्रों-नौजवानों को इसका जवाब ज्ञान-विज्ञान, प्रगति और क्रांति के विचारों से देना होगा। यही आज समय की मांग है।

क्रांतिकारी अभिवादन सहित
परिवर्तनकामी छात्र संगठन
(पछास)