24 March 2015

भगत सिंह की बात सुनो ! समाजवाद की राह चुनो !!

 .“.......निकट भविष्य में यह युद्ध अन्तिम रूप से लड़ा जाएगा और तब यह निर्णायक युद्ध होगा। साम्राज्यवाद एवं पूंजीवाद कुछ समय के मेहमान हैं। यही वह युद्ध है जिसमें हमने प्रत्यक्ष रूप में भाग लिया है। हम इसके लिए अपने पर गर्व करते हैं कि इस युद्ध को न तो हमने प्रारम्भ ही किया है न यह हमारे जीवन के साथ समाप्त ही होगा....”
                  (फांसी से 3 दिन पूर्व पंजाब के गवर्नर को लिखे पत्र का अंश)

भगत सिंह द्वारा फांसी से कुछ दिन पूर्व कहे गए ये शब्द मौजूदा दौर में और भी प्रसांगिक हैं। आज हमारी सरकारें शहीदों की शहादत का मजाक उड़ाते हुए साम्राज्यवादी हुक्मरानों के साथ मिलकर मेहनतकश जनता पर हमला बोले हुए हैं। FDI व अन्य तरीकों से देशी पूंजीपति, साम्राज्यवादियों के साथ मिलकर मजदूरों-किसानों की आखिरी बूंद को भी सिक्कों में बदलकर अपनी तिजोरियां भरना चाहता है। पहले से ही तबाह बर्बाद जनता को ‘मेक इन इंडिया’ के नए नारे के साथ और लूटने की तैयारी की जा रही है। जिसका साफ सा मतलब है कि देश के प्राकृतिक संसाधनों को साम्राज्यवादियों के सामने न्यौछावर कर देना। पूंजीपतियों के पक्ष में श्रम कानूनों में बदलाव, भूमि अधिग्रहण कानून लागू कर मोदी सरकार इस बात के पर्याप्त सबूत दे चुकी है कि वो इस काम में थोड़ी सी भी देरी नहीं करना चाहती है।
    मंहगाई, बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी से तड़पती जनता कहीं सरकार के खिलाफ विद्रोह का बिगुल न फूंक दे, इससे खौफजदा मोदी सरकार अंग्रेजों की ही ‘फूट डालो और राज करो’ नीति पर चलते हुए देश में साम्प्रदायिकता का जहर घोल रही है। जिससे मेहनतकश जनता को हिन्दू-मुस्लिम में बांटकर उनकी एकता को विखण्डित किया जा सके।
    आज नौजवानों की एक बड़ी तादात नशे, अवसाद, कुंठाओं और झूठी पहचानों में जी रही है- क्यों? क्योंकि उनके पास कोई आदर्श नहीं है इसलिए वह पूंजीवादी व्यवस्था की सडांध में धंसते जा रहे हैं। पूंजीवाद द्वारा खड़े किये गये घृणित, बौने, व्यक्ति केन्द्रित आदर्शों पर नौजवान खड़े हो रहे हैं। इस सबके परिणामस्वरूप उनका जीवन व्यक्ति केन्द्रित, कुंठाओं से भर जा रहा है। यह सब कुछ भगतसिंह के विपरीत है। भगतसिंह न तो व्यक्ति केन्द्रित सोचते थे, न उनका लक्ष्य छिछला व छोटा था। वे एक महान लक्ष्य के लिए समर्पित थे। भगतसिंह का क्रांतिकारी जीवन हमें भी महान लक्ष्य के लिए अपना पूरा जीवन लगा देने की प्रेरणा देता है। अपने जीवन के अंतिम पल तक भी भगतसिंह क्रांतिकारी उत्साह व आदर्श से भरे थे। ऐसे ही क्रांतिकारी उत्साह व आदर्श से हम नौजवान आज के हालात का मुकाबला कर सकते हैं।आइए भगत सिंह और उनके साथियों द्वारा देखे गए समाजवादी समाज के निर्माण के सपने को पूरा करने के लिए एकजुट हुआ जाए। यही इन महान क्रांतिकारियों को सच्ची श्रृद्धांजली होगी। 

No comments:

Post a Comment