1 April 2015

गुण्डों की गिरफतारी की मांग को लेकर रामनगर बाजार रहा बंद

दिनांक 31 मार्च को उत्तराखण्ड के रामनगर कस्बे की जनता का गुस्सा फूट पड़ा। इस गुस्से की वजह यहां सालों से मजदूर-मेहनतकश के हितों की आवाज उठाने वाले ‘नागरिक’ समाचार पत्र के सम्पादक मुनीष कुमार व उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी पर खनन माफियाओं द्वारा हमला करना था। यह हमला शासन-प्रशासन की शह पर किया गया था। इसलिए लोगों का गुस्सा शासन-प्रशासन के खिलाफ इतना ज्यादा कि उन्होंने मुनीष कुमार व प्रभात ध्यानी से मिलने आये एस.डी.एम. को बाहर से ही खदेड़ किया। अगले दिन 1 अप्रैल को रामनगर में मौजूद इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, आरडीएफ, उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी, देव भूमि व्यापार मण्डल व अन्य तमाम जनसंगठनों ने बाजार बंद का आहवान किया। 1 अप्रैल को रामनगर में बाजार बंद रहा। एक विशाल जुलूस निकाला गया और खनन माफिया और प्रशासन के गठजोड़ के खिलाफ नारे लगाये गये।
    31 मार्च को मुनीष कुमार व प्रभात ध्यानी वीरपुर लच्छी गांव से लौट रहे थे। रास्ते में थारी के गांव के समीप सोहन सिंह ढिल्लन के इशारे पर काम करने वाले खनन माफियाओं ने इनको रोका और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। प्रभात ध्यान को सिर में गम्भीर चोटें लगीं। खनन माफिया पिछले कई दिनों से इनको धमकी दे रहा था कि ये दोनों लोग वीरपुर लच्छी गांव में न आयें। क्योंकि इनके आने की वजह से खनन माफिया वहां अपनी गुण्डागर्दी नहीं चला पा रहे थे।
    वीरपुर लच्छी गांव में हुए घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में 1 मई 2013 को घटी घटना है। 1 मई 2013 को ढिल्लन स्टोन क्रेशर के मालिक सोहन सिंह ढिल्लन व उसके दोनों बेटों ने अपने गुण्डों के साथ ग्रामीणों पर हमला किया। वहां महिलाओं के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गयी। उनकी झोंपड़ियों में आग लगा दी गयी। लोगों को निशाना बनाते हुए फायरिंग की गयीं। महिलाओं के वक्षों पर बंदूक की बटों को रखकर आसमानी फायर किये गये। महिलाओं को रायफलों की बटों से बुरी तरह पीटा गया। ग्रामीणों का कसूर इतना था कि ग्रामीणों ने सोहन सिंह के साथ हुए समझौते के मुताबिक सड़क पर पानी डालने के लिए कहा था। ताकि रास्ते की धूल उनके घरों में न घुसे।
    अभी हाल में 24 मार्च 2015 को वीरपुर लच्छी गांव में एक 17 वर्षीय बालिका आशा की ट्रैक्टर ट्राली से उछलकर लगे पत्थर से घायल होने व 25 मार्च को उसकी अस्पताल में मौत हो जाने से ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। डमपरों से आये दिन वहां दुर्घटनायें होती रहती हैं। और सोहन सिंह के स्टोन क्रेशर तक जाने वाला रास्ता सोहन सिंह ने जबर्दस्ती बुक्सा जनजाति के लोगों के खेत व सरकारी गूल को पाटकर बनाया है। यह रास्ता राजस्व के किसी नक्शे में भी नहीं है। लेकिन सोहन सिंह गुण्डागर्दी चलाकर इस रास्ते को अपने डमपरों के लिए इस्तेमाल करता रहा है।
    जब बालिका की मौत हुई तो ग्रामीणों ने आशा का शवदाह करने से मना कर दिया और प्रशासन से पहले रास्ते के बारे में हल निकालने को कहा। एस.डी.एम. रामनगर, सीओ, कोतवाल व तहसीलदार की मौजूदगी में यह लिखकर दिया गया कि 10 दिनों के अंदर पैमाइश कर ग्रामीणों के खेतों पर निशान लगा दिये जायेंगे तथा यह रास्ता कृषि व हल्के वाहनों के लिए है। जब दो दिन बाद तहसीलदार वहां पैमाइश करने पहुंचा तो वहां खनन व्यवसायी भारी मात्रा में मौजूद थे। उन्होंने तहसीलदार पर दबाव बनाया और तहसीलदार ने गलत पैमाइश करनी शुरू कर दी जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया। अगले दिन पैमाइश रोक दी गयी। लेकिन 31 मार्च को एस.डी.एम. रामनगर ने सी ओ व कोतवाल तथा भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ग्रामीणों के खेतों में मलबा डालकर उन पर डमपर चलाने की कोशिश की और अपने दिये गये लिखित समझौते का उल्लंघन किया। इसी घटनाक्रम की कडी में मुनीष कुमार व प्रभात ध्यानी वीरपुर लच्छी गांव गये थे। और वे 1 मई 2013 से ही लगातार वीरपुर लच्छी के ग्रामीणों की सहायता कर रहे थे। इसी बात से खनन माफिया नाराज थे और उनकेा लगातार धमकी भी दे रहे थे। और 31 मार्च को उन पर यह बर्बरता पूर्वक हमला किया।
    इस हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि गरीब लोगों को मौजूदा शासन व्यवस्था कुचलने का काम कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों की लूट करने वाले गुण्डों-माफियाओें का पूरा तंत्र विकसित हो चुका है और शासन-प्रशासन उसके इशारे पर नाच रहा है। यह पूरे देश के स्तर पर हो रहा है। कहीं ये काम छोटे-मोटे गुण्डे कर रहे हैं तो कहीं सीआरपीएफ व सेना लगाकर हो रहा है। मुनीष कुमार व प्रभात ध्यानी पर हुए हमले के विरोध में उत्तराखण्ड के अलग-अलग हिस्से से विरोध के स्वर उठे हैं।

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