निर्भया हत्याकाण्ड के तीन वर्ष बाद एक बार फिर सख्त कानून की बहस जोरों पर है। राज्यसभा ने कानून बनाकर जघन्य अपराधों के दोषियों के लिए उम्र 18 से घटाकर 16 कर दी है। लोकसभा इसे पहले ही पास कर चुकी है।
गौरतलब है 16 दिसम्बर 2012 को दिल्ली में मेडिकल की छात्रा के साथ 6 लोगों द्वारा गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गयी। जिसके बाद पूरे देश में ही इस जघन्य अपराध के खिलाफ तीखे विरोध प्रदर्शन हुए। समाज में लगातार बढ़ रही महिलाओं के प्रति हिंसा से आक्रोशित लोग सड़कों पर उतर आये थे। पूरे आंदोलन को कड़े कानून बनाने की मांग पर केन्द्रित कर दिया गया। निश्चित ही इसमें पूंजीवादी मीडिया, बुद्धिजीवियों व राजनीतिज्ञों की भूमिका रही। तीन वर्ष बाद एक बार फिर यही बहस जोरों पर है। लोकसभा, राज्यसभा ने सख्त कानून बनाकर इतिश्री कर ली है।
इन सबके बीच महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मुख्य जिम्मेदार पूंजीवादी समाज को पाक-साफ करार दे दिया गया। सारा दोष व्यक्तियों पर डाल दिया गया है। उन्हें ही अपराधों के लिए पूर्णतः जिम्मेदार मान लिया गया है। किस सामाजिक परिवेश में इस तरह के अपराधी पैदा हो रहे हैं? इस सवाल को गायब कर दिया गया है। पूंजीवादी समाज नित नये अपराधियों को पैदा कर रहा है, इस बात को छिपा दिया गया है।
पूंजीवादी समाज जो अपने भीतर सामंती आचार-विचारों, पुरुष प्रधान मानसिकता को पाले हुए है। पूंजीवादी समाज जो रोज ही अपनी अश्लील संस्कृति से महिलाओं को अपमानित करता है। यह वह जमीन है, जो महिलाओं के खिलाफ अपराधों को पैदा करती है। और आये दिन महिलाओं के खिलाफ जघन्य से जघन्य अपराध होते हैं, किन्तु पूंजीवादी व्यवस्था पाक-साफ बच निकलती है। इसे पाक-साफ बचाने के लिए इसके बुद्धिजीवी, राजनीतिज्ञ, मीडिया आदि रात-दिन जुटे रहते हैं।
व्यक्ति को अपराध के लिए पूर्णतः जिम्मेदार बताकर उसे कड़ी से कड़ी सजा की व्यवस्था कर पूंजीवादी व्यवस्था अपना पल्ला झाड़ लेती है। चूंकि पूंजीवाद में अपराध की जमीन मौजूद रहती है। यह दिन-प्रतिदिन अधिक उपजाऊ होती रहती है। इसलिए रोज ही अपराधी व्यक्ति को कड़ी सजाएं देने के बावजूद अपराध फैलता ही जाता है। पूंजीवादी व्यवस्था समाधान के लिए कड़े से कड़ा कानून फिर और कड़ा कानून बनाती जाती है। कुल मिलाकर यह व्यवस्था के समाधान का तकनीकी हल ही पेश करता है। उसे जड़ से खत्म करने की तरफ नहीं बढ़ता, ना ही बढ़ सकता है।
पूंजीवादी व्यवस्था के खात्मे के लिए समाज के सभी उत्पीड़ित लोगों को आगे आना होगा। इसके खिलाफ समाजवादी क्रांति का बिगुल फूंकना होगा।

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