5 January 2017

नोटबंदी के 50 दिन: दावे सारे फेल

        30 दिसम्बर को नोटबंदी को 50 दिन पूरे हो गये। यह 50 दिन देश में अफरा-तफरी भरे रहे। मोदी ने अपने तुगलकी फरमान से देश की जनता को हैरान-परेशान कर दिया। शुरूआती दिन तो ‘अच्छे दिन’ की उम्मीद में कट गये कुछ और दिन जनता ने मन को दिलासा देकर काट लिए। किन्तु निर्लज्ज मोदी सरकार अपनी लफ्फाजियों को जारी रखे रही। उसे घंटो लाइन में खड़े बुर्जुग, महिला, अपना काम छोड़ लाइन में लगे व्यक्तियों का कष्ट नही दिखाई दे रहा था। कई लोगों ने तो लाइन में ही दम तोड़ दिया तब भी निर्लज्ज सरकार मिठाई बंटवाकर बधाई दे रही थी।

        नोटबंदी के समय तुगलक मोदी ने कई दावे किए। उन्होने कहा नोटबंदी से कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद खत्म हो जाएगा। इन सब दावों का क्या हुआ? क्या हासिल हुआ? अंर्तराष्ट्रीय संस्था ब्लूमवर्ग की रिपोर्ट कहती है कि 500 व 1000 बंद किए गये नोटों का 97 प्रतिशत बैंको में वापस आ गया है। तब क्या महज 3 प्रतिशत की चूहिया को पकड़ने के लिए इतनी बड़ी कवायद की गयी। जनता को अपने ही पैसे लेने के लिए लाइन में लगवाया गया।

        इसी प्रकार भ्रष्टाचार, आतंकवाद के खात्मे के दावे भी सिरे से झूठे साबित हुए। नोटबंदी से जुड़े सभी दावे झूठे और फरमान तुगलकी था यह सरकार ने खुद ही साबित कर दिया है। नोटबंदी के बाद ना तो मादी और ना ही अरूण जेटली ने देश को यह बताया कि कितना कालाधन समाप्त हो गया? भ्रष्टाचार कितना और कैसे समाप्त हुआ? बढ़ते आतंकवाद का क्या हुआ? नोटबंदी के बाद जेटली ने कहा कि हमें फलां-फंला टैक्स में वृद्धि हुई। निर्लज्ज मोदी ने बड़ी निर्लज्जता से जनता को अंगूठा दिखाकर कैशलेस का नया सिगूफा फेंक दिया।

        नोटबंदी से भले ही मोदी और उसे प्रधानमंत्री बनाने वाले अंबानी-अडानी जैसे एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग और आरएसएस खुश हुआ हो किन्तु आम जनता पर तो यह दिन आफत की तरह टूटे। मजदूरों का काम छूट जाने से वे बेकार बैठ गये। खाने-पीने के ही बांदे पड़ गये। किसान की फसल खराब हो गयी। व्यापार, निर्यात, उत्पादन, पैदावार सभी जगह भारी गिरावट आ गयी।

        खुद शासक वर्गो के हलकों से नोटबंदी के औचित्य पर सवाल खड़े हो गये। एसोचैम से लेकर राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व गर्वनर आदि नोटबंदी के फैसले की आलोचना कर रहे हैं और अब मोदी सरकार को जवाब देते नही बन रहा है। वे इस सब से चुनावी फायदा लेना चाहते थे पर अब दाव उल्टा पड़ चुका है।

        पहले से ही संकट में घिरी भारतीय अर्थव्यवस्था को इस नोटबंदी ने और अधिक गंभीर स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। मैनुफेक्चरिंग सैक्टर, सेवा क्षेत्र, विदेशी व्यापार सभी जगह भारी गिरावट आयी है। मैनुफेक्चरिंग क्षेत्र में तो 2008 के संकट के बाद की सबसे तेज गिरावट आयी है। मैनुफेक्चरिंग एक बड़ा क्षेत्र बनता है जिसमें भारी पैमाने पर लोग काम करते हैं। इसमें आयी गिरावट बेरोजगारी को और अधिक बढ़ा देगी। अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र 54.5 फीसदी है जोकि 40.7 फीसदी रह गया। इसके साथ-साथ निर्यात में कमी आयी है और विदेशी व्यापार घाटा भी बढ़ गया है।

        नोटबंदी का असर सिर्फ 50 दिन की बात नही है। हो सकता है अब शहरों में एटीएम में लम्बी लाइन नही दिख रही हो। परंतु अर्थव्यवस्था पर इसका असर लम्बे समय तक रहने वाला है। उसी अनुरूप मजदूर-मेहनतकशों पर भी इसका असर लम्बे समय तक रहने वाला है।

No comments:

Post a Comment