11 अप्रैल को पंजाब यूनीवर्सिटी में फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन कर रहे हजारों छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया गया। 58 छात्रों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है तो कई अन्य छात्र नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस लगातार पूरे इलाके में दबिश दे रही है। पुलिसीया दमन की आलम ये था कि बिना किसी सबूत के 66 छात्रों पर राजद्रोह का मुकदमा ठोंक दिया गया। पूरे देश में इस मामले पर थू-थू होने के बाद ही चण्डीगढ़ पुलिस ने छात्रों पर से राजद्रोह का मुकदमा हटाया। परंतु दमन और खौफ का माहौल कैम्पस में बना हुआ है। गिरफ्तार छात्रों पर आईपीसी की धारा 147, 148, 308, 186, 353, 322 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
पंजाब यूनीवर्सिटी पिछले एक साल से भारी आर्थिक परेशानियों से जूझ रही है। ये यूनिवर्सिटी केन्द्र और राज्य दोनो के अंर्तगत नही आती है परंतु इसे केन्द्र व राज्य सरकार दोनो से ही आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। एक केन्द्रीय विवि ना होने का बहाना बनाकर पिछले साल से यूजीसी ने इसे फण्ड देना बंद कर दिया। जिसके बाद से ही यूनीवर्सिटी की हालत खस्ता है। ऐसे में अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए विवि प्रशासन ने इस सत्र से फीसों में जर्बदस्त वृद्धि कर दी। कई कोर्सो में 5 से लेकर 11 गुना तक फीसें बढ़ाई गई हैं। बीफार्मा की फीस 5080 से 50000, एम.ए. जर्नलिज्म की फीस 5290 से 30000, डेंटल कोर्स की फीस 86400 से 1.5 लाख कर दी गयी है।
फीस वृद्धि के बाद से ही छात्र फीसों को कम करने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे थे। इसी कड़ी में सभी छात्र संगठनों द्वारा पीयू बंद की काॅल दी गयी थी। 11 अप्रैल को हजारों छात्र शांतिपूर्वक तरीके से वीसी के सामने अपनी मांगे रखने के लिए गए परंतु किसी भी प्रशासनिक अफसर ने उनसे मिलना तक मुनासिब नही समझा। इसके कुछ समय बाद ही पुलिस ने छात्रों पर बर्बर तरीके से लाठीचार्ज कर दिया।
पीयू की ये घटना पूरे देश में चल रही शिक्षा व्यवस्था की बुरी स्थिति का ही एक उदाहरण है। केन्द्र सरकार द्वारा शिक्षा के बजट में कटौती का परिणाम हमारे कैम्पसों की खस्ता हालत, सीटों में कटौती, शिक्षकों की कमी आदि के रूप में चुकाना पड़ रहा है। सरकारों के पास अणानी-अंबानी पर लुटाने के लिए अरबों-खराबों रूपये है। मोदी जी ‘मन की बात’ और अपने फैसनेबुल कपड़ों पर अरबों रूपये खर्च कर सकते हैं परंतु इन पैसों को शिक्षा पर नही खर्च किया जाएगा। रोज अरबों रूपयों के हथियारों की डीलिंग होगी पर देश के नौजवानों के हाथ से किताबें छीन ली जाएगी।
भारत में उच्च शिक्षा का एक बड़ा बाजार बनता है। इस बाजार पर देशी-विदेशी पूंजीपति वर्ग नजरे गड़ाए बैठा हुआ है। इसलिए भी एक प्रक्रिया के तहत सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों को बर्बाद किया जा रहा है। जिससे निजी संस्थानों को पनपने और आगे बढ़ने में आसानी हो। शिक्षा के बजट-सीटों में कटौती आदि इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
आज पूरी भारतीय पूंजीवादी व्यवस्था उस दौर से गुजर रही है जहां वो जनता के मिले सीमित अधिकारों को भी छीन लेना चाहती है। शिक्षा, स्वास्थय जैसी चीजों को भी बहुत तेजी के साथ निजी हाथों में सौंपा जा रहा है और इस काम में एक विश्वस्त प्यादे की तरह मौजूदा केन्द्र सरकार अपने मालिक पूंजीपतियों की सेवा में लगी हुयी है। पीयू की मौजूदा घटना भी इसी चीज का उदाहरण है। एक सशक्त क्रांतिकारी छात्र आंदोलन ही इस गति को रोक सकता है। आइए व्यवस्था के दमन का सामना करते हुए भी दृढ़तापूर्वक खड़े रहने वाले पीयू के साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाएं। शिक्षा को लुटेरे शासकों के हाथों से बचाने के संघर्ष में उनके साथ खड़े हों।


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