13 August 2017

मासूमों की हत्यारी व्यवस्था का नाश हो!

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में 34 बच्चों की मौत

        गोरखपुर के बाबा रामदास मेडिकल कालेज (बीआरडी अस्पताल) में 34 बच्चों समेत 63 लोगों की मौत ने एक बार फिर व्यवस्था और सरकार के अमानवीय चरित्र को उजागर कर दिया। 34 मासूम व अन्य की मौत की इस घटना ने एक बार और स्पष्ट कर दिया कि व्यवस्था व सरकार की नजरों में आम गरीब मेहनतकशों की क्या कीमत है?

        ये सारी मौतें तरल आॅक्सीजन की सप्लाई के ठप्प होने के कारण हुयी। अस्पताल प्रशासन और उसके अधिकारियों के तरल आॅक्सीजन के खत्म होने की सूचना पहले से ही थी। आश्चर्य की बात तो ये है कि इस घटना से पूर्व ही सीएम योगी अस्पताल का दौरा करके आए थे। तरल आॅक्सीजन की सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स बकाया भुगतान न करने पर आपूर्ति न करने का पत्र कई बार अस्पताल प्रशासन को भेज चुकी थी। क्योंकि मामला आम जनता के स्वास्थ से जुड़ा था इसलिए अस्पताल प्रशासन से लेकर स्वास्था मंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री या सीएम योगी के कान पर जूं तक नही रेंगी।

        बहुत ही शर्म की बात है कि आॅक्सीजन के अभाव में एक के बाद एक, तड़प-तड़पकर मरने वाले मासूमों के प्रति संवेदना व्यक्त करने और समस्या को हल करने के बजाए अस्पताल प्रशासन व सरकार पूरे मामले को दबाने या लीपापोती करने का निकृष्ट काम करता रहा। अब जब मामला प्रकाश में आ गया है तो सरकार प्राचार्य व एक डाॅक्टर को निलंबित कर खानापूर्ति करने का काम कर रही है।

        दरअसल ये सरकार व अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का मामला नही है बल्कि सामूहिक हत्या है। पूंजीवादी व्यवस्था, पूंजीपति परस्त सरकार, पूंजीवादी नेता, मंत्री व अफसर इस हत्या के लिए जिम्मेदार हैं। गौर करने की बात है की ये उनकी सरकार में हो रहा है जो घायल गायों के लिए एअर एंबुलेंस की व्यवस्था करने की बातें करते हैं और जिनके राज में बीमार मासूमों के लिए आॅक्सीजन भी दूभर हो रही है।

        गोरखपुर में हर वर्ष इंसेकलाइटिस नामक बीमारी से सैकड़ो लोग मारे जाते हैं। उसके बाद भी बिमारियों की रोकथाम व उपचार हेतु उचित व्यवस्था नही की जाती। भारत में स्वास्थ सुुविधाएं बेहद दयनीय स्थिति में हैं। भारत उन देशों में गिना जाता है जहां डाक्टरों की संख्या व स्वास्थ पर सरकार द्वारा खर्च की जाने वाली राशि सबसे कम है।

        कुछ समय पूर्व भी उचित उपचार न मिलने पर मृत व्यक्तियों को उनके परिजनों द्वारा अपने कंधों पर ले जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया में छायी हुई थी। भारत के हर क्षेत्र में पूंजीवादी व्यवस्था की लापरवाही, अमानवीयता व क्रूरता के चलते रोज ऐसी मौतें होती हैं। आम जनता की व्यवस्था द्वारा इन हत्याओं पर सरकारों, नेताओं व मंत्रिओं की दिखावटी संवेदनाएं कोई भी मरहम लगाने में अक्षम हैं।

        मासूमों-मेहनतकशों की व्यवस्था द्वारा इन हत्याओं को पूंजीवादी व्यवस्था के खात्मे से ही रोका जा सकता है। पूंजीवादी व्यवस्था के इस क्रूर अमानवीय चेहरे का पर्दाफाश कर छात्रों-नौजवानों व मेहनतकशों को व्यवस्था को बदलने व समाजवादी व्यवस्था के निर्माण के संघर्ष में उतरना ही होगा। 

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