28 September 2017

भगत सिंह तुम जिंदा हो, हम सबके अरमानों में !

भगत सिंह के जन्म दिवस 28 सितंबर पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन(पछास) द्वारा दिल्ली में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय ‘कालेज-कैम्पसों में बढ़ते फासीवादी हमले और हमारी चुनौतियां’ था। 


        सेमिनार में इस विषय पर सेमिनार पेपर ‘कालेज-कैम्पसों में बढ़ते फासीवादी हमले और हमारी चुनौतियां’ रखते हुए पछास के कैलाश ने कहा कि आज पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था संकट का शिकार है। इस संकट से निकलने के लिए एक हल के बतौर पूंजीपति वर्ग मेहनतकशों के शोषण को और अधिक तीव्र कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ बदहाल जनता कहीं व्यवस्था के खिलाफ न खड़ी हो जाए, ये डर भी उसे सताए हुए है। यही कारण है कि देश-दुनिया का पूंजीपति वर्ग जनता के संघर्षो को तोड़ने के लिए दक्षिणपंथी ताकतों को आगे बढ़ा रहा है। अमेरिका में ट्रम्प और भारत में मोदी का उभार भी इसी परिघटना का परिणाम है। पूरी दुनिया में दक्षिणपंथ के उभार के पीछे पूंजीवादी व्यवस्था का संकट काम कर रहा है। और व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करके ही फासीवाद से लड़ा जा सकता है। 

        गौहर रजा ने फासीवाद की लक्षणों पर बात रखते हुए कहा कि किसी भी देश में फासीवादी ताकतें सबसे पहले हमला उस देश के बुद्धिजीवियों पर बोलती हैं। क्योंकि छात्र भी एक ऐसा ही तबका है जो सोच-समझ सकता है, सवाल उठा सकता है इसलिए भी संघ गिरोह द्वारा उन पर हमला बोला जा रहा है। हम अकेले-अकेले इन हमलों का जवाब नही दे सकते। इनका जवाब इंसाफ पसंद लोगों की व्यापक एकता से ही दिया जा सकता है।

        सेमिनार में बात रखते हुए प्रो. अपूर्वानंद ने कहा कि भगत सिंह व गांधी दोनों ही ढृढ़ता के साथ अपने विचारों पर कायम रहे। उन्होने जो भी किया उसे साहस के साथ स्वीकारा। दूसरी तरफ सावरकर निरंतर अपने किए गए कामों से पल्ला झाड़ते रहे। वो चाहे अंग्रजों से माफी मांगने का मामला हो या गांधी जी की हत्या के मामले में संलिप्तता, हर जगह सावरकर कायर साबित हुए। आज आरएसएस उन्हे ‘वीर’ सावरकर के नाम से प्रचारित करने का काम कर रहा है। 

        जेएनयू कलेक्टीव के साथी पराग ने जेएनयू पर संघ गिरोह द्वारा बोले जा रहे हमले की आलोचना करते हुए जेएनयू आंदोलन पर आलोचनात्मक नजरिए से बात रखी। उन्होने कहा कि देश की मेहनतकश आबादी से आने वाले छात्रों की विशाल आबादी तो आज किसी कालेज-कैम्पस तक पहुंच ही नही पा रही है। देश का बहुलांश युवा आज बेरोजगारी की मार झेलता हुआ जिंदगी जीने के लिए अभिशप्त है। फासीवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में इस हिस्से की महत्तवपूर्ण भूमिका है। आज जरूरत है कि भगत सिंह के विचारों को केन्द्र में रखते हुए इन युवाओं को संगठित किया जाए।

        पछास के अध्यक्ष कमलेश ने कहा कि जहां एक तरफ ये समय आरएसएस द्वारा बोले जा रहे हमलों का है तो वहीं दूसरी तरफ यही समय तमाम संभावनाओं को भी लेकर आया है। देश भर में फासीवादी हमलों के खिलाफ जगह-जगह पर खड़े हो रहे प्रतिरोध इसकी गवाही दे रहे हैं। आज समाज बर्बरता और सभ्यता के दोराहे वर खड़ा है। आज देश के युवाओं और मेहनतकशों के कांधे पर ये महती कार्यभार आन पड़ा है कि वो समाज को सभ्यता की ओर समाजवादी भारत की ओर लेकर चले।

        सेमिनार के अंत में बीएचयू की छात्राओं पर किए गए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए उनके संघर्ष के साथ एकजुटता प्रस्ताव पारित किया गया।

        सेमिनार में हिन्दू कालेज से रितिका, इंकलाबी मजदूर केन्द्र से नगेन्द्र और रोहित, आईडीएसओ से प्रशांत, दयाल सिंह कालेज से एन. सचिन, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की अध्यक्ष शीला शर्मा आदि वक्ताओं ने बात रखी।

        बरेली से आए प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच के साथियों ने सेमिनार में क्रांतिकारी गीतों की प्रस्तुति की।  



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