लाॅकडाउन में पुलिस द्वारा मजदूरों के किए जा रहे दमन को सोशल मीडिया में उठाने पर पुलिस ने दर्ज किया फर्जी मुकदमा !!
उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन शर्म करो !!!
छात्र-मजदूर एकता जिंदाबाद !!!!
अभिलाख सिंह पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर, जिला उधम सिंह नगर (उत्तराखंड) में विगत लगभग 2 दशकों से एक मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। 1 अप्रैल की सुबह पंतनगर पुलिस द्वारा उन पर राजद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
साथी अभिलाख विश्वविद्यालय के भीतर लगातार ठेका मजदूरों की आवाज को उठाते रहे हैं। विश्वविद्यालय में ठेका मजदूरों को सभी श्रम कानूनों से अलग रखा जाता है। ऐसे में अभिलाख निरंतर ही मजदूरों की आवाज को ‘ठेका मजदूर कल्याण समिति’ के माध्यम से उठाते रहे हैं। साथी अभिलाख इस समिति के सचिव हैं। साथ ही वो इंकलाबी मजदूर केन्द्र के सक्रीय कार्यकर्ता हैं। अपने जुझारू संघर्षो के दम पर ठेका मजदूर कल्याण समिति ने विश्वविद्यालय प्रशासन से लड़कर मजदूरों के लिए कई अधिकार हासिल किए हैं। जिसके चलते ठेका मजदूर कल्याण समिति और साथी अभिलाख हमेशा ही प्रशासन के निशाने पर रहे हैं। कुछ समय पहले ही एक आंदोलन के दौरान समिति के एक कार्यकर्ता मनोज को भी विवि. प्रशासन ने काम से निकाल दिया था। जिसके खिलाफ सैकड़ों मजदूरों ने काम बंद कर अपने साथी को पुनः काम पर वापस रखवाया था।
साथी अभिलाख लंबे समय से पंतनगर के ठेका मजदूरों के विभिन्न अधिकारों खासकर ईएसआई, पीएफ की सुविधा व स्थाई नियुक्ति के लिए संघर्षरत रहे हैं। इस वक्त उच्च न्यायालय उत्तराखंड, नैनीताल ने पंतनगर विश्वविद्यालय के ठेका कर्मियों को ईएसआई सुविधा दिये जाने के संबंध में आदेश दिया हुआ है। यह आदेश अभी तक लागू नहीं हुआ है। क्योंकि साथी अभिलाख उच्च न्यायालय में इस मामले को लेकर पैरवी कर रहे हैं इसलिए वह विश्वविद्यालय से लेकर प्रशासन की निगाहों में चढ़े हुए थे। इसलिए भी पूरा शासन-प्रशासन समिति और साथी अभिलाख के खिलाफ दमन की योजना बना रहा था।
हालिया मामला लाॅकडाउन से जुड़ा हुआ है। मोदी सरकार द्वारा बिना योजना के लागू किए गए लाॅकडाउन की सबसे बड़ी मार मजदूरों पर ही पड़ी। एक तरफ जहां सरकार विदेशी अमीरों को प्लेन से लेकर आ रही थी वहीं दूसरी तरफ कामबंदी के चलते बर्बाद हुए मजदूर जब पैदल बाहर निकल रहे थे तब उन पर पुलिस द्वारा लाठियां भांजी जा रही थी। पूरे देश में पुलिस के इस व्यवहार के खिलाफ आक्रोश था। इसी दमन का विरोध करते हुए साथी अभिलाख द्वारा एक पोस्ट WhatsApp ग्रुप में लिखी गयी। जिसको आपत्तीजनक बताते हुए पंतनगर पुलिस द्वारा उन पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस प्रशासन का ये रूख यूंही नही है। यही पुलिस और पूरी सत्ता लाखों की संख्या में हजारों किलोमीटर चलने वाले मजदूरों को ही कसूरवार ठहरा उन्हे दंडित कर रहे थे। परंतु प्लेन और कारों में घूमने वाले अमीरों के प्रति उनका रवैया दूसरा था। सत्ता के इसी चरित्र को साथी अभिलाख के मामले में भी देखा जा सकता है।
आजाद भारत के इतिहास में सभी सरकारों ने इस ब्रिटिश कानून का इस्तेमाल जनता की आवाज को दबाने में किया है। केन्द्र में काबिज मोदी सरकार आने के बाद तो हर सरकार विरोधी आवाज को इस कानून से चुप कराने की कोशिश की जा रही है। परंतु कोई भी कानून जनता की न्यायपूर्ण आवाज को नहीं दबा सकता। देश के करोड़ो मजदूरों की आवाज को चुप नहीं कराया जा सकता। साथी अभिलाख की आवाज देश के करोड़ों मजदूरों की आवाज है। और सत्ता इसे चुप कराने की कोशिश कर रही है। ऐसे में सभी इंसाफ पसंद छात्रों-नौजवानों, मेहनतकशों से ये अपील है कि इस फर्जी मुकदमें का पुरजोर विरोध करें। मेहनतकशों के साथ अपनी एकता स्थापित करें।
क्रांतिकारी अभिवादन सहित
परिवर्तनकामी छात्र संगठन
(पछास)


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