26 June 2020

लचर सरकारी स्वास्थ्य तन्त्र, आलीशान निजी अस्पताल और कोरोना के खिलाफ जंग

कोरोना महामारी की शुरुआत दुनिया भर में दिसंबर के समय चीन से हो चुकी थी। उस समय भारत सरकार का रुख उदासीनता भरा था। यहां तक की 30 जनवरी को भारत में कोरोना का पहला मरीज मिलने के बावजूद सरकार के रुख में कोई गंभीरता नहीं आई। पहला लॉकडाउन लगाए जाने तक सरकार ने फरवरी-मार्च के माह तक भी कोई विशेष तैयारी नहीं की थी। इस दौरान चर्चाएं चीन को महामारी से होने वाले नुकसान का फायदा भारतीय उद्योग व अर्थव्यवस्था को मिलने के कयास लगाए जा रहे थे, ट्रंप के स्वागत में भीड़भाड़ भरे भव्य कार्यक्रम, मध्यप्रदेश में सरकार बनाने बिगाड़ने का खेल, विदेश से आने वाले लोगों पर भी कोई रोक या समुचित जांच न करना, आदि सरकार की मुख्य हरकतें थी। इस बीच कोरोना के बारे में खतरनाक तरीके से अंधविश्वासों और कूपमंडूकता भरी बातों ने जगह पाई। गाय के गोबर, गोमूत्र, हल्दी, लहसुन, अदरक, गिलोय, आदि से कोरोना के इलाज के दावे किए जाने लगे। मांसाहार को कोरोना का कारण गिनाया जाने लगा। लेकिन वक्त के साथ संकट (कोरोना) के अधिकाधिक वास्तविक होते जाने के बाद अंधविश्वास और कूपमंडूकता भरी बातें कमजोर तो हुईं, पर सरकार से लेकर मीडिया तक ने उनके लिए जगह बचाये रखी। 

22 June 2020

अन्धराष्ट्रवाद, युद्धोन्माद- मुर्दाबाद!

बीते कई दिनों से भारत-चीन सीमा पर पैदा हुआ सीमा विवाद कई सैनिकों की मृत्यु का कारण बना। 20 भारतीय सैनिक इस विवाद की भेट चढ़े, तो दूसरी तरफ चीन ने अपने हताहत व घायल सैनिकों की कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की है। हालांकि लगभग 40 चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर भारत के मीडिया व सोशल मीडिया में चल रही हैं

18 June 2020

अभिनेता सुशांत का यों चले जाना क्या बताता है...

14 जून को हिंदी सिनेमा जगत के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या की खबर आई। काई पो चे, ब्योमकेश बख्शी, पीके, छिछोरे, सोनचिड़िया, आदि फिल्मों में अपने अभिनय के लिए सुशांत जाने गए।