पिछली 10 मई से इस्राइली शासकों द्वारा फिलीस्तीनियों पर हमले जारी हैं। अब तक इन हमलों में 200 से भी अधिक लोगों की हत्या की जा चुकी है। इन हमलों में मासूम बच्चों को भी मिसाइली हमले का शिकार बनाया गया है। भारी संख्या में इस्राइली मिसाइलों ने फिलीस्तीन के अस्पतालों, स्कूलों व घरों को निशाना बनाया है। फिलीस्तीन की तरफ से कट्टरपंथी संगठन हमास भी इस्राइली हमले का जवाब दे रहा है। लेकिन हमास के हमले इस्राइली हमलों के आगे कहीं नहीं ठहरते। इस्राइल हमास के ज्यादातर मिसाइलों को हवा में नष्ट कर दे रहा है। अमेरिकी और यूरोपीय साम्राज्यवादियों की मदद से अपना सैन्यकरण करने वाले इस्राइल के पास जनसंहारक हथियार हैं। वह इन हथियारों का इस्तेमाल फिलीस्तीन पर कर रहा है। जिसकी कीमत फिलीस्तीन के मासूम बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।
इस्राइली शासकों का कहना है कि वह सिर्फ अपना बचाव कर रहे हैं। सोचने की बात है कि मासूम बच्चों, अस्पतालों, रियाहशी मकानों पर बम गिराकर वह किन से अपना बचाव कर रहे हैं ? हमास का बहाना बनाकर इस्राइली शासक मासूमों सहित आम नागरिकों के नरसंहार को अंजाम दे रहे हैं और इसे अपना बचाव बता रहे हैं।
इस वर्ष रमजान के महीने में इस्राइली शासकों से आशीर्वाद पाये कट्टरपंथी यहूदी समूहों द्वारा पूर्वी येरूशलम के फिलीस्तीनी आबादी वाले क्षेत्र में भड़काऊ जुलूस निकालकर हिंसा का वातावरण बनाया गया। अल अक़्सा मस्जिद में नमाज अदा करने से मुस्लिमों को रोका गया और इस्राइली पुलिस के साथ मिलकर उन पर हमला किया गया। इस उकसावे की कार्यवाही का जवाब कट्टरपंथी संगठन हमास ने इस्राइल पर कई राकेटों से हमला कर दिया। इसके बाद इस्राइली शासकों की मन मांगी मुराद पूरी हो गयी। वे जैसे इसी मौके की तलाश में बैठे थे। इस मौके को पाकर इस्राइली शासकों ने फिलीस्तीन पर हमले करने शुरू कर दिये जो अभी तक जारी हैं। रोज ही इसमें मासूम बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों की हत्याएं हो रही हैं।
दरअसल इस्राइली शासक और खासकर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने घरेलू संकट से ध्यान भटकाने के लिए इसी तरह के अंधराष्ट्रवादी माहौल की तलाश में थे। वैसे तो यह आम बात है कि जब भी किसी देश के शासक संकट में होते हैं तो वह अपने आजमाये हुए नुस्खे अंधराष्ट्रवाद, राष्ट्र पर हमला आदि की तलाश में होते हैं। यही काम नेतन्याहू की सरकार ने किया है। नेतन्याहू खुद भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं। पिछले दो वर्ष में चार बार आम चुनाव इस्राइल में हो चुके हैं लेकिन किसी भी पार्टी की सरकार नहीं बन पा रही है। इससे समझा जा सकता है कि इस्राइल के भीतर राजनीतिक संकट कितना गहरा है। इस हमले में राजनीतिक संकट से जूझ रहे इस्राइली शासक और भ्रष्टाचार से घिरे नेतन्याहू अपनी-अपनी संजीवनी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलीस्तीन कई दशकों से अपनी मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहा है। लेकिन अमेरिकी और यूरोपीय साम्राज्यवादियों से आशीर्वाद पाये इस्राइली शासक उसके इस संघर्ष को निरंतर कुचलते रहे हैं। यही नहीं वे फिलीस्तीन के इलाकों पर निरंतर कब्जा करते रहे हैं। आज के समय में फिलीस्तीन को इस्राइल द्वारा मात्र गाज़ा पट्टी के छोटे से क्षेत्र और वेस्ट बैंक के कुछ इलाकों तक समेट दिया गया है।
पश्चिमी साम्राज्यवादी मुल्क इस्राइल के साथ खड़े हैं। इस्राइल द्वारा किये जा रहे नरसंहारक और अमानवीय कृत्य पर वे मौन साधे हुए हैं। इस्राइल पश्चिमी एशिया में अमेरिकी साम्राज्यवादियों के लिए लठैत की भूमिका निभाता है। भारत सरकार की अमेरिकी साम्राज्यवादपरस्त विदेश नीति जारी है। इसी विदेश नीति के तहत भारत का शासक वर्ग हमास के हमलों का तो विरोध कर रहा है लेकिन इस्राइल द्वारा फिलीस्तीनियों के नरसंहार पर वह चुप्पी साधे है। मोदी और पूरी संघ मण्डली इस्राइल की और नेतन्याहू की तारीफ करते नहीं थकते हैं।
वहीं दूसरी तरफ फिलीस्तीन की मुक्ति की लड़ाई भी 1980 के दशक में चले जनता के संगठित संघर्ष इंतिफादा से काफी दूर जा चुकी हैं। इंतिफादा एक ऐसा आंदोलन था जिसे लोग जन बगावत की भी संज्ञा देते हैं। बाद के समय में फिलीस्तीन के मुक्ति संघर्ष में हमास जैसे कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव बढ़ता गया है। जाहिर है कि हमास जैसे संगठन फिलीस्तीनी जनता और फिलीस्तीन को मुक्ति नहीं दिला सकते। पूरी दुनिया में मजदूर-मेहनतकशों के ऐसे संघर्ष जो मज़दूर- मेहनतकशों का राज समाजवाद स्थापित करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हों, वही फिलीस्तीन की मुक्ति में मददगार हो सकते हैं। वे संघर्ष जो पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ लक्षित हों, फिलीस्तीन की मुक्ति को स्वर दे सकते हैं।
आज जरूरत बनती है कि फिलीस्तीन पर इस्राइली नरसंहार का विरोध करते हुए पूंजीवाद और साम्राज्यवाद का भी विरोध किया जाय। परिवर्तनकामी छात्र संगठन छात्रों, इंसाफपसंद नागरिकों से अपील करता है कि इस्राइल द्वारा फिलीस्तीनियों पर किये जा रहे इस नरसंहार का पुरजोर विरोध करें। आइये फिलीस्तीन पर अमानवीय हमले का विरोध करते हुए मांग करें कि-
1. फिलीस्तीन पर इस्राइली हमले तुरंत रोके जायें।
2. नरसंहार के दोषी इस्राइली शासकों पर अंतर्राष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चलाया जाये।
3. भारत सरकार इस्राइली शासकों के साथ सभी संबंध समाप्त करे।
4. भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इन हमलों को रोकने के लिए आवाज उठाये।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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