
16 सितंबर को, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 114 CUET टॉपर्स के नामों की घोषणा की जिन्होंने कम से कम चार या अधिक पेपर में 100 पर्सेंटाइल हासिल किए थे। इंडियन एक्सप्रेस ने 114 टॉपर्स में से 103 से बात की। इन बातों में जो निष्कर्ष निकल कर आए वो CUET लागू करते समय किए गए दावों की पोल खोल रहे हैं। आइए उन दावों और हकीकत को जानते हैं।
दावा नंबर 1 : मेरिट बेस पर एडमिशन होने से 12th में कम अंक लाने वाले छात्रों को एडमिशन नहीं मिल पाता था क्योंकि DU जैसे संस्थानों में हाई कट ऑफ जाती थी।हकीकत : इंडियन एक्सप्रेस ने जिन 103 टॉपर्स से बात की, उनमें से केवल 16 ने अपनी बोर्ड परीक्षा में 95% से कम अंक प्राप्त किए थे और केवल एक के 90% से कम थे। बाकी सभी 103 में से 86 छात्रों ने अपनी 12th की परीक्षा 95% से अधिक अंकों से पास की थी।
निष्कर्ष : मतलब की CUET ने भी कोई बड़ा बदलाव नहीं किया। 12th में अधिक मार्क्स लाने वाले पहले भी मेरिट बेस पर एडमिशन पा लेते थे और अब भी CUET के जरिए ऐसे छात्र ही अधिक एडमिशन ले पाएंगे। तो फिर छात्रों पर एक अतिरिक्त परीक्षा का भार क्यों थोपा गया? इस नई परीक्षा ने छात्रों के बजाए सिर्फ और सिर्फ कोचिंग संस्थानों को ही फायदा पहुंचाया है। जिससे कोचिंग की फीस भर पाने में सक्षम छात्र ही एडमिशन पाने में ज्यादा सफल हो पाएंगे। यानी कि कुल मिलाकर CUET गरीब छात्रों के विरोध में है।
दावा नंबर 2 : CUET एक समान परीक्षा प्रणाली है। सभी छात्रों को एक ही तरह की परीक्षा देनी होगी और जो अधिक योग्य होगा उसे ही एडमिशन मिलेगा।
हकीकत : CUET में टॉप करने वाले अधिकांश सीबीएसई के छात्र हैं। 103 टॉपर्स में से 100 सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्र हैं। दो ने कक्षा 12 में इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ISC) की परीक्षा दी थी और केवल एक राष्ट्रीय बोर्ड का छात्र नहीं था। इन टॉपरों में से कोई भी राज्य बोर्ड का छात्र नहीं था।
निष्कर्ष : CUET ने राज्य बोर्डो की उपयोगिता को बिल्कुल खत्म कर दिया है। अधिकांश टॉप करने वाले छात्र CBSE बोर्ड से हैं। राज्य बोर्ड अपने-अपने राज्यों की विविधता को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम तैयार करते हैं। किसी भी छात्र के बेहतर विकास के लिए ये जरूरी भी है। लेकिन CUET ने अपनी परीक्षा का आधार NCERT को बनाया है जिसके चलते राज्य बोर्ड की उपयोगिता धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। इस प्रकार CUET विविधता को खत्म कर जबरस्ती एकरूपता को थोपने का औजार है। और जब समाज से आने वाले छात्रों में कोई गरीब है, कोई अमीर है, कोई विकसित क्षेत्रों से है तो कोई पिछड़े क्षेत्रों से आता है तब इन सभी का एक ही प्रकार से मूल्यांकन कैसे हो पाएगा? तय है कि गरीब, पिछड़े इलाकों से आने वाले छात्र इस तथाकथित समानता की भेंट चढ़ जाएंगे। तथ्य भी यही बता रहे हैं।
दावा नंबर 3 : मेरिट बेस्ड एडमिशन में कुछ ही राज्य से आने वाले छात्र एडमिशन पा लेते हैं क्योंकि सभी राज्यों की अंक देने की पद्धति अलग-अलग है। CUET समानता लायेगा और अलग अलग राज्यों से आने वाले मेहनती छात्र एडमिशन पा लेंगे।
हकीकत : अधिकांश टॉपर्स, 103 में से 62, नई दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से हैं। दक्षिणी राज्यों के टॉपर्स की हिस्सेदारी नगण्य है।
निष्कर्ष : हमारे देश में कई पिछड़े राज्य है जहां से मुश्किल से छात्र DU जैसे संस्थान में पढ़ने आ पाते हैं। CUET के लगभग 65% टॉपर NCR से ही हैं। तो अन्य राज्यों से आने वाले छात्रों का क्या होगा ? देश के पिछड़े इलाकों से आने वाले छात्रों का क्या होगा? तय है कि CUET उनको बाहर छटनी करता चला जायेगा और यही हुआ भी है।
हमारी बात : मेरिट बेस एडमिशन प्रक्रिया में कई खामियां थीं। इस प्रक्रिया में भी अमीर, प्राइवेट स्कूलों से आने वाले, मेट्रोपोलिटन शहरों से आने वाले छात्रों या अपने-अपने क्षेत्रों से के आगे बढ़े हुए छात्रों को ही दाखिला मिल पाता था। पर इन सबके बावजूद कुछ गरीब छात्र इस प्रक्रिया के छिद्रों से एडमिशन पा जाते थे। CUET एक और परीक्षा, कोचिंग संस्थानों की जरूरत, एक समान परीक्षा आदि तरीकों से इन छोटे छेदों को भी बंद कर देता है इसलिए ये पहली वाली एडमिशन प्रक्रिया से भी ज्यादा खतरनाक है। इन दोनों प्रक्रियाओं के बजाए हमारा मानना है कि 12th पास कर चुके प्रत्येक पढ़ने की इच्छा रखने वाले छात्र को कॉलेज में पढ़ने का अधिकार है और उसके इस अधिकार को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी राज्य व्यवस्था और सरकार की है। क्योंकि आजादी के 75 वर्षों बाद भी हमारे शासक सबके पढ़ने लायक व्यवस्था नहीं बना पाएं हैं इसीलिए मेरिट और CUET के जरिए छन्नी लगाई जाती है जो अधिकांश छात्रों को छानकर बाहर कर देती है। इसके लिए दोषी भी छात्रों को बना दिया जाता है कि तुम में इतनी योग्यता ही नहीं है कि तुम आगे पढ़ पाओ। ऐसे में अपने अधिकार को पाने के लिए बाहर फेंके जा रहे छात्रों को इस छन्नी को तोड़ कर फेंकना ही होगा। और मांग करनी होगी कि शिक्षा पाना सबका अधिकार है। निकम्मे हम नहीं बल्कि तुम लुटेरे शासक हो जो अब तक भी सबको शिक्षा दे पाने में सक्षम भारत का निर्माण नहीं कर पाए।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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