24 February 2023

आइये! देहरादून में बेरोजगार छात्र-नौजवानों पर लाठीचार्ज और भर्ती घोटालों के विरोध में आवाज उठायें


1. आंदोलनरत बेरोजगार नौजवानों को तत्काल रिहा करो, फर्जी मुकदमे वापस लो।
2. बेरोजगार नौजवानों पर लाठीचार्ज का आदेश देने वाले पुलिस अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त करो।
3. भर्ती घोटालों की निष्पक्ष जांच कराओ।
4. जांच में भ्रष्ट पाये गये अफसरों-कर्मचारियों को बर्खास्त करो।
5. उत्तराखण्ड में विभिन्न विभागों में खाली पड़े 56,944 पदों को तत्काल भरो।
6. सबको योग्यतानुसार रोजगार दो, रोजगार नहीं देने तक प्रतिमाह न्यूनतम 10,000 रुपये बेरोजगारी भत्ता दो।

       उत्तराखंड में भर्ती घोटाले खुलते ही जा रहे हैं। इसके विरोध में देहरादून में प्रदर्शन कर रहे छात्र-नौजवानों पर उत्तराखंड कि पुलिस ने 8 फरवरी की आधी रात में भयंकर लाठीचार्ज कर छात्र-युवाओं के आंदोलन का दमन किया।


       जुलाई-अगस्त 2022 से UKSSSC (उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) उत्तराखण्ड में विभिन्न भर्तियों में पेपर लीक, भ्रष्टाचार की जांच STF (स्पेशल टास्क फोर्स) द्वारा की जा रही है। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती, दरोगा भर्ती, वन दरोगा भर्ती, पटवारी, एआरओ, पीसीएस-जे, जेई आदि सहित दर्जनों भर्तियों की जांच चल रही है। इसके अलावा सचिवालय में विधानसभा अध्यक्षों द्वारा परिजनों, रिश्तेदारों की मनमानी नियुक्ति का मामला भी सामने आया था। अभी तक दर्जनों गिरफ्तारी होने के बावजूद भर्ती घोटाले में मुख्य आरोपी खुले घूम रहे हैं, पकड़े गये कुछ आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं। शुरुआत से ही नौजवान सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

       जनवरी 2023 में फिर से लेखपाल की भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार सामने आया। अब UKPSC (उत्तराखंड लोक सेवा आयोग) द्वारा कराई गयी परीक्षाएं भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी। इसके विरोध में छात्र-नौजवान, बेरोजगार देहरादून के गांधी पार्क में शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन (सत्याग्रह) कर रहे थे। इसमें सीबीआई जांच, ‘पहले जांच, फिर परीक्षा’ सहित नकल विरोधी कानून बनाने की मांग आंदोलनकारी नौजवान उठा रहे थे। 8 फरवरी को बिना नेम प्लेट के पुलिसकर्मियों ने बेरोजगारों के आंदोलन का दमन कर उनको वहां से उठाया। पुरुष पुलिसकर्मियों ने कानून के खिलाफ जाकर छात्राओं को भी दमन का शिकार बनाया। लाठीचार्ज के विरोध में 9 फरवरी को देहरादून में हजारों छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन पर फिर से लाठीचार्ज कर नौजवानों के आंदोलन को कुचलने की कोशिश की गई। इसके विरोध में हल्द्वानी, उत्तरकाशी, चंपावत, पिथौरागढ़, रामनगर से लेकर उत्तराखंड सहित देश के कई शहरों में छात्र-नौजवान, न्यायप्रिय लोग आक्रोशित हैं। वह पुलिसिया दमन व भर्ती घोटालों के विरोध में प्रदर्शन कर अपनी एकजुटता जाहिर कर रहे हैं।


        अब जाकर उत्तराखंड सरकार ‘नकल विरोधी कानून’ बनाने जा रही है। इस कानून के तहत पुलिस ने पहला मामला परीक्षा लीक की शिकायत करने वाले अभ्यर्थी पर ही दर्ज कर दिया। कानून अपराधियों को बचाने और पीड़ितों को ही प्रताड़ित करने का हथियार बन गया है। पेपर लीक के आरोपी बड़े भ्रष्ट मगरमच्छ तो अपने रसूख के चलते कानूनों से भी आसानी से बच जाते हैं। हां, कुछ छोटी मछलियां जरूर पकड़ में आ सकती हैं।

       सालों से रिक्त पड़े 56,944 पद भरे नहीं गये हैं। हमें भर्ती परिक्षाओं में पारदर्शिता की मांग करनी चाहिए। साथ ही, रिक्त पड़े खाली पदों को भरने की मांग भी अपने आंदोलन में उठानी चाहिए। इसी तरह सालों से नये पद सृजित नहीं किये गये हैं। नये पद भी सृजित किये जाने की मांग उठानी चाहिए। सरकारी नौकरियों में ठेका, संविदा, उपनल, निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। निजी संस्थानों में ठेका प्रथा के तहत मात्र 7000-8000 रुपये में कुशल नौजवान काम करने को मजबूर हैं। हमें अपने इस आंदोलन में निजीकरण और ठेका प्रथा को सभी संस्थानों से खत्म किये जाने की मांग उठानी चाहिए। तभी हम स्थायी और सुरक्षित नौकरियों को बचा सकते हैं।

       बेरोजगारी की भयावहता आज हर कोई महसूस कर रहा है। बेरोजगारी के प्रति केन्द्र की मोदी सरकार से लेकर राज्य सरकारों तक सबकी बेशर्म बेरुखी जगजाहिर है। 2016 से बेरोजगारी के आंकड़े मोदी सरकार छिपाये जा रही है। किसी भी तरह जीवनयापन को ही मोदी सरकार ने रोजगार घोषित कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी के कारण तनाव, अवसादग्रस्तता व आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।


       नौकरी के सीमित अवसरों के चलते नौजवानों का गलाकाटू प्रतियोगिता में कूदना मजबूरी है। नौजवान रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। इन्हीं में कुछ अपने पैसे, रसूख या जान-पहचान का इस्तेमाल कर भ्रष्ट तरीकों से नौकरी पाने से भी कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। कम से कमतर होते स्थायी-सुरक्षित नौकरी के चलते भ्रष्ट तरीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उत्तराखण्ड, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, आदि-आदि सभी राज्य बारी-बारी से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी नौकरियों के गवाह बनते रहे हैं। भ्रष्टाचार के नाम पर आगामी भर्तियों को रद्द कर बेरोजगारों पर और अधिक हमला सरकारें करती हैं। कोई राजनीतिक पार्टी इस भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद या परिवारवाद से मुक्त नहीं है। या कहें कि हमाम में सब नंगे हैं।

       पैसे, पावर (सत्ता तक पहुंच) के चलते नौकरी पाने का आलम ये है कि राष्ट्रहित, देशहित का शोर मचाते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों के परिजनों को नौकरियां दी गयी। तमाम भाजपा के मंत्रियों-नेताओं के करीबियों को नौकरियां दी गयी। अपनी बारी में यही काम कांग्रेस सरकार ने भी किया।

       उत्तराखण्ड की ‘डबल इंजन’ की भाजपा सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति भर्ती घोटाले के अपराधियों को संरक्षण और इनकी जांच की मांग करने वाले छात्र-नौजवानों पर दमन, लाठीचार्ज की है। इसके विरोध में आज छात्र-नौजवानों, न्यायप्रिय लोगों को आगे आने की जरूरत है। भ्रष्टाचार की भेंट वो छात्र-नौजवान चढ़ रहे हैं जो सालो-साल पहाड़ों, अपने घरों से दूर रहकर मेहनत कर रहे हैं लेकिन उनके पास पैसा, ताकत नहीं है। आइये! ऐसे में बेरोजगारी के खिलाफ संघर्ष करते हुए हम अपनी मांग बुलन्द करें। और अपने रोजगार के अधिकार को हासिल करें।

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

No comments:

Post a Comment