दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन व सरकार के दमन का शिकार हुए हैं। इस बार 2 छात्रों को 1 वर्ष तक किसी भी परीक्षा में शामिल न करने की सजा दी गई है और कई अन्य छात्रों को 'हल्की सजाएं' विश्वविद्यालय प्रशासन ने दी है। दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्रों को यह सजा बीबीसी की गुजरात दंगों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने के 'अपराध' में सुनाई है।
जैसा कि इतना कि काफी नहीं था, जब छात्र इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे उनको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। किसी भी तरह के विरोध को न करने देना यह आज आम बात हो गई है। कॉलेज-कैंपसों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध के स्वर को निर्ममता से कुचला जा रहा है।
बीबीसी की जिस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने के लिए छात्रों की परीक्षा देने से 1 वर्ष तक रोका गया है उसके बारे में दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वह डॉक्यूमेंट्री प्रतिबंधित है। जाहिर है कि उस डॉक्यूमेंट्री पर कानूनन कोई प्रतिबंध मोदी सरकार ने नहीं लगाया। सरकार ने सोशल मीडिया के आयोजकों से उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने को आदेशित किया था। देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्रों व विपक्षी पार्टियों द्वारा गुजरात दंगों पर आधारित इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की गई थी।
बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री से मोदी सरकार असहज हो गई थी। उसे वह किसी भी रुप में रोकना चाहती थी। दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन मोदी सरकार के इशारों पर छात्रों को स्क्रीनिंग करने की सजा दे रहा है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के इस दमन का विरोध करता है और पीड़ित छात्रों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करता है।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)



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