NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) मंगलवार की सुबह से भगतसिंह स्टूडेंट्स मोर्चा (BSM), BHU के कार्यालय पर छापा मार रही है। मीडिया से मिली खबरों के अनुसार कार्यालय में मौजूद BSM की अध्यक्ष आकांक्षा आज़ाद और सहसचिव सिद्धि को डिटेन कर के रखा हुआ है। उनके फोन भी एनआईए ने जब्त कर लिया है, और किसी को भी अंदर नहीं आने दे रहे हैं। उन्होंने BSM कार्यालय को पुलिस की छावनी में बदल दिया है। जब संगठन के साथी कार्यालय पहुंचे तो एनआईए व पुलिस उनके फोन छीनकर उनके साथ गुंडागर्दी और मारपीट कर की।
इलाहाबाद में भी पीयूसीएल की उत्तर प्रदेश राज्य सचिव, मानवाधिकार कार्यकर्ता सीमा आजाद व उनके जीवनसाथी विश्वविजय, सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता मनीष आजाद, एडवोकेट सोनी आजाद व रितेश विद्यार्थी, के घर पर भी एनआईए द्वारा छापा मारा गया है। खिरियाबाग, आजमगढ़ आंदोलन व संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल साथी राजेश जी के देवरिया जिले में स्थित उनके घर पर भी एनआईए टीम छापा मार रही है। अब तक की जानकारी के अनुसार सीमा, विश्वविजय, सोनी और रितेश को एनआईए अपने कहीं साथ ले गई है जिसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है। मिली जानकारी के अनुसार यूपी के 5 जिलों में NIA ने मंगलवार सुबह छापेमारी की। टीम ने आजमगढ़, देवरिया, वाराणसी, प्रयागराज और चंदौली में 8 जगहों पर सर्च ऑपरेशन किया।
मोदी-योगी-संघ सरकार की जन विरोधी नीतियों का मुखर विरोध करने वाले छात्र-युवा, और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के यहाँ छापेमारीकर उनका दमन कर रही है। पहले भी सरकार की आलोचना करने वाले वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, स्टेन स्वामी, उमर खालिद जैसे कवि, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता पिछले लंबे समय से जेलों में सड़ रहे है।
सरकारी एजेंसियां आज सरकार के इशारों पर चल रही है। NIA, CBI, ED जैसी संस्थाएं सरकार के इशारों पर चलकर अपनी बची हुई विश्वसनीयता को भी खो रही हैं। यह सरकार की टीम बनकर काम कर रही हैं। फासीवादी रुझान लिए मोदी सरकार की इन जन विरोधी नीतियों का सभी जनवाद और इंसाफ पसंद जनता को पुरजोर विरोध करना चाहिए। तभी सुकुड़ते हुये जनवाद के खिलाफ रक्षा की जा सकेगी।
क्रांतिकारी इस्तक़बाल के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)


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