तेलंगाना के उस्मानिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कैम्पसों में धरना प्रदर्शन, नारेबाजी, आंदोलन के सभी रूपों पर रोक लगा दी। इसका विरोध होने पर वि.वि. प्रशासन ने कहा कि यह 'पूर्ण प्रतिबंध' नहीं है। विवि प्रशासन के कामों के सुचारू संचालन में बाधा के नाम पर इन प्रतिबंधों को लागू किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा के बजट में लगातार कटौती की जा रही है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों से लेकर राज्य विश्वविद्यालयों तक बजट कटौती का बुरा असर साफ दिख रहा है। फैकल्टी, अन्य संशाधनों की कमी से लेकर फीस वृद्धि जैसे मुद्दों पर छात्र संघर्ष कर रहे हैं। इन कमियों को दूर कर उच्च शिक्षा की हालत सुधारने के बजाय विवि छात्र आंदोलनों का दमन कर रहे हैं। जेएनयू, डीयू, बीएचयू से लेकर उस्मानिया विवि तक सब जगह विश्वविद्यालय प्रशासन का यही व्यवहार है।
राजनीतिक दल अपने स्वार्थों के हिसाब से केंद्र व राज्य सरकारों को घेरते हैं लेकिन अपनी बारी में खुद भी छात्रों का दमन करते हैं। केंद्र की भाजपा सरकार हो या अलग-अलग राज्य सरकार सब शिक्षा को बर्बाद करने के जिम्मेदार हैं। शिक्षा को मुनाफे के लिए खोलते हुए देशी-विदेशी पूंजीपतियों के लिए खोल दिया है तो लोन लेकर पढ़ने के लिए बैंकिंग क्षेत्र के पूंजीपतियों के वारे न्यारे कर रखे हैं। इन हालातों में छात्रों के लिए संघर्ष के दरवाजे खुले रखने को हर सम्भव जद्दोजहद करना जरूरी है।

No comments:
Post a Comment