शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो !
देश में पेपर लीक का सिलसिला जारी है। एक एग्जाम के लिए छात्र सालों मेहनत करते हैं। पेपर देने के लिए बसों, ट्रेनों में भारी परेशानी झेलते हैं। अपने परिवार का काफी पैसा और समय लगाते हैं। इस उम्मीद में कि नौकरी के बाद जिंदगी सुधर जाएगी। पेपर लीक ऐसी उम्मीदों पर पानी फेर देता है। छात्र, उनका परिवार, दोस्त सब एक-दूसरे को ढांढस बंधाते हैं, अफसोस जताते हैं। लाचारी और गुस्सा साथ-साथ आता है। लाखों लोग इस लाचारी और गुस्से से गुजरते हैं। सालों से हो रहे पेपर लीक से अब इनकी संख्या करोड़ों में है। कई तो इतने टूट जाते हैं कि अपनी जिंदगी ही खत्म कर लेते हैं। NEET के इस पेपर लीक के बाद नागपुर की आकांक्षा चतुर्वेदी, जयपुर के प्रदीप मेघवाल आदि कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली।
पिछले दशकों में सरकारों की नीतियों के कारण भारत में बेरोजगारी बढ़ती चली गई है। बेरोजगारी ने छात्रों के ज्ञान और उनके गरिमामय जीवन जीने के अधिकार की धज्जियां उड़ा दी है। छात्र लाखों रुपये खर्च कर, गरीब-किसान-मजदूर कर्ज लेकर या अपनी बची संपत्ति घर-खेत बेच कर अपने बच्चों को पढ़ाता है। उसके बाद भी उसके बच्चों के पास कोई काम नहीं है। और ऐसे में परीक्षाओं का पेपर लीक होना सारी उम्मीदों पर पानी फेर देता है।
धर्मेंद्र प्रधान को जानलेवा लापरवाही के कारण छात्रों युवाओं को हुई परेशानी और आत्महत्याओं के लिए इस्तीफा देना होगा। क्योंकि सत्ता में बैठे लोग हद दर्जे के बेशर्म हो गए हैं तो यह हम नौजवानों की जिम्मेदारी है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफे के लिए मजबूर करें। इसके लिए सड़कों से लेकर मीडिया, सोशल मीडिया तक हर जगह कोशिश करें।
'कॉकरोच जनता पार्टी' इन हालातो में सीजेआई सूर्यकांत के "कॉकरोच" और "परजीवी" वाले शर्मनाक बयान के कारण ही पैदा हुई। अच्छी पढ़ाई और नौकरी देने में फेल सिस्टम जब छात्रों-युवाओं को "कॉकरोच" और "परजीवी" कहता है तो वो और क्या करते? गहरे दर्द में मुस्कुराते हुए इस बेज्जती को स्वीकार करने का व्यंग्य (satire) किया।
आज का यह पूंजीवादी सिस्टम न सिर्फ छात्रों बल्कि मजदूर और मेहनतकश लोगों के भी खिलाफ है। यहां छात्र शिक्षा के निजीकरण, महंगी होती शिक्षा और बेरोजगारी से परेशान हैं तो मजदूर-किसान महंगाई, कम वेतन, शोषण से परेशान हैं। आज सिस्टम इंसाफ की हर आवाज को कुचल रहा है, लाठी मार रहा है, मुकदमे लगा रहा है, जेल में ठूंस रहा है। यहां तक की "देशद्रोही", "पाकिस्तानी", "अर्बन नक्सल" और न जाने क्या-क्या कहकर बदनाम कर रहा है। इस सबके बावजूद हम अंबानी-अडानी जैसों के सेवक, सिस्टम की कठपुतली, लठैत या अंधभक्त बनने से इंकार करते हैं। और इनकी हर हिटलरी चाल का हम मुकाबला करेंगे।
यह आंदोलन देश के छात्रों-युवाओं का ही नहीं बल्कि हर मजदूर मेहनतकश का है। पसीने में लथपथ किसानों का है। मेहनती कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों का है। उनके बच्चों के बेहतर भविष्य का आंदोलन है। हमें याद रखना चाहिए कि चाहे किसान आंदोलन रहा हो या मजदूर आंदोलन या महिलाओं के सम्मान का संघर्ष इंसाफ की हर लड़ाई में छात्रों-युवाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। और यह भागीदारी आगे भी जारी रहेगी।
इस सिस्टम में मेहनती और ईमानदार मुश्किल से जी पा रहे हैं। इस सिस्टम को चलाने वाले अफसर, नेता, जज मजे से बचे-खुचे सिस्टम को लूट रहे हैं। मेहनतकश जनता के यह लुटेरे छात्रों-युवाओं को 'कॉकरोच' कह रहे हैं।
पिछले 30 वर्षों से जारी शिक्षा के निजीकरण और बाजारीकरण की नीतियों ने शिक्षा और रोजगार को संकट में डाल दिया है। सीटों की संख्या को लगातार कम कर प्रतियोगिता को भीषण बना दिया है। कोचिंग सेंटरों के बढ़ते जाल और पेपर लीक/साल्वर माफियाओं का आतंक इन्हीं नीतियों का तार्किक परिणाम है।
हमारी यह जिम्मेदारी भी है और जरूरत भी कि हम इस लूट के तंत्र की तह तक जाएं। यह समझें कि इसके असल कारण क्या हैं? जैसा कि नौजवानों के दिलों में बसने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह ने किया। वह कैसी दुनिया और कैसा भारत चाहते हैं उसके बारे में शहीदे आजम भगत सिंह ने कहा था- "अगर कोई सरकार जनता को उसके बुनियादी अधिकारों से वंचित करती है, तो जनता का यह अधिकार ही नहीं बल्कि कर्तव्य भी है कि वह ऐसी सरकार को बदल दे या समाप्त कर दे।" भगत सिंह ने यह भी कहा था कि "जहां एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का और एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति का शोषण ना हो।" ऐसा समाज सिर्फ समाजवादी क्रांति से ही हासिल हो सकता है। भगत सिंह और क्रांतिकारियों के सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी अब हम नौजवानों या जेन-जी की है।
आइए! पेपर लीक की जवाबदेही तय करवाएं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लें। हम यह वायदा करें कि समाज को छात्रों-नौजवानों सहित सभी मेहनतकशों के सम्मान से रहने लायक बनाने तक हम संघर्ष करते रहेंगे। इस तरह इंसाफपसंद इंसान बनने की राह में चलते रहेंगे, समूह में, एक संगठन में। परिवर्तनकामी छात्र संगठन भी इंकलाब की इस राह पर है। आइए! आपका भी स्वागत है।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)
