16 January 2017

रोहित वेमुला की आत्म(हत्या) के 1 साल............

कैम्पसों के जनवादीकरण के लिए संघर्ष तेज करो!
फासीवादी-जातिवादी ताकतों के खिलाफ एकजुट हों!!

        आज 17 जनवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के 1 साल पूरे हो गए हैं। आज से ठीक 1 साल पहले रोहित ने विवि. प्रशासन व संघी ताकतों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के दवाब में आत्म(हत्या) कर ली थी। रोहित की मौत के बाद पूरी संघी सरकार व विवि. प्रशासन रोहित की हत्या को आत्महत्या में बदलने का प्रयास करता रहा। जबकि ये जगजाहिर था कि आरएसएस का लम्पट छात्र संगठन एबीवीपी रोहित की आत्म(हत्या) में प्रत्यक्ष तौर पर शामिल था। यही नहीं पूरे विवि. प्रशासन ने संघ के इशारों पर उस फंदे को तैयार किया जिसपर अन्ततः मजबूर होकर रोहित वेमुला को झूलना पड़ा।

5 January 2017

नोटबंदी के 50 दिन: दावे सारे फेल

        30 दिसम्बर को नोटबंदी को 50 दिन पूरे हो गये। यह 50 दिन देश में अफरा-तफरी भरे रहे। मोदी ने अपने तुगलकी फरमान से देश की जनता को हैरान-परेशान कर दिया। शुरूआती दिन तो ‘अच्छे दिन’ की उम्मीद में कट गये कुछ और दिन जनता ने मन को दिलासा देकर काट लिए। किन्तु निर्लज्ज मोदी सरकार अपनी लफ्फाजियों को जारी रखे रही। उसे घंटो लाइन में खड़े बुर्जुग, महिला, अपना काम छोड़ लाइन में लगे व्यक्तियों का कष्ट नही दिखाई दे रहा था। कई लोगों ने तो लाइन में ही दम तोड़ दिया तब भी निर्लज्ज सरकार मिठाई बंटवाकर बधाई दे रही थी।

3 January 2017

नारी मुक्ति आंदोलन की पुरोधा सावित्री बाई फुले

(ये लेख परचम पत्रिका के अंक जनवरी-मार्च, 2016 से साभार लिया गया है। 3 जनवरी, सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस पर हम इसे अपने ब्लाॅग पर जगह दे रहे हैं। आशा करते हैं के ये लेख सावित्री बाई फुले व उनके विचारों को समझने में कारगर होगा)



        सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका तथा भारत में नारी मुक्ति आंदोलन की नींव रखने वाली पहली महिला थी। उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के सहयोग से हमारे देश में महिला शिक्षा की नींव रखी। उन्नीसवीं सदी में भारतीय समाज में शिक्षा पर चन्द पुरुष सवर्णों का ही अधिकार था। स्त्रियों तथा शूद्रों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं था। समाज में जात-पात, छुआ-छूत, बाल विवाह, सती प्रथा, विधवा विवाह निषेध जैसी कई कुरीतियां मौजूद थीं। सम्पूर्ण भारत में घोर ब्राह्मणवादी पाखण्ड व मनुवादी विचारों के चलते महिलाएं गुलामी का सा जीवन जीने को मजबूर थीं। महिलाओं को कोई अधिकार तथा सामाजिक समानता प्राप्त नहीं थी। ऐसे में सावित्री बाई फुले ने अपने पति के साथ मिलकर स्त्री शिक्षा, समानता तथा विधवा पुनर्विवाह जैसे सामाजिक कार्यों को अपने लक्ष्य में लिया तथा आजीवन इन कार्यों को जारी रखा।