23 May 2016

राजस्थान में शिक्षा के भगवाकरण की बड़ी छलांग

        राजस्थान सरकार ने पाठ्य पुस्तकों को पूरी तरह बदलकर उन्हें संघी एजेण्डे के अनुरूप ढाल दिया है। ये बदली हुयी पाठ्य पुस्तकें अगले सत्र से लागू कर दी जाएगीं। पुस्तकें लिखने के लिए बनायी गयी 8 सदस्यी टीम के सामने वसुंधरा राजे सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि वे किताबें इस तरह से बनाए जिससे शिक्षा को भगवा रंग चढ़ाया जा सके। इससे पूर्व भी राजस्थान सरकार बड़े पैमाने पर शिक्षा के भगवाकरण की मुहिम में लगी हुयी थी। सूर्य नमस्कार से लेकर भगवद् गीता को स्कूलों में अनिवार्य किया जा चुका है। मोदी भक्ति में डूबी वसुंधरा सरकार ने मोदी को ही पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया था। चैतरफा विरोध के बाद ही सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।

कोई हारा-कोई जीता, हम वहीं के वहीं

5 राज्यों में विधान सभा चुनाव

        5 राज्यों में विधान सभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। इन परिणामों ने एक बार फिर से पूंजीवादी लोकतंत्र की हकीकत उजागर की। तमिलनाडु में तो भारी पैमाने में पैसे-शराब के बंटने को देख चुनाव आयोग को भी सख्त किन्तु र्निजीव टिप्पणी करनी पड़ गयी। कम ज्यादा यही स्थिति अन्य राज्यों में भी रही। विकल्प हीनता की स्थिति में खड़ी जनता एक के बाद दूसरे, दूसरे के बाद फिर पहले को चुनकर इसे उजागर कर रही है।

16 May 2016

जेएनयू से जादवपुर तक छात्र संघर्षरत

        शिक्षण संस्थानों को अपने फासीवादी हमले का निशाना बनाने की सरकारी मुहिम बदस्तूर जारी है। मोदी सरकार देश के उच्च शिक्षण संस्थानों को संघ की पाठशाला में तब्दील करने पर उतारू है। इसके लिए वह शिक्षण संस्थानों में छात्रों के जनवाद का गला घोंटने के साथ-साथ हर तरह की प्रगतिशीलता,वैज्ञानिकता,तर्कपरकता का कत्ल कर कूपमंडूकता का राज कायम करना चाहती है। इसकी शुरूआत उसने स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास मंत्री बनाकर की। स्मृति ईरानी सत्ता में बैठने के बाद से ही एक-एक कर छात्रों पर संघी हमले बोलने का काम कर रही हैं।

13 May 2016

कोटा आत्महत्याएंः पूंजीवादी प्रतियोगिता की भेंट चढ़ते छात्र

        8 मई को दो और छात्रों ने कोटा, राजस्थान में आत्महत्या कर ली। इससे 10 दिन पूर्व भी एक 17 वर्षीय छात्रा ने आई.आई.टी. में नम्बर कम आने की वजह से आत्महत्या कर ली थी। इस वर्ष विभिन्न समयों पर लगभग 8 छात्र पहले ही आत्महत्या कर चुके हैं। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 30 तक पहुंच चुका था। नौजवानों का इस तरह मौत को गले लगा लेना बेहद चिंता का विषय है। आम तौर पर आत्महत्या के लिए छात्र को ही एक मात्र दोषी समझ कर, उसके व्यक्तित्व की कमजोरी कहकर संतुष्ट हो लिया जाता है। किन्तु यदि हम उन हालातों की गहराई में जाये जिन वजहों से कोई छात्र आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है तो कई कोचिंग संस्थान यहां तक की यह पूंजीवादी व्यवस्था ही कटघरे में खड़ी नजर आयेगी।

3 May 2016

JNU के छात्रों का संघर्ष जिन्दाबाद!

        JNU लम्बे समय से चल रहे छात्र संघर्षो के कारण चर्चा में है। 9 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष आज भी जारी है। JNU के बहादुर छात्र साथियों द्वारा जो संघर्ष चलाया जा रहा है उसे देश-दुनिया के सभी इंसाफ पसंद छात्र अपना समर्थन दे रहे हैं।