26 जनवरी जिस दिन भारतीय शासक वर्ग अपने महान गणतंत्र का जश्न मनाता है और आजादी, समानता का ढोल पीटता है। उसी दिन भारतीय शासक वर्ग और भारतीय पूंजीपति अपने गणतंत्र, जनवादी अधिकारों की महानता का बखान करते नहीं थकता। ठीक उसी दिन 26 जनवरी को उधम सिंह नगर (उत्तराखण्ड) की पुलिस कायराना तरीके से इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट को गिरफ्तार कर लेती है।
27 January 2019
इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट की गिरफ्तारी का विरोध करो !
26 जनवरी जिस दिन भारतीय शासक वर्ग अपने महान गणतंत्र का जश्न मनाता है और आजादी, समानता का ढोल पीटता है। उसी दिन भारतीय शासक वर्ग और भारतीय पूंजीपति अपने गणतंत्र, जनवादी अधिकारों की महानता का बखान करते नहीं थकता। ठीक उसी दिन 26 जनवरी को उधम सिंह नगर (उत्तराखण्ड) की पुलिस कायराना तरीके से इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट को गिरफ्तार कर लेती है।
24 December 2018
पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष ही महिला हिंसा से रोकथाम करेगा
महिला हिंसा की दो वीभत्स और क्रूर घटनायें पिछले दिनों घटी। एक घटना उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले कि थी तो दूसरी घटना उत्तर प्रदेश के आगरा की। आगरा की छात्रा संजलि जहां 10वीं की छात्रा थी वहीं पौड़ी की छात्रा बी.एस.सी. द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रही थी। दोनों ही घटनाओं में आरोपियों ने पीड़िता को जिन्दा जला दिया।जिन्दगी की जंग लड़ते हुए आगरा की छात्रा ने 20 दिसम्बर को तो पौड़ी की छात्रा ने 23 दिसम्बर को अंतिम सांस ली।
10वीं की छात्रा की हत्या के कारणों का, आरोपियों का पता नहीं है परन्तु संदेह के घेरे में आये उसके चचेरे भाई ने आत्महत्या कर ली। वहीं पौड़ी की घटना में वहशी लम्पट, छात्रा से छेड़छाड़ कर रहा था और छात्रा के द्वारा विरोध करने पर उसने छात्रा को जिन्दा जला दिया।
12 December 2018
सरकार नहीं पूँजीवादी व्यवस्था को बदलने के लिए एकजुट हों!
5 राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मिजोरम में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गये। तीन बड़े राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़) में जहाँ कांग्रेस बहुमत या गठबंधन से सरकार बनाने जा रही हैं। वही मिजोरम में कांग्रेस की हार हुई और तेलंगाना में टी.आर.एस. (तेलगांना राष्ट्र समिति) दुबारा सत्ता में आ गई।
मोदी-शाह-योगी की धुंआधार रैलियों के बावजूद मोदी-शाह की जोड़ी यहाँ जीत हासिल ना कर सकी। जैसा की हर बार ही होता है। जीत का शेहरा मोदी-शाह के सर बंधता हैं और हार का ठीकरा अन्य के। इस बार भी यही हुआ हार के बाद रमन सिंह, शिवराज सिंह आदि हार की जिम्मेदारी ले रहे हैं। भाजपा-संघ के नेता लगातार कह रहे है कि चुनावी परिणामों को मोदी के काम से जोड़कर ना देखा जाए। कुल मिलाकर इन विधान सभा चुनाव से भाजपा खेमे में खासी निराशा हैं। और 2019 के आम चुनावों के लिए उनकी चिंताए काफी बढ़ गयी हैं।
कांग्रेस पार्टी इस जीत को राहुल गाँधी के कुशल नेतृत्व के रूप में प्रचारित कर रही है। साथ ही मोदी के विरोध के रूप में भी दर्ज करवा रही है। कांग्रेस पार्टी चुनाव परिणाम को मोदी की विफल नीतियों का परिणाम साबित कर रही है।
4 December 2018
संघर्षरत इंटार्क मजूदरों के समर्थन में.....
इंटार्क रूद्रपुर (उत्तराखण्ड) के मजदूर अपनी जायज मांगों के लेकर पिछले 4 माह से संघर्षरत हैं। उत्तराखण्ड सरकार उनकी जायज मांगों को मानने के बजाए पूंजीपतियों के साथ खड़ी है और हर तरह से आंदोलन का दमन करने में लगी है परिवर्तनकामी छात्र संगठन, इंटार्क के संघर्षरत मजदूरों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए उत्तराखण्ड सरकार से मांग करता है कि वो अपनी दमनकारी नीतियों को छोड़ते हुए मजदूरों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करें।
पिछले चार माह से मजदूर कम्पनी द्वारा की जा रही अवैध कटौती और निलम्बन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। श्रम आयुक्त के मुताबिक वार्ता के दौरान यह वैध नहीं माना गया। फिर भी सरकार मालिक पर कोई कार्यवाही करने के बजाए मजदूरों का ही दमन करने पर उतारू है। 23 नवंबर से मजदूर अपने माता-पिता, पत्नी और दुधमुंहे बच्चों के साथ कंपनी के रूद्रपुर और किच्छा गेट पर धरना दिये बैठे हैं। 28 नवंबर से आमरण अनशन शुरू हो गया है। अनशनकारी श्रीमती अखिलेश, निहारिका और जरीना बेगम ने पूरे देश की जनता के नाम पर एक मार्मिक अपील की है कि "उनके आखिरी समय पर उन्हें स्थानीय भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल के आवास पर मरने के लिए छोड़ दिया जाये। उसके बाद उनकी मृत देह को पूरे हल्द्वानी शहर में घुमा कर भूतपूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान भाजपा सांसद भगत सिंह कोश्यारी के आवास पर जलाया जाए। 30 नवंबर को यह पत्र मोदी जी को भी भेजा गया है।" इसी में जिक्र किया गया है कि कंपनी के मैंनेजर मनोज रोहिल्ला और वर्मा कहते हैं कि उनके सीधे अरूण जेटली और भाजपा से संबंध हैं।
28 November 2018
संघर्षरत किसानों से दो बातें .......
किसान-मजदूर-छात्र एकता जिंदाबाद !
(29-30 नवंबर को देशभर से हजारों किसान अपनी न्यायपूर्ण मांगों के लिए दिल्ली की सड़कों पर अपनी दस्तक देने आ रहे हैं। पछास किसानों के आंदोलन के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता जाहिर करता है। इस मौके पर आंदोलन को समर्थन देते हुए ‘इंकलाबी मजदूर केन्द्र’ द्वारा एक पर्चा जारी किया गया है। हम इस पर्चे से सहमति जाहिर करते हुए आप सभी साथियों तक इसे पहुंचा रहे हैं।)
साथियो देश भर में किसान अपनी न्यायोचित्त मांगों को लेकर जुझारू संघर्ष कर रहे हैं। संघर्षरत किसानों ने जहां सत्ताधारियों को चैन की नींद नहीं लेने दिया है तो वहीं मजदूर-मेहनतकश जनता में नया जोश भरा है। सत्ता के लगातार दमन-उत्पीड़न के बावजूद किसानों का प्रतिरोध संघर्ष जारी है। इसी कड़ी में 29-30 नवंबर को दिल्ली में किसान मुक्ति मार्च का आयोजन किया गया है। किसान मुक्ति मार्च के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए एवं किसान भाइयों की न्यायोचित मांगों का समर्थन करते हुए हम मौजूदा कृषि संकट पर कुछ बातें विचार हेतु रखना चाहते हैं।
4 November 2018
डीयू में कांचा इलैया की किताबों पर रोक लगाए जाने का विरोध करो !
शिक्षा पर संघी गिरोह द्वारा किए जा रहे हमलों के खिलाफ एकजुट हो !!
डीयू में ‘दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टैंडिंग कमेटी आॅन अकैडमिक मैटर्स’ ने दलित चिंतक कांचा इलैया द्वारा लीखित ‘गाॅड ऐज पाॅलिटिकल फिलाॅसफर’, वाय आइ एम नाॅट हिंदू, ‘पोस्ट हिंदू इंडिया’, नंदिनी सुंदर द्वारा लिखित ‘बर्निंग बस्तर’ और क्रिस्टोफर जैफरलाॅट की ‘द मिलिशियाज आॅफ हिंदुत्व’ जैसी किताबों को एम.ए. राजनीतिक विज्ञान के पाठ्यक्रम से हटाने का सुझाव दिया है। यही नही डीयू के पाठ्यक्रम में कहीं भी ‘दलित’ शब्द का उपयोग करने पर भी आपत्ति जताते हुए ‘स्टेंडिंग कमेटी’ द्वारा इसे न प्रयोग करने का सुझाव दिया गया है। ये दोनों सुझाव एकेडमिक काउंसिल को भेजे गए हैं। वहां से फैसला आने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
25 October 2018
NIT श्रीनगर (उत्तराखण्ड) के आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में...........
NIT श्रीनगर के छात्र अपनी न्यायपूर्ण मांगों के लिए बीते 4 अक्टूबर से आंदोलनरत है। आंदोलन की अगली कड़ी में मांगे न माने जाने तक सभी 950 छात्रों ने 24 अक्टूबर से कैम्पस को छोड़ने का निर्णय लिया है। इनमें से अधिकांश छात्र कैम्पस छोड़़ कर जा चुके हैं और बाकी जाने की तैयारी कर रहे हैं। छात्रों की न्यायपूर्ण मांगों को मानने के बजाए प्रशासन उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहा है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) संघर्षरत छात्रों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए प्रशासन से यथाशीघ्र छात्रों की मांग मानने की अपील करता है।
17 October 2018
'सड़ते -गलते समाज में ‘‘मी टू’’ अभियान'
“मी टू'' अभियान में इन दिन कई भारतीय हस्तियां बेनकाब हो रही है। फ़िल्मी कलाकारों से लेकर राजनेता आदि कई चर्चित नामो का खुलासा बीते दिनों में हुए। समाज ने एक बहस “मी टू" को लेकर चल रही है। इस पूरे मामले को छात्र-नौजवानों को कैसे देखना चाहिए इसे समझने के लिए नागरिक समाचार पत्र में छपा यह लेख बहुत उपयोगी है।
सड़ते-गलते पूंजीवादी समाज की एक ऐसी सच्चाई जिसे हर सामान्य, हर मजदूर-मेहनतकश स्त्री अपने रोज के अनुभव से जानती है, वह है उसके साथ होने वाला यौन दुर्व्यवहार। यह यौन दुर्व्यवहार सामान्य छेड़छाड़, फब्तियां कसने से लेकर वीभत्स गैंग रेप से आगे हत्या तक जाता है।
8 October 2018
28 September 2018
28 सितम्बर भगत सिंह के 111वें जन्म दिवस के अवसर पर
भगत सिंह को याद करो! फासीवादी ताकतों के खिलाफ संघर्ष तेज करो!!
साथियो, इस 28 सितम्बर को शहीद-ए-आजम भगत सिंह का 111वां जन्म दिवस है। भगत सिंह और उनके साथियों ने देशी-विदेशी शासकों से आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। भगत सिंह का सपना भूख-गरीबी-शोषण मुक्त समाजवादी भारत का सपना था। जिससे देशी-विदेशी दोनों ही शासक खौफ खाते थे। इसलिए अंग्रेजों ने उनके शरीर को फांसी पर लटकाया तो मरने के बाद आजाद भारत के शासकों ने उनके सपनों-विचारों की हत्या की। परंतु आज भी भूख-गरीबी-शोषण की मार सहता हुआ भारत हम नौजवानों से उन सपनों को पूरा करने की मांग कर रहा है।
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