8 April 2015

हाशिमपुरा हत्याकाण्डः 42 मुस्लिमों को किसी ने नहीं मारा

ये हमारा कहना नही। ये कहना है दिल्ली की निचली अदालत का। जिसने 1987 में मेरठ के मुस्लिम बहुल इलाके हाशिमपुरा में मारे गए 42 लोगों की हत्या के अभियुक्त बनाए गए सभी 16 PSC जवानों को बरी कर दिया है।
फैसले के बाद से न्याय की आस लगाए लोगों और मामले की हकीकत जानने वाले सभी लोगों की उम्मीदों को धक्का लगा है। तत्कालिन गाजीयाबाद के पुलिस अधिक्षक वी.एन.राय ने तो इस हत्याकाण्ड को उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में काला अध्याय कहा है।

7 April 2015

माफियाराज के खिलाफ एकजुट हुए ग्रामवासी


सोहनसिंह ढिल्लन और उसके पुत्र डी.पी. सिंह द्वारा 31 मार्च को मुनीष कुमार और प्रभात ध्यानी पर कराये गये हमले के विरोध में माफियाराज के खिलाफ 6 अप्रैल को एक महापंचायत वीरपुर लच्छी गांव में आयोजित की गयी। महापंचायत में दूर-दूर से आये ग्रामिणों, संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवियों द्वारा हिस्सेदारी की गयी। महापंचायत में लगभग 700 लोगों द्वारा भागीदारी कर संघर्ष के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। अस्वस्थ होने के बाबजूद प्रभात ध्यानी और मुनीष कुमार द्वारा महापंचायत में हिस्सेदारी की। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद प्रभात ध्यानी आराम करने के बजाए महापंचायत में शामिल हुए। ग्रामवासियों द्वारा उनका जोरदार स्वागत किया गया। 

1 April 2015

गुण्डों की गिरफतारी की मांग को लेकर रामनगर बाजार रहा बंद

दिनांक 31 मार्च को उत्तराखण्ड के रामनगर कस्बे की जनता का गुस्सा फूट पड़ा। इस गुस्से की वजह यहां सालों से मजदूर-मेहनतकश के हितों की आवाज उठाने वाले ‘नागरिक’ समाचार पत्र के सम्पादक मुनीष कुमार व उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी पर खनन माफियाओं द्वारा हमला करना था। यह हमला शासन-प्रशासन की शह पर किया गया था। इसलिए लोगों का गुस्सा शासन-प्रशासन के खिलाफ इतना ज्यादा कि उन्होंने मुनीष कुमार व प्रभात ध्यानी से मिलने आये एस.डी.एम. को बाहर से ही खदेड़ किया। अगले दिन 1 अप्रैल को रामनगर में मौजूद इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, आरडीएफ, उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी, देव भूमि व्यापार मण्डल व अन्य तमाम जनसंगठनों ने बाजार बंद का आहवान किया। 1 अप्रैल को रामनगर में बाजार बंद रहा। एक विशाल जुलूस निकाला गया और खनन माफिया और प्रशासन के गठजोड़ के खिलाफ नारे लगाये गये।

‘नागरिक’ अखबार के सम्पादक मुनीष कुमार और राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी पर जानलेवा हमले का विरोध करो

                 भू-माफिया शासन-प्रशासन गठजोड़ मुर्दाबाद!

 दिनांक 31 मार्च को उत्तराखण्ड के रामनगर कस्बे से 20 किमी दूर स्थित थारी गांव में ‘नागरिक’ पत्र के सम्पादक मुनीष कुमार व उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी पर ढिल्लन स्टोन क्रेशर के मालिक सोहन सिंह के गुण्ड़ों द्वारा हमला किया गया। ये दोनों ही लोग वीरपुर लच्छी गांव से लौट रहे थे। इन लोगों के मोबाइल व टेबलेट छीन लिये गये। हमले में प्रभात ध्यानी को सिर में गम्भीर चोटें लगीं हैं। उन्हें हल्द्वानी अस्पताल में भर्ती किया गया है। मुनीष कुमार के सिर पर हेलमेट पहने होने की वजह से कम चोटें लगीं।

24 March 2015

भगत सिंह की बात सुनो ! समाजवाद की राह चुनो !!

 .“.......निकट भविष्य में यह युद्ध अन्तिम रूप से लड़ा जाएगा और तब यह निर्णायक युद्ध होगा। साम्राज्यवाद एवं पूंजीवाद कुछ समय के मेहमान हैं। यही वह युद्ध है जिसमें हमने प्रत्यक्ष रूप में भाग लिया है। हम इसके लिए अपने पर गर्व करते हैं कि इस युद्ध को न तो हमने प्रारम्भ ही किया है न यह हमारे जीवन के साथ समाप्त ही होगा....”
                  (फांसी से 3 दिन पूर्व पंजाब के गवर्नर को लिखे पत्र का अंश)

10 January 2015

साथी दानवीर को श्रद्धांजली.....


     साथियो, हमें बेहद दुःख के साथ आप सभी को सूचित करना पड़ रहा है कि साथी दानवीर अब हमारे बीच नहीं रहे। 7 जनवरी की रात बरेली में उनकी असमय मृत्यु हो गयी। 1995 से ही अपने राजनीति जीवन के शुरुआती दिनों में वे परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) से जुड़कर क्रांतिकारी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे।

22 December 2014

साम्प्रदायिकता के खिलाफ जुलूस-प्रदर्शन

19 दिसम्बर काकोरी के शहीदों की शहादत दिवस के अवसर पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने रामलीला मैदान से जंतर-मंतर तक एक रैली निकाली तथा जंतर-मंतर पर साम्प्रदायिकता के खिलाफ एक सभा की।
    सभा को संबोधित करते हुए पछास के महेन्द्र ने कहा कि काकोरी के शहीद अशफाक और बिस्मिल साम्प्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल हैं। उन्होनें धर्म भेद भुलाकर एक साथ ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध करते हुए शहादत दी। लेकिन अशफाक-बिस्मिल-रोशन सिंह-राजेन्द्र नाथ लहिड़ी के देश में RSS-BJP जैसे संगठन साम्प्रदायिकता फैलाकर उनके विचारों को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

18 December 2014

साम्प्रदायिकता के खिलाफ जंतर-मंतर चलो

प्रिय साथी,
       साथी जैसा कि आपको मालूम है कि केन्द्र में बीजेपी सरकार बनने के बाद  से पूरे समाज में तेजी के साथ साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण किया जा रहा है।  साथ ही शिक्षा, संस्कृति आदि माध्यमों से भी समाज का भगवाकरण करने की साजिशें की जा रही हैं। 
      पूरी दुनिया की पूंजीवादी अर्थव्यवस्था आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। जिसके परिणाम स्वरूप पूंजीपति वर्ग अपने-अपने देशों में मेहनतकशों का खून निचोड़ने के लिए तेजी से आर्थिक नीतियों को लागू कर रहा है। जो जनता के  बडे विरोध-प्रदर्शनों को जन्म दे रहा है। इन विरोध-प्रर्दशनों को रोकने और व्यवस्था को बचाने के लिए पूंजीपति वर्ग तेजी से दक्षिणपंथी ताकतों के साथ गठजोड़ कर रहा है। इसका ही परिणाम है कि अधिकांश देशों के संसदीय चुनावों में दक्षिणपंथी ताकतें सत्ता में आयी हैं।

लालकुंआ(उत्तराखण्ड) में साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने वालों का विरोध करो। पछास व प्रमएके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करने वाले संघी गुंण्डों को गिरफतार करो।।


लालकुआँ (नैनीताल), उत्तराखण्ड:  10 दिसंबर को एक लड़का और लड़की के घर से चले जाने के की घटना को हिंदुत्ववादी संगठनों के सांप्रदायिक रंग देने की पूरी कोशिश की क्योंकि लड़का मुस्लिम था और लड़की हिंदु। लड़की के घर वालों ने लड़के पर अपहरण का केस दर्ज कराया जिसको पुलिस ने दर्ज कर लिया लेकिन लड़के के परिजनों द्वारा अपने लड़के की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने पर पुलिस ने गुमशुदगी भी दर्ज नहीं की। इसी बीच ऐसे मुद्दों की ताक में बैठे रहने वाले सांप्रदायिक संगठन (आर.एस.एस, बजरंग दल, भाजपा और एबीवीपी) अपने पूरे दम खम से इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने और मुस्लिमों के खिलाफ जहर उगलने में मशगूल हो गए। उन्होंने जुलूस निकालकर, कोतवाली का घेराव कर डीएम से मिलकर अपनी सक्रियता का प्रदर्शन किया।  इससे पूर्व लालकुंआ में ही 7 वर्षीय बालिका चंचल के गुम होने पर हमारे द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान निमंत्रण देने के बाद भी एक भी दिन संगठनों के नेताओं/कार्यकर्ताओं ने अपनी शक्ल तक भी नहीं दिखाई। असल में यही पाखंड ही इन का चरित्र है।

8 September 2014

प्रेम करने का जनवादी अधिकार और तथाकथित ‘लवजेहाद’


    आजकल पूरी ही संघ मण्डली ने मिलकर एक नया प्रपंच खड़ा किया है। राम मंदिर, राम-सेतु के बाद ये नया प्रपंच ‘लवजेहाद’ का है। उनका कहना है कि मुस्लिम लड़कों द्वारा हिन्दू लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनसे शादी कर जबरन उनका धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा है। मजेदार बात ये है कि खुद बीजेपी और संघ के कई नेताओं ने भी अंर्तधार्मिक विवाह किया है, पर बीजेपी की नजर में ये ‘लवजेहाद’ का हिस्सा नहीं है।