बीते 25 दिसंबर को BHU में मनुस्मृति दहन दिवस पर एक चर्चा का आयोजन भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा (BSM) द्वारा किया जाता है। लेकिन जैसे ही यूनिवर्सिटी प्रशासन को इसकी खबर लगती है, वो छात्रों पर हमलावर हो जाता है। उनके साथ जबरदस्ती मारपीट कर के इस कार्यक्रम को करने से रोकता है।
5 January 2025
25 December 2024
भगतसिंह पर हमले का विरोध करें!
कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इतिहासकार अपर्णा वैदिक और कारवां नाम से इतिहास संबंधी विषयों पर एक प्लेटफार्म चलाने वाले ईशान शर्मा ने शहीद ए आज़म भगत सिंह को लेकर अपमानजनक शब्दों का चयन किया। दर्शकों ने इस पर कठोर आपत्ति जताई, जिसके बाद इन्होंने "शब्दों के गलत चयन" की गलती मानी और माफी मांगी। आयोजक अतुल तिवारी ने भी इसके लिए माफी मांगी। परिवर्तनकामी छात्र संगठन शहीद भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों के अपमान की निंदा करता है, साथ ही ऐसी गलती का दोहराव न करने की अपील करता है।
27 November 2024
काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल
"खूं से ही हम शहीदों के, फौज बना देंगे!”
22 अक्टूबर, 1900 को शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक उल्ला खान को 19 दिसंबर, 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी दी गई। रामप्रसाद से मित्रता-प्रेमभाव ऐसा कि अशफाक-बिस्मिल का नाम एक साथ ही लिया जाता है। "दिलवाओ हमें फांसी ऐलान से कहते हैं/खूं से ही हम शहीदों के फौज बना देंगे।"
26 August 2024
15 दिन से भूख हड़ताल में बैठे JNU छात्र संघ के समर्थन में एकजुटता बयान!
2014 से देश की सत्ता पर काबिज मोदी सरकार और एकाधिकारी पूंजीपतियों का गठबंधन जनतांत्रिक मूल्यों पर लगातार हमलावर है। देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय पर संघ-भाजपा की तीखी नजर रही है। इन्होंने JNU को, वहां की जनपक्षधर संस्कृति को बदनाम करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सरकार लगातार नियोजित तरीके से जेएनयू पर हमलावर है। उसे ध्वस्त करने के लिए सारी तरकीबें अपना रही है। वहीं इसके खिलाफ छात्रों का संघर्ष भी जारी है।
24 August 2024
जनवाद की हत्या बंद करो!
PSF पर लगाया बैन वापस लो!
बीते 19 अगस्त को महाराष्ट्र के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने अपना एक तुगलकी फरमान जारी करते हुए। PSF नाम के एक वामपंथी छात्र संगठन को प्रतिबंधित कर दिया।
22 July 2024
बांग्लादेश के छात्रों का आरक्षण विरोधी संघर्ष
विगत 1 जुलाई को बांग्लादेश के ढाका उच्च न्यायालय के आदेश पर आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बहाल करने के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन शुरू हुए। 2018 में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के दबाव में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आरक्षण समाप्त कर दिया था। अदालत के रास्ते आरक्षण के पक्ष में फैसला आने से छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए। प्रदर्शनों का पुलिस ने आंसू गैस, लाठीचार्ज, गोली मारकर दमन किया। पुलिस के अलावा सेना का भी इस्तमाल किया गया है। देशव्यापी इंटरनेट सेवाएं बन्द की गई हैं। छात्रों के इस जुझारू संघर्ष में अब तक 115 लोगों के मारे जाने की खबर है। 21 जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने आरक्षण को सीमित करने का फैसला दिया। साथ ही छात्रों से विश्वविद्यालयों में जाकर पढ़ने की अपील की है।
21 June 2024
मोदी सरकार का नया कीर्तिमान NEET पेपर लीक के बाद अब UGC NET की परीक्षा रद्द!
लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ आवाज बुलंद करो।
मोदी सरकार और UGC की सबसे प्रिय एजेंसी "NTA" नित नए कीर्तिमान स्थापित करती जा रही है। NEET एग्जाम में पेपर लीक और धांधलियों को सरकार अब तक झुठला ही रही थी कि इधर UCG NET की परीक्षा रद्द कर दी गई है।
8 June 2024
NEET (UG) 2024 के परिणामों के बाद, एक बार फिर मेडिकल छात्रों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हैं!
इस बार NEET के परिणाम घोषित करने के लिए NTA ने 14 जून की तारीख घोषित की थी, लेकिन अचानक से इन्हें 4 जून को (लोकसभा चुनाव परिणामों की चर्चा के बीच) घोषित कर दिया गया। NTA द्वारा आयोजित कराए जाने वाली तमाम परीक्षाओं पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार के परिणामों में NTA ने खुलेआम धांधली की सारी हदें तक पार कर दी हैं।
26 April 2024
अमेरिकी विश्वविद्यालयों के छात्रों को सलाम!
पिछले कई दिनों से अमेरिका में एक के बाद एक विश्वविद्यालयों में छात्रों के प्रदर्शन हो रहे हैं। लगभग 25 विश्वविद्यालय के छात्र अपने कैंपस में प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन फिलिस्तीन पर जारी नरसंहार के खिलाफ हैं। छात्रों की मांग है कि यह नरसंहार तुरंत रोका जाय।
8 April 2024
लोकसभा चुनाव के मौके पर छात्रों-नौजवानों का मांग पत्र
साथियो,
पूरे देश में चुनावी माहौल गर्म हो चुका है। नेतागण वायदों-जुमलों-गारंटियों की घोषणायें कर जनता को लुभाने में मगन हैं।
इन चुनावों में हमारे सामने एक ओर पिछले 10 वर्षों से सत्ता में बैठी भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन सरकार है। जो तमाम सारे वायदे कर सत्ता में आई थी। लेकिन सत्ता में आने के बाद इस सरकार ने इसके एकदम उलट ही काम किया है। हम देख सकते हैं देश भर में छात्र-नौजवान, मजदूर-किसान, महिलाएं, छोटे व्यापारी, कर्मचारी आदि सभी वर्ग-तबके इस सरकार की नीतियों का दंश झेल रहे हैं। बढ़ती बेरोजगारी ने हम छात्र-युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना दिया है। वहीं श्रम कानूनों पर हुये हमले ने मज़दूरों के काम के हालात और कठिन बना दिये हैं। इसी सरकार के कार्यकाल में किसानों के ऊपर काले कानून लाद दिए गए। किसानों के लंबे संघर्ष और 700 से अधिक बलिदानों के बाद यह सरकार कानून वापस करने को मजबूर हुई। एक ओर मोदी सरकार 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का नारा देती है तो दूसरी ओर आईआईटी बीएचयू में छात्रा के साथ बलात्कार में भाजपा आईटी सेल के कार्यकर्ता संलिप्त होते है। इनका नारी विरोधी चरित्र महिला कुश्ती पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपी भाजपा सांसद ब्रजभूषण सिंह को बचाने व पुलिस द्वारा महिला पहलवानों के साथ किये दुर्व्यवहार के रूप में दिखा। महंगाई, गरीबी से आमजन के हालत बेहाल है। दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों पर इस सरकार में हमले बढ़ें हैं।
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