8 March 2013

8 मार्च अन्तर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के अवसर पर



 इंकलाब ज़िन्दाबाद!                                                                                                                                          समाजवाद ज़िन्दाबाद!!
                         8 मार्च अन्तर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के अवसर पर
       पुरूष प्रधान मूल्य-मान्यताओं और नारी विरोधी उपभोक्तावादी संस्कृति पर धावा बोलो!
              अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस की क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ाओं!!
                कामगार बहिनों और भाइयों! भारत में महिलाओं को कितनी बेखौफ आज़ादी और सुरक्षा हासिल है, राजधानी दिल्ली में पैरामेडिकल की छात्रा दामिनी के साथ हुये सामूहिक बलात्कार की दर्दनाक घटना इसका प्रतीक उदाहरण है। कार्यस्थलों से लेकर घर के भीतर तक महिलायें असुरक्षित हैं। यहां तक कि कोख में भी बच्चियां असुरक्षित हैं।

22 February 2013

आम हड़ताल के समर्थन में छात्र-नौजवान भी आगे आयंे!

आम हड़ताल के समर्थन में छात्र-नौजवान भी आगे आयंे!

आज और कल (20 व 21 फरवरी) देष की 11 टेड यूनियन केंद्रों ने आम हड़ताल का आह्वान किया है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन इस आम हड़ताल का पूरा समर्थन करता है। साथ  ही हम विभिन्न छात्र संगठनों व छात्र समुदाय से अपील करते हैं कि वह इस हड़ताल में मजदूरों-कर्मचारियों के समर्थन में छात्र हड़ताल का आयोजन करें।

हड़ताल के दौरान हिंसा के लिए सरकार जिम्मेदार

हड़ताल के दौरान हिंसा के लिए सरकार जिम्मेदार
दो दिवसीय राष्टव्यापी हड़ताल के पहले दिन ही देश के कई शहरों में हिंसक झड़पों की घटनाएं हुई। अंबाला में रोडवेज यूनियन के एक नेता की इस दौरान हत्या भी कर दी गई। मेरठ में भी एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किये जाने की सूचना आ रही है। इसके अलावा कई अन्य घटनाओं में भी बहुत से लोग ज़ख्मी हुए हैं। सरकार व उसका चाटूकार मीडिया इस हिंसा का सारा दोष यूनियन नेतृत्व व मजदूरों-कर्मचारियों पर डाल रहा है। जबकि यह सत्य नहीं है।

3 December 2012

क्रांतिकारी छात्र संघों के लिए संघर्ष करो! छात्र राजनीति में पसरी गुण्डागर्दी के विरुद्ध एकजुट हो!!

इंकलाब जिंदाबाद                                                  समाजवाद जिंदाबाद

साथियो,
    छात्र संघ चुनाव का माहौल अपने पूरे चरम पर है। परिसर होर्डिंग, बैनरों, पोस्टरों, चेस्ट कार्ड, आदि से पटे हुए हैं। परिसर में प्रत्याशी अपने समर्थकों के झुण्डों के साथ घूम-घूमकर वोट की अपील कर रहे हैं। शहर में यही समर्थक मोटरसाइकिलों पर बैठ उन्मादी शोर मचाते हुए गुजरते देखे जा सकते हैं। यह माहौल भले ही हममें से अधिकांश को पसंद न हो, लेकिन आज यही छात्र संघ चुनावों का प्रतीक बन चुका है। साल दर साल यही कहानी दोहरायी जा रही  है। साथ ही दोहरायी जा रही है, इस दौरान होने वाली गुण्डागर्दी। राजधानी देहरादून से लेकर कोटद्वार, ऋषिकेश, रामनगर व अन्य परिसरों में भी एक के बाद एक झगड़े हुए।

28 October 2012

उत्तराखण्ड व देश में पुलिस राज कायम किए जाने का विरोध करो


29 अक्टूबर को देहरादून चलो!!

                14-15 अक्टूबर 2012 को हरिद्वार में इंकलाबी मजदूर केन्द्र का तीसरा सम्मेलन आयोजित हो रहा था। यह सम्मेलन उत्तराखण्ड की सरकार और हरिद्वार के पूंजीपतियों के पूंजीपतियों की आंखों में गड़ रहा था। वे बेचैन और परेशान थे कि मजदूरों का एक ऐसा सम्मेलन ठीक उनकी नाक के नीचे हो रहा है जिसे रोकने के लिए वे कुछ कर नहीं पा रहे हैं। इसे रोकने के लिए वे षड्यंत्र रच रहे थे। परंतु इसमें वे असफल हो गए।

23 August 2012

                        लालकुआ में धरना देते पछास सदस्य 

24 November 2011

हम मिश्र में सैनिक तानाशाही के खिलाफ चल रहे आंदोलन का पुरजोर समर्थन करते हैं

मिश्र के नौजवान एक बार फिर तहरीर चौक पर एकत्रित हो चुके हैं। इस बार उनके निशाने पर सैनिक तानाशाही है। पिछले पांच दिनों से सैनिक सरकार और विरोधियों के बीच जबरदस्त संघर्ष चल रहा है। सैनिक सरकार का मुखिया तंतवई विरोधियों के दमन पर उतरा हुआ है। अब तक पुलिस की गोलीबारी में दो दर्जन से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन विरोधी जनता इस दमन के बावजूद घबरा नहीं रही है। उनके इरादे काफी मजबूत हैं।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन मिश्र के बहादुर नौजवानों के इस संघर्ष में उनके साथ पूरी तरह से खड़ा है। हम तंतवई सरकार के द्वारा जनता के दमन का घोर विरोध करते हैं। मुबारक सरकार के पतन के बाद से ही तंतवई सरकार की कोशिश है कि मिश्र पर सेना का शिकंजा कमज़ोर न पड़ने पाए। इस षड़यंत्र में उसे अमेरिकी साम्राज्यवादियों का भी समर्थन मिल रहा है। मिश्र की जनता आज किसी भी ढंग का सैनिक शासन नहीं चाहती है। उसे भरोसा नहीं है कि तंतवई सरकार आगामी चुनावों में कोई वास्तविक जनतांत्रिक सरकार बनने देगी, इसीलिए जनता चाहती है कि चुनाव से पहले तंतवई सरकार खुद को बर्खास्त करके सत्ता किसी जनवादी निकाय को सौंपे।
पछास मानता है कि मिश्र की जनता की यह मांग जायज़ है। हम इस मांग का समर्थन करते हैं। हमें भरोसा है कि इस बार मिश्र की जनता बिना ठोस नीजे के तहरीत चौक नहीं छोड़ेगी। हम भारत के सभी छात्रों-नौजवानों का आह्वान करते हैं कि वे मिश्र की जनता के साथ अपनी मजबूत एकजुटता दिखाएं।
इंकलाब जिंदाबाद!
द्वारा-
अध्यक्ष
परिवर्तनकामी छात्र संगठन

6 November 2011

हरिद्वार गायत्री महाकुंभ में भगदड़ की घटना

6 नवंबर 2011/ हरिद्वार: 6 नवंबर से यहां शांतिकुंज ट्रस्ट की तरफ से श्री राम शर्मा की जन्मशताब्दी के मौके पर गायत्री महाकुंभ का आयोजन चल रहा था। इस आयोजन के दौरान कल भगदड़ मच गई जिसमें अखबारों के अनुसार बीस लोग मारे गए और सैकड़ों लोग घायल हो गए। परिवर्तनकामी छात्र संगठन इस दुखद परिघटना पर अपनी शोक संवेदना प्रकट करता है और साथ ही मृतकों के परिजनों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करता है।
धार्मिक आयोजन के दौरान इस तरह की दुर्घटना कोई पहली नहीं है। इससे पहले भी पिछले कुछ सालों में सैकड़ों लोगों की जानें ऐसी दुर्घटनाओं के दौरान जा चुकी हैं। 2010 के महाकुंभ में मची भगदड़ में भी सैकड़ों लोग मारे गए थे। हालांकि सरकार ने मृतकों की संख्या को काफी कम करके बताया। हमारा मानना है कि कल की दुर्घटना के लिए आयोजकों तथा स्थानीय अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए। साथ ही में मृतकों और घायलों को तुरंत उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
गौरतलब हो कि जिस समय यह घटना हुई उस समय आयोजन में शिरकत करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री समेत की मंत्री और बड़े अधिकारी वहां मौजूद थे। यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी भी वहां पर मौजूद थे। गडकरी ने पत्रकारों द्वारा उच्च स्तरीय जांच की बात कहने पर, उन्हें झिड़क दिया।
भाजपा, आरएसएस के अलावा सभी पार्टियों के नेता अपने वोट बैंक की खातिर पांड्या जैसे बाबा महात्माओं के साथ चिपके रहते हैं। उनकी गलत कारगुजारियों में उनकी मदद करते हैं। इस मामले में शासन-प्रशासन की लापरवाही का इससे बड़ा नमूना क्या होगा कि इतने बड़े आयोजन की, जिसमें लाखों लोग शामिल थे, सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस के बजाय संस्था के स्वयंसेवकों के हाथ में थी। ये स्वयंसेवक ऐसे किसी आयोजन में आने वाली दिक्कतों के लिए प्रशिक्षित नहीं थे। अब इस लापरवाही के लिए सरकार के अलावा और कौन दोषी है ?
परिवर्तनकामी छात्र संगठन बाबा महात्माओं के बीच ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने की प्रतियोगिता की भी सख्त आलोचना करता है। सरकार द्वारा इस पोंगापंथी को बढ़ावा दिए जाने का भी हम विरोध करते हैं। हम सभी प्रगतिशील क्रांतिकारी विचारों के लोगों से अपील करते हैं कि वे इस तरह की पोंगापंथी विचारों के प्रचार-प्रसार का खुलकर विरोध करें और साथ ही इस बात को बी समझें की साल दर साल ऐसे आयोजन में मरने वालों की मौत के लिए भी ये ही लोग जिम्मेदार हैं।
इंकलाब जिंदाबाद!
द्वारा-
अध्यक्ष
परिवर्तनकामी छात्र संगठन