लालकुआँ (नैनीताल), उत्तराखण्ड: 10 दिसंबर को एक लड़का और लड़की के घर से चले जाने के की घटना को हिंदुत्ववादी संगठनों के सांप्रदायिक रंग देने की पूरी कोशिश की क्योंकि लड़का मुस्लिम था और लड़की हिंदु। लड़की के घर वालों ने लड़के पर अपहरण का केस दर्ज कराया जिसको पुलिस ने दर्ज कर लिया लेकिन लड़के के परिजनों द्वारा अपने लड़के की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने पर पुलिस ने गुमशुदगी भी दर्ज नहीं की। इसी बीच ऐसे मुद्दों की ताक में बैठे रहने वाले सांप्रदायिक संगठन (आर.एस.एस, बजरंग दल, भाजपा और एबीवीपी) अपने पूरे दम खम से इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने और मुस्लिमों के खिलाफ जहर उगलने में मशगूल हो गए। उन्होंने जुलूस निकालकर, कोतवाली का घेराव कर डीएम से मिलकर अपनी सक्रियता का प्रदर्शन किया। इससे पूर्व लालकुंआ में ही 7 वर्षीय बालिका चंचल के गुम होने पर हमारे द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान निमंत्रण देने के बाद भी एक भी दिन संगठनों के नेताओं/कार्यकर्ताओं ने अपनी शक्ल तक भी नहीं दिखाई। असल में यही पाखंड ही इन का चरित्र है।