ये 32 वर्षीय राजीव सुसाइड नोट के अंतिम शब्द हैं। जिसने इलाहाबाद में बेरोजगारी के चक्र में फँसकर आत्महत्या का रास्ता चुना। राजीव ने पीसीएस इंटरव्यू में असफल होने के बाद ये कदम उठाया। इसके जैसे हज़ारों बेबस मज़दूर, किसान, छात्र तथा नौजवान रोज ऐसे ही मौत को गले लगा ले रहे हैं।
14 September 2020
योगी सरकार का नया फैसला देश के युवाओं के साथ धोखा है!
भारत आज बेरोजगारी के चरम दौर से गुजर रहा है। देश का युवा रोजगार को तरस रहा है। वो हताश, निराश, बेबस है। रोज हताश बेरोजगारों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हों। ऐसे में उन्हें रोजगार देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के बजाए यूपी की योगी सरकार एक युवा विरोधी फैसला लागू करने जा रही है। प्रदेश की सरकार एक नया बिल कैबिनेट के समक्ष पेश करने जा रही है। इस बिल के अनुसार समूह ख और ग के तहत भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों को 5 साल के लिए संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के तौर पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित रखा जायेगा।
11 September 2020
नशे के खिलाफ जुझारू आंदोलन और पूंजीवादी व्यवस्था
कच्ची शराब व अवैध नशों के खिलाफ आंदोलन
लालकुआं (नैनीताल) उत्तराखंड के बिन्दुखत्ता गांव में पिछले माह के 1 अगस्त से ग्रामीण व जनसंगठन कच्ची शराब, चरस, स्मैक, अफीम, ड्रग आदि अवैध नशों के खिलाफ संघर्षरत हैं। यह आंदोलन एक गांव की सफलता के बाद दूसरे, तीसरे गांव में फैलता चला जा रहा है।
4 September 2020
नौजवानों-किसानों को मौत बांटती पूंजीवादी व्यवस्था
एन आर सी बी के आंकड़े
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन सी आर बी) देश में हत्या दुर्घटना, आत्महत्या, सहित अपराध के आंकड़े जारी करने वाली सरकारी संस्था है। 2 सितंबर 2020 को इसने वर्ष 2019 में दुर्घटना और आत्महत्या के आंकड़े पेश किए। जिसमें बताया गया कि 2018 में 1,34,516 आत्महत्या की घटनाएं हुई और 2019 में 3.4% की बढ़ोतरी के साथ यहां आंकड़ा 1,39,123 हो गया। विकास के दावों और "सब चंगा सी" के बीच आत्महत्या के मामले अपनी कहानी आप ही बयां करते हैं।
22 August 2020
बेरोजगारों के लिए नया झुनझुना भर है NRA और CET
2020 के बजट में सरकार ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी (NRA) के गठन के बारे में बताया था। जिसको 19 अगस्त 2020 को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। NRA विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CRT) करवाएगा। मंत्रिमंडल से मंजूरी के बाद प्रधानमंत्री से लेकर विभिन्न मंत्रियों ने दावा किया है कि इससे रोजगार मिलने में मदद मिलेगी।

13 August 2020
गोवा में भाजपा सरकार ने IIT को आवंटित जगह का एक हिस्सा मंदिर को सौंपा
गोवा में IIT स्थापित करने की योजना के तहत 10 लाख वर्ग मीटर जमीन दिये जाने की जुलाई में सरकार द्वारा घोषणा की गयी थी। गोवा के गुलेली गांव में यह जमीन आवंटित भी कर दी गई। स्थानीय लोगों ने जमीन दिये जाने का विरोध किया। जिस पर केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद सरकार का कहना है कि स्थानीय लोगों के विरोध के कारण 45,000 वर्ग मीटर जमीन धार्मिक कार्यों के लिए दे दी जायेगी। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा- 'हमने 45,000 वर्ग मीटर जमीन मंदिर के लिये चिन्हित की है। उनका ध्यान भटकेगा और अंतिम योजना से दूर रहेंगे...... यह गांव वालों के फायदे और विरोध को शांत करने के लिए किया गया। यह गांव वालों के भले में है।'
आज आधुनिक समाज में कोई साधारण सा व्यक्ति भी मंदिर और IIT में से IIT को ही अधिक महत्व देगा। पर सरकार क्या कहती है- 'मंदिर लोगों के हित में है।' साफ है कि आज संघी फासीवादी सरकार के लिए शिक्षा के बजाय मंदिर बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। जमीनों को उद्योगपतियों और औद्योगिक क्षेत्र के लिए तो सरकार जबरन आवंटित कर देती है। गांव के गांव उजाड़ दिये जाते हैं पर IIT के लिए जमीन का विरोध होने पर जमीन मंदिर को आवंटित कर दी गयी। जुलाई में कई गयी घोषणा अगस्त में वापस ले ली जाती है। शिक्षा से समझौता किया जाएगा पर मंदिर से नहीं। अगर कुछ लोग किसी वजह से विरोध कर भी रहे थे तो क्या उन्हें इस बारे में शिक्षित कर, उनके बीच आईआईटी की जरूरत का प्रचार कर उनको मनाया नहीं जा सकता था बिलकुल मनाया जा सकता था परन्तु भाजपा सरकार जिसका पूरा जीवन तन्त्र मंदिर की राजनीति से चलता हो उससे इस तरह के कदम उठाए जाने की उम्मीद करना बेईमानी ही है।
और ये सब कोरोना काल में हो रहा है जिसने पूरे समाज में मजबूती से यह साबित किया है कि सामान्य समय के अलावा इस संकट के समय भी शिक्षा, उच्च शिक्षा, शोध, आदि ही अधिक जरूरी हैं।
संघी फासीवादियों का यही नजरिया है कि ज्ञान-विज्ञान के विकास के बजाय अज्ञान-अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जाए। इस कूपमंडूकता में ही ये पूरे देश और समाज को धकेलना चाहते हैं। निश्चित ही छात्रों-नौजवानों को इसका जवाब ज्ञान-विज्ञान, प्रगति और क्रांति के विचारों से देना होगा। यही आज समय की मांग है।
क्रांतिकारी अभिवादन सहित
परिवर्तनकामी छात्र संगठन
(पछास)
31 July 2020
नई शिक्षा नीति : पूंजीपतियों के हितों के मुताबिक शिक्षा में बदलाव की कोशिश
नई शिक्षा नीति (न्यू एजुकेशन पॉलिसी - नेप) के मसौदे को शिक्षा मंत्रालय और केन्द्र सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। इसी के साथ ही सत्ताधारी पार्टी के नेताओं द्वारा एक-दूसरे को बधाई देने और सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री को धन्यवाद देने का दौर शुरू हो गया। नई शिक्षा नीति में शिक्षा में व्यापक बदलाव करने की अनुशंसा सरकार से की गई है। हालांकि प्राथमिक शिक्षा में थोड़े बहुत बदलावों/सुधारों की बातें हैं लेकिन उच्च शिक्षा, तकनीकि और पेशेवर शिक्षा में व्यापक बदलाव की बातें की गयी हैं। एक तरह से अभी तक चली आ रही उच्च शिक्षा के रूप और अंतर्वस्तु दोनों को ही बदलने की बातें हैं।
1 July 2020
जनता को लूटकर अपना खजाना भरती सरकारें
पिछली 7 जून 2020 से भारत में तेल की खुदरा कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी जारी है। 7 जून से देश में डीज़ल के दामों में लगातार 21 दिन तक वृद्धि हुई तथा इन 21 दिनों में पेट्रोल के दाम भी 20 बार बढ़े। दिल्ली में इन दिनों में पेट्रोल के दाम 9.17 रुपये बढ़कर 80.38 रुपये तो डीजल के दाम 11.23 रुपये बढ़कर 80.40 रुपये हो गए। वहीं मुम्बई में पेट्रोल के दाम 87.14 रूपये व डीजल के दाम 78.71 रूपये हो गए। सब कुछ 'ऐतिहासिक' करने वाली मोदी सरकार के काल में तेल की खुदरा कीमतें भी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गयी। तेल के दामों में यह भारी वृद्धि तब हुयी है जब कोरोना महामारी के चलते विश्व में तेल की मांग में गिरावट आने के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी ज्यादा गिर गए।
26 June 2020
लचर सरकारी स्वास्थ्य तन्त्र, आलीशान निजी अस्पताल और कोरोना के खिलाफ जंग
कोरोना महामारी की शुरुआत दुनिया भर में दिसंबर के समय चीन से हो चुकी थी। उस समय भारत सरकार का रुख उदासीनता भरा था। यहां तक की 30 जनवरी को भारत में कोरोना का पहला मरीज मिलने के बावजूद सरकार के रुख में कोई गंभीरता नहीं आई। पहला लॉकडाउन लगाए जाने तक सरकार ने फरवरी-मार्च के माह तक भी कोई विशेष तैयारी नहीं की थी। इस दौरान चर्चाएं चीन को महामारी से होने वाले नुकसान का फायदा भारतीय उद्योग व अर्थव्यवस्था को मिलने के कयास लगाए जा रहे थे, ट्रंप के स्वागत में भीड़भाड़ भरे भव्य कार्यक्रम, मध्यप्रदेश में सरकार बनाने बिगाड़ने का खेल, विदेश से आने वाले लोगों पर भी कोई रोक या समुचित जांच न करना, आदि सरकार की मुख्य हरकतें थी। इस बीच कोरोना के बारे में खतरनाक तरीके से अंधविश्वासों और कूपमंडूकता भरी बातों ने जगह पाई। गाय के गोबर, गोमूत्र, हल्दी, लहसुन, अदरक, गिलोय, आदि से कोरोना के इलाज के दावे किए जाने लगे। मांसाहार को कोरोना का कारण गिनाया जाने लगा। लेकिन वक्त के साथ संकट (कोरोना) के अधिकाधिक वास्तविक होते जाने के बाद अंधविश्वास और कूपमंडूकता भरी बातें कमजोर तो हुईं, पर सरकार से लेकर मीडिया तक ने उनके लिए जगह बचाये रखी।
22 June 2020
अन्धराष्ट्रवाद, युद्धोन्माद- मुर्दाबाद!
बीते कई दिनों से भारत-चीन सीमा पर पैदा हुआ सीमा विवाद कई सैनिकों की मृत्यु का कारण बना। 20 भारतीय सैनिक इस विवाद की भेट चढ़े, तो दूसरी तरफ चीन ने अपने हताहत व घायल सैनिकों की कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की है। हालांकि लगभग 40 चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर भारत के मीडिया व सोशल मीडिया में चल रही हैं।
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