13 December 2019

'सीएबी' संघी फासीवादियों का नया विभाजनकारी एजेण्डा

        ‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ (सीएबी) लोक सभा और राज्य सभा दोनों में पास हो गया है। इस विधेयक के जरिये भाजपा ने अपने घोर सांप्रदायिक चरित्र को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस विधेयक में धर्म को आधार मानकर नागरिकता देने का प्रबंध भाजपा की सरकार ने कर दिया है। इसके जरिये भाजपा ‘हिन्दू राष्ट्र’ के अपने फासीवादी एजेण्डे को लागू कर रही है। लंबे समय से संघ और भाजपा अपने हिन्दू राष्ट्र का सपना पाले हुए थे। अब वे इसे तेजी से जमीन पर उतारने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। यह विधेयक इसी उद्देश्य से प्रेरित है।

यौन हिंसा एनकाउण्टर और हमारा समाज

       27 नवम्बर हैदराबाद में 26 वर्षीय वेटनरी डॉक्टर की गैंग रेप कर नृशंस हत्या कर दी गयी। समाज में महिलाअें के खिलाफ हो रहे ऐसे नृशंस अपराधों में क्षुब्ध व आक्रोशित तमाम लोगों द्वारा हैदराबाद सहित पूरे देश में ढेरों प्रदर्शन किये गये। रोज ब रोज महिलाओं के साथ आपराधिक घटनायें हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है। घृणित पूंजीवादी व्यवस्था महिलाओं को सुरक्षा व बराबरी देने में सर्वथा अक्षम रही है। या ज्यादा सही कहें तो यह पूंजीवादी व्यवस्था ही मुख्यतः, मूलतः ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार है। यह व्यवस्था पुरुषप्रधानता की सोच को बनाये हुए है। अश्लील उपभोक्तावादी संस्कृति को पाल-पोस रही है और समाज में कुण्ठित-विकृत मानसिकता के लोगों को पैदा कर रही है। 

2 December 2019

तुम तो हम जैसे ही निकले अब तक कहां छुपे थे भाई! वो मूरखता-वो घामड़पन जिसमें हमने सदी गंवाई !!

   


        कुछ सालों पहले पाकिस्तान की मशहूर मानव अधिकार कार्यकर्ता फहमीदा रियाज ने उक्त पंक्तियां भारत के हाल को देखते हुए लिखी थी। इस कविता के माध्यम से वो बता रही थी कि भारत का हाल भी पाकिस्तान की तरह ही होता जा रहा है। अभी 1 साल पहले ही उनका देहांत हुआ है।

20 November 2019

फीस वृद्धि के हमलों का बहादुरी से सामना करते छात्र


         छात्रों का बहादुराना संघर्ष जिंदाबाद !

         जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र पिछले कई दिनों से फीसवृद्धि का विरोध कर रहे हैं। सरकार द्वारा बोले गये इस बड़े हमले का विरोध जरूरी था। छात्रों के बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन करने और फीसवृद्धि वापस करने की मांग को कुलपति ने अनसुना कर दिया। कान में तेल डाले और आंखों पर काली पटटी बांधे जेएनयू कुलपति संघी सरकार के कुशल स्वंयसेवक का रोल अदा करते हुए अड़ियल रुख पर कायम हैं। वकीलों से झगड़ा होने पर न्याय की गुहार लगाने वाली दिल्ली पुलिस छात्रों से बर्बरता से निपट रही है। दिल्ली पुलिस ने सरकार के इशारे पर जेएनयू छात्रों का सिर फोड़ा और उनके कपड़े खून से रंग दिये। उनको सड़कों पर घसीटा और जेलों में कैद कर दिया। इतने जुल्मों सितम के बाद भी जेएनयू के छात्र बहादुरी के साथ मैदान में डटे हैं। वे सरकार के शिक्षा को महंगा करने और शिक्षा के निजीकरण की इस मुहिम के सामने लोहे की दीवार की तरह खड़े हैं।

13 July 2019

रेलवे के निजीकरण का पुरजोर विरोध करें

                     दुबारा सत्ता संभालते ही मोदी सरकार ने जनविरोधी फैसलों की झड़ी लगा दी है। ऐसा ही फैसला रेलवे के निजीकरण की रफ्तार को बढ़ाना है। इसका रेलवे कर्मचारियों सहित कई लोगों ने विरोध किया है।

           रेलवे का निजीकरण टुकड़ों-टुकड़ों में पिछले तीन दशक से जारी है। इस प्रक्रिया को तेजी से आर्थिक सुधार लागू करने के अपने एजेण्डे के तहत मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में काफी तेजी ला दी। अब सत्ता संभालते ही इसकी गति और तेज कर दी गयी है।

19 June 2019

बिहार में बच्चों की मौत

मानव विरोधी पूंजीवादी व्यवस्था की भेंट चढ़ते मासूम बच्चे
     
       परिवर्तनकामी छात्र संगठन बिहार में दिमागी बुखार से मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। दुख की इस घड़ी में परिवर्तनकामी छात्र संगठन शोकाकुल परिजनों के साथ है।
       

           बिहार के मुजफ्फरपुर व आस-पास के इलाकों में दिमागी बुखार "(चमकी बुखार)" से अब तक 138 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत का सिलसिला अभी जारी है।

8 June 2019

फर्जी डिग्री का एक और मानव संसाधन विकास मंत्री

                मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल की मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी थीं। इन दोनों शख्सियतों में एक समानता रही। वह समानता है डिग्रियों के फर्जी होने की। रमेश पोखरियाल अपने नाम के आगे डाॅ. लगाते हैं। यह पदवी पेशे से डाॅक्टर या पी.एच.डी. किया हुआ कोई व्यक्ति ही उपयोग करता है।

                रमेश पोखरियाल को श्रीलंका स्थित ओपन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ने डी.लिट. की मानद उपाधी दी। मानद उपाधी प्राप्त कोई व्यक्ति भी अपने नाम के आगे डाॅ. पदवी लगा सकता है। परन्तु जब इस पर जांच की गयी तो श्रीलंका के यूजीसी से पता चला कि श्रीलंका में इस नाम से कोई भी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट पंजीकृत नहीं है।

26 May 2019

एकाधिकारी पूंजी की चाहत मोदी तो ताज भी मोदी के सर


                  देश में हुए लोक सभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। इन चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला और वह एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है। यह चुनाव पूरी तरह मोदी के नाम पर लड़ा गया। चुनाव की जीत को मोदी-शाह की जीत के रूप में कहा जा रहा है। मोदी के ‘‘करिश्मे’’ और अमित शाह के कुशल चुनावी मैनेजमैन्ट के बगैर चुनाव के यह परिणाम नहीं आते। जो कि किसी हद तक सही भी है। किन्तु यह चुनाव और कई सारी वजहों से भी जीता गया। इन वहजों में सबसे प्रमुख है भारत के एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग यानी अम्बानी-टाटा-बिड़ला का अपने खजाने का मुंह मोदी-भाजपा के लिये खोलना, उसके पैसे से चलने वाले मीडिया के द्वारा पूरा माहौल बनाना और इसके साथ हिन्दू फासीवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के देश भर में फैले संगठनों, कार्यकर्ताओं व सर्मथकों का मकड़जाल। वित्तीय पूंजी औऱ हिन्दू फासीवाद के गठजोड़ ने फिर से मोदी सरकार बनवा दी।

सूरत अग्निकांड

यह कोई हादसा नहीं हत्याएं हैं !! सत्ता धारियों को जवाब देना होगा !!



              परिवर्तनकामी छात्र संगठन 24 मई को सूरत में अग्निकांड में मारे गए छात्र-छात्राओं को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। दुख की इस घड़ी में परिवर्तनकामी छात्र संगठन शोकाकुल परिवार जनों के साथ है।

27 January 2019

इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट की गिरफ्तारी का विरोध करो !


        26 जनवरी जिस दिन भारतीय शासक वर्ग अपने महान गणतंत्र का जश्न मनाता है और आजादी, समानता का ढोल पीटता है। उसी दिन भारतीय शासक वर्ग और भारतीय पूंजीपति अपने गणतंत्र, जनवादी अधिकारों की महानता का बखान करते नहीं थकता। ठीक उसी दिन 26 जनवरी को उधम सिंह नगर (उत्तराखण्ड) की पुलिस कायराना तरीके से इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भट्ट को गिरफ्तार कर लेती है।