13 September 2015

साम्राज्यवादी कुकर्मों के कारण दर-दर भटकते लोग

      सीरिया से बड़े पैमाने पर लोग अपना घर-बार छोड़कर दर-दर भटक रहे हैं।ये सभी यूरोपीय देशों में शरण लेने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। असुरक्षित यात्रा में कई लोग भूख-प्यास से भी मर जा रहे हैं। बीबीसी के अनुसार इस वर्ष 3 लाख 40 हजार लोग अपना वतन छोड़कर शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं। सीरियाई लोगों का दर्द देखकर यूरोपीय देशों के नागरिकों ने उनका साथ देने के लिए प्रदर्शन किये। इसके बावजूद पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासक शरणार्थियों को अनचाहा बोझ समझकर तरह-तरह के बहाने बनाकर इसे रोकना चाहते हैं। हंगरी ने तो शरणार्थियों को रोकने के लिए तार-बाड़ खड़ी कर दी है। साम्राज्यवादी आईएसआईएस की उनके देश में घुसपैठ का बहाना बनाकर शरणार्थियों को शरण देने में अडंगे लगा रहा है। इस सबके बावजूद एक दिन भी ऐसा नहीं गया जबकि पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासकों ने मानवता के नाम पर झूठे आंसू ना बहाये हों।

4 September 2015

बदलाव लाने में अक्षम यह लोक लुभावन फैसला

        इलाहबाद उच्च न्यायलय ने 18 अगस्त 2015 को बेहद ‘लोकप्रिय’ फैसला सुनाया। यह फैसला कहता है कि सभी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, जज, जनप्रतिनिधि अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ायेंगे। न्यायलय के इस फैसले के बाद तमाम बुद्धिजीवी बेहद खुश नजर आ रहे हैं। वे इसे सरकारी स्कूलों के हालात में सुधार व पैसे के आधार पर शिक्षा में भेदभाव की समाप्ति के तौर पर देख रहे हैं।

3 September 2015

प्रो. एम.एम. कुलबर्गी की हत्या का विरोध करो!

        प्रो0 एम0एम0 कुलबर्गी को तर्कपरकता और धार्मिक अंधविश्वास का विरोध करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। प्रो0 कुलबर्गी हम्पी यूनिवर्सिटी के पूर्व वायस चांसलर (कुलपति) थेे और अपने लेखों व लिखी किताबों के द्वारा धार्मिक पोंगापंथ का विरोध करने का काम करते रहे थे। उनकी 30 अगस्त को उनके घर पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गयी। अपने काम के कारण उनको लंबे समय से हिन्दू फासीवादी संगठनों द्वारा आलोचना व धमकी का शिकार होना पड़ा था।

28 August 2015

जलता गुजरात और आरक्षण की राजनीति

        पिछले एक सप्ताह से गुजरात जल रहा है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि सरकार को सेना लगानी पड़ रही है। आगजनी और उपद्रव में अब तक 10 से अधिक लोग मारे जा चुके है। गुजरात में दबंग माने जाने वाले पटिदारों (पटेलों) की अपने लिए आरक्षण की मांग के लिए चलाए जा रहे आंदोलन के चलते ये परिस्थितियां पैदा हुयी है।

20 August 2015

FTII के संघर्षरत छात्रों की गिरफ्तारी का विरोध करो!

        अभी कुछ ही दिन बीते हैं जब लाल किले के प्राचीर से हमें आजादी के हसीन ख्वाब दिखाए जा रहे थे। ये आजादी कितनी अधूरी है, इसे 1947 के बाद से ही आम मेहनतकश जनता रोज-बा-रोज के अपनी जिंदगी के कटु अनुभवों से देखती आ रही है। इन्हीं उदाहरणों में एक और इजाफा हुआ है। भारतीय फिल्म एण्ड टेलीविजन संस्थान (FTII) पुणे, के 5 छात्रों को 18 अगस्त को आधी रात में पुलिस ने गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार कर लिया। ये छात्र पिछले 68 दिनों से संस्थान में गजेन्द्र चैहान समेत 5 अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे। इन पांचों को संघ व भाजपा से जुड़े होने व संघी विचारधारा पर चलने के चलते इनाम स्वरूप ये पद दिए गए थे।

23 July 2015

शिक्षा के साम्प्रदायिकरण का विरोध करो! FTII के छात्रों का साथ दो!!

      FTII ( भारतीय फिल्म एण्ड टेलीविजन संस्थान) पुणे, के छात्र पिछली 12 जून से हड़ताल पर हैं। उन्होंने ये कदम सरकार द्वारा गजेन्द्र चैहान को संस्थान का चेयरमैन बनाए जाने के विरोध में उठाया है। यही नहीं छात्र गवर्निंग बाॅॅडी में चुने गए 4 अन्य सदस्यों की नियुक्ति का भी विरोध कर रहे हैं। कला के नाम पर इन पांचों व्यक्तियों के पास संस्थान को देने के लिए कुछ भी नहीं है।

27 June 2015

मुजमिल फारूख को रिहा करो!

      मुजमिल फारूख दार कश्मीरी विश्वविधालय के अंग्रेजी विभाग का तीसरे सेमेस्टर का छात्र है। जिसे 22 जून को क्लास समाप्त होने के बाद विश्वविधालय के गेट से पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस द्वारा मुजमिल की ये गिरफ्तारी 21 जून को विश्वविधालय में मनाए जा रहे ‘योग दिवस’ के विरोध में किए गए प्रदर्शन के ठीक एक दिन बाद की गयी।

14 June 2015

FTII के छात्रों का साथ दो!

     फिल्म एण्ड टेजीविजन संस्थान(FTII), पुणे के छात्र पिछले शुक्रवार 11 जून से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उन्होनें ये कदम सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गजेन्द्र चैहान को FTII का चैयरमैन नियुक्त किए जाने की घोषणा के बाद से उठाया है। छात्र, गजेन्द्र चैहान की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं।

30 May 2015

IIT मद्रास में स्टूडेंट ग्रुप पर लगे बैन का विरोध करो।


     IIT मद्रास(IITM) के अम्बेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल(APSC) को डीन आफ स्टूडेंट(DoS) ने 22 मई को एक आदेश द्वारा डी-रिकोनाइज्ड(नामंजूर) कर दिया है। DoS ने अपने आदेश में कहा है कि यह ग्रुप IITM द्वारा दिए जा रहे अधिकारों का दुरूपयोग कर रहा था। DoS द्वारा यह कदम MHRD द्वारा 15 मई को IITM को भेजे गए एक पत्र के संदर्भ में उठाया गया। जिसमें  APSC द्वारा बांटे गए पर्चे-पोस्टरों पर नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए जांच के आदेश दिए गए थे। और खुद MHRD द्वारा यह पत्र एक अनाम व्यक्ति की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए भेजा गया था। जिसमें इस ग्रुप पर मोदी और हिन्दुओं के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए इस पर कार्यवाही करने की मांग की गयी थी।

2 May 2015

भूकंप पीड़ित नेपाली मेहनतकशों की सहायता के लिए आगे आयें !

25 अप्रैल की दोपहर को नेपाल में आये भूकंप में व्यापक तबाही हुयी। हजारों लोग मारे गये और हजारों घायल हो गये। विस्थापितों की संख्या लाखों में है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार ढाई करोड़ की आबादी वाले नेपाल में अस्सी लाख से ज्यादा लोग भूकंप की त्रासदी से प्रभावित हुए हैं।