25 April 2020

पछास के साथी महेश पर लगाया फर्जी मुकदमा वापस लो


लॉकडाउन की मार झेल रहे गरीब मजदूरों - छात्रों के लिए घर पर रहकर भूख हड़ताल करने पर दर्ज किया मुकदमा

परिवर्तनकामी में छात्र संगठन के लालकुआं इकाई सचिव महेश पर पुलिस ने फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। अखबार के हवाले से यह मुकदमा पुलिस ने सोशल मीडिया पर उकसाने के आरोप में दर्ज किया है। पुलिस ने यह मुकदमा धारा 188, 269, 270 और आपदा प्रबंधन एक्ट 51 के तहत दर्ज किया है। 

20 April 2020

बिहार में लाखों शिक्षकों की हड़ताल और 42 शिक्षकों की मौत

ठेकाकरण की नीतियों की भेंट चढ़ते शिक्षक


        भारत में नई आर्थिक नीतियों के आगमन के बाद 'सर्वांगीण विकास' के लिए अपनाई गई लगभग सभी नीतियों के बेहद गंभीर नकारात्मक परिणाम हर क्षेत्र जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर दिखाई देने लगे हैं।

10 April 2020

लाॅकडाउन के बहाने मजदूरों व मजदूर नेताओं का दमन-उत्पीड़न बंद करो!

मजदूर नेता अभिलाख के बाद अब इमके अध्यक्ष कैलाश भटट का उत्पीड़न!


उत्तराखंड राज्य के उधम सिंह नगर पुलिस द्वारा इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भटट को दिनांक 9/04/2020 को फोन कर रूद्रपुर कोतवाली बुलाया गया। कोतवाली में पुलिस ने उनके द्वारा एक व्हाट्सएप ग्रुप में डाले गये फोटो पर देशद्रोह का मुकदमा लगाने की धमकी दी है। आश्चर्य की बात यह है कि देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की बात उस फोटो पर की गयी है जो कि पिछले दिनों सोशल मीडिया में लगभग पूरे ही देश में घूम रहे थे। यह फोटो लाॅकडाउन के दौरान पुलिस द्वारा मजदूरों को मुर्गा बनाकर पीटने का है। जाहिर सी बात है कि लाॅकडाउन की सबसे ज्यादा मार मजदूरों-मेहनतकशों पर पड़ी है। और जब लगभग पूरे देश में ही ये मजदूर अपने घरों की तरफ पैदल ही मार्च करने को मजबूर हुए तो पुलिस द्वारा उनके साथ मारपीट की गयी। जो पूरी तरह अमानवीय व्यवहार है। 

3 April 2020

मजदूर नेता अभिलाख पर लगाया गया फर्जी राजद्रोह का मुकदमा वापस लो !

लाॅकडाउन में पुलिस द्वारा मजदूरों के किए जा रहे दमन को सोशल मीडिया में उठाने पर पुलिस ने दर्ज किया फर्जी मुकदमा !!


उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन शर्म करो !!!
छात्र-मजदूर एकता जिंदाबाद !!!!

अभिलाख सिंह पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर, जिला उधम सिंह नगर (उत्तराखंड) में विगत लगभग 2 दशकों से एक मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। 1 अप्रैल की सुबह पंतनगर पुलिस द्वारा उन पर राजद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।

27 March 2020

कोरोना महामारी के दौरान मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करो।

इस दौरान भ्रांतियां और अंधविश्वास फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करो।


कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया जूझ रही है। भारत समेत कई देशों की सरकारों द्वारा इस महामारी से निपटने को ‘लाॅक डाउन’ जैसे आपातकालीन कदम उठाये गये हैं।


25 March 2020

इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है

प्रिय साथियों,
आशा है आप स्वस्थ होंगे

'कोरोना' नामक महामारी के चलते हमारे संगठन की गतिविधियां बुरी तरह से बाधित हो गई हैं। हम अपने साथियों सहित जनता से कट गए हैं। यह स्थिती अभी कई दिन कायम रहनी है।

6 March 2020

8 मार्च: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

शिगूफे- प्रपंच की कोई जगह नहीं

8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस जो कि वास्तव में महिला मजदूरों की पूंजीवाद के खिलाफ लंबी संघर्ष गाथा का एक प्रतीक दिवस है। पूरी दुनिया में ही मजदूर-मेहनतकश महिलायें इस दिवस को मनाने की जोर-शोर से तैयारी कर रही हैं। विगत दशकों में देश-दुनिया का कोई भी ऐसा संघर्ष नहीं रहा जिसमें महिलाओं की शानदार, प्रेरणादाई भूमिका ना रही हो। भारत में ही देखें तो पूरे देश भर में सीएए/एनआरसी/एनपीआर के विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं की शानदार भूमिका रही है। शाहीन बाग जैसा संघर्ष का मजबूत किला महिलाओं के दम पर ही बनाया जा सका। तमाम दुख,कष्ट, दमन का इन महिलाओं द्वारा बहुत बहादुरी से मुकाबला किया गया। इनके हौसले के सामने दुख और दमन दम तोड़ता नजर आया।

5 March 2020

दिल्ली सुनियोजित हमलों द्वारा शाहीन बाग आंदोलन को कुचलने की संघी कोशिश को ध्वस्त करो

अपने जन्म से ही संघ व संघ जैसे दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा जनता के बीच मुस्लिमों की कट्टरता, क्रूरता को लेकर एक से बढ़कर एक झूठ फैलाए गए हैं। CAA, NRC/NPR विरोधी आंदोलन की शुरूआत में राज्य द्वारा प्रायोजित हिंसा को भी वो मुस्लिमों द्वारा की गयी हिसा के रूप में प्रचारित करने में सफल रहे। परंतु उसके बाद पैदा हुए शाहीन बाग आंदोलन ने उसे बैकफुट पर धकेल दिया।

भारत के इतिहास में ये एक नए तरीके का आंदोलन था। जिसमें मुस्लिम महिलाओं (जिन्हें सबसे पिछड़ा हुआ माना जाता था) ने भारी संख्या में भागीदारी की। बात केवल भागीदारी तक नहीं रही अधिकांश जगहों पर मुस्लिम महिलाओं ने इस आंदोलन का नेतृत्व भी किया। पूरे आंदोलन का स्वरूप अहिंसावादी और धर्मनिरपेक्ष बनाकर रखा गया। सभी धर्मो के लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की गयी। पुराने नेतृत्व को नकारते हुए लगभग सभी जगह नए नेतृत्व ने आंदोलन की कमान संभाली। सदियों से जिनसे बोलने का हक छीन लिया गया था वो स्टेज पर चढ़कर घंटो भाषण देने लगे। यही नही बाहर से भागीदारी करने वाले प्रगतिशील संगठनों द्वारा भी इस आंदोलन की चेतना को आगे बढ़ाने का काम किया गया। 

26 February 2020

संघर्षरत गुजरात अंबुजा के मजदूरों के समर्थन में....


गुजरात अंबुजा सिडकुल मजदूर अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले माह 28 जनवरी से संघर्षरत हैं। यह कंपनी उत्तराखंड राज्य के ऊधम सिंह नगर जिले के एक औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल सितारगंज में स्थित है। कंपनी मक्के से स्टार्च का निर्माण करती है और उसे अन्य कंपनियों को सप्लाई करती है। इसी से शहद, होरलिक्स, आदि खाद्य पदार्थों का निर्माण होता है। कंपनी मालिक के साथ उत्तराखंड सरकार मजदूरों की मांगों को नहीं सुन रही है। उत्तराखंड सरकार भी पूजीपतियों के साथ खड़ी है और हर संभव तरीके से आंदोलन का दमन करने में लगी है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन गुजरात अंबुजा के मजदूरों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए उत्तराखंड सरकार से मांग करता है कि वह अपनी मजदूर विरोधी दमनकारी नीतियों को छोड़ते हुए मजदूरों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करे।

6 January 2020

जेएनयू छात्रों पर कायराना हमले के विरोध में

5 जनवरी की शाम 7 बजे के आस पास जेएनयू में कुछ गुंडे डंडे, लाठियों और चाकू को हाथ में लेकर कैंपस में घुस गए और हाॅस्टल में छात्रों के साथ मारपीट की और तोड़फोड़ की। छात्र संघ अध्यक्ष सहित कई छात्रों को बुरी तरह से घायल कर दिया। परिवर्तनकमी छात्र संगठन इस कायराना हमले की कठोर शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि इस हमले के दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाय।