IIT मद्रास(IITM) के अम्बेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल(APSC) को डीन आफ स्टूडेंट(DoS) ने 22 मई को एक आदेश द्वारा डी-रिकोनाइज्ड(नामंजूर) कर दिया है। DoS ने अपने आदेश में कहा है कि यह ग्रुप IITM द्वारा दिए जा रहे अधिकारों का दुरूपयोग कर रहा था। DoS द्वारा यह कदम MHRD द्वारा 15 मई को IITM को भेजे गए एक पत्र के संदर्भ में उठाया गया। जिसमें APSC द्वारा बांटे गए पर्चे-पोस्टरों पर नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए जांच के आदेश दिए गए थे। और खुद MHRD द्वारा यह पत्र एक अनाम व्यक्ति की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए भेजा गया था। जिसमें इस ग्रुप पर मोदी और हिन्दुओं के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए इस पर कार्यवाही करने की मांग की गयी थी।
30 May 2015
2 May 2015
भूकंप पीड़ित नेपाली मेहनतकशों की सहायता के लिए आगे आयें !
25 अप्रैल की दोपहर को नेपाल में आये भूकंप में व्यापक तबाही हुयी। हजारों लोग मारे गये और हजारों घायल हो गये। विस्थापितों की संख्या लाखों में है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार ढाई करोड़ की आबादी वाले नेपाल में अस्सी लाख से ज्यादा लोग भूकंप की त्रासदी से प्रभावित हुए हैं।
28 April 2015
किसान आत्महत्याएंः आखिर रास्ता क्या है?
दिल्ली के जंतर-मंतर में आप पार्टी की रैली में एक किसान गजेन्द्र द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने की घटना ने पूरे देश का ध्यान इस समस्या की ओर मोड़ दिया। विभिन्न पूंजीवादी पार्टियां भाजपा-कांग्रेस-आप आदि घड़ियाली आंसू बहाते हुए पूरे मामले को परस्पर जूतम-पैजार तक सीमित कर देना चाहती हैं। वे दशकों से जारी किसानों की आत्महत्याओं के असली कारणों को छुपा लेना चाहती है।
8 April 2015
हाशिमपुरा हत्याकाण्डः 42 मुस्लिमों को किसी ने नहीं मारा
ये हमारा कहना नही। ये कहना है दिल्ली की निचली अदालत का। जिसने 1987 में मेरठ के मुस्लिम बहुल इलाके हाशिमपुरा में मारे गए 42 लोगों की हत्या के अभियुक्त बनाए गए सभी 16 PSC जवानों को बरी कर दिया है।
फैसले के बाद से न्याय की आस लगाए लोगों और मामले की हकीकत जानने वाले सभी लोगों की उम्मीदों को धक्का लगा है। तत्कालिन गाजीयाबाद के पुलिस अधिक्षक वी.एन.राय ने तो इस हत्याकाण्ड को उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में काला अध्याय कहा है।
फैसले के बाद से न्याय की आस लगाए लोगों और मामले की हकीकत जानने वाले सभी लोगों की उम्मीदों को धक्का लगा है। तत्कालिन गाजीयाबाद के पुलिस अधिक्षक वी.एन.राय ने तो इस हत्याकाण्ड को उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में काला अध्याय कहा है।
7 April 2015
माफियाराज के खिलाफ एकजुट हुए ग्रामवासी
सोहनसिंह ढिल्लन और उसके पुत्र डी.पी. सिंह द्वारा 31 मार्च को मुनीष कुमार और प्रभात ध्यानी पर कराये गये हमले के विरोध में माफियाराज के खिलाफ 6 अप्रैल को एक महापंचायत वीरपुर लच्छी गांव में आयोजित की गयी। महापंचायत में दूर-दूर से आये ग्रामिणों, संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवियों द्वारा हिस्सेदारी की गयी। महापंचायत में लगभग 700 लोगों द्वारा भागीदारी कर संघर्ष के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। अस्वस्थ होने के बाबजूद प्रभात ध्यानी और मुनीष कुमार द्वारा महापंचायत में हिस्सेदारी की। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद प्रभात ध्यानी आराम करने के बजाए महापंचायत में शामिल हुए। ग्रामवासियों द्वारा उनका जोरदार स्वागत किया गया।
1 April 2015
गुण्डों की गिरफतारी की मांग को लेकर रामनगर बाजार रहा बंद
दिनांक 31 मार्च को उत्तराखण्ड के रामनगर कस्बे की जनता का गुस्सा फूट पड़ा। इस गुस्से की वजह यहां सालों से मजदूर-मेहनतकश के हितों की आवाज उठाने वाले ‘नागरिक’ समाचार पत्र के सम्पादक मुनीष कुमार व उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी पर खनन माफियाओं द्वारा हमला करना था। यह हमला शासन-प्रशासन की शह पर किया गया था। इसलिए लोगों का गुस्सा शासन-प्रशासन के खिलाफ इतना ज्यादा कि उन्होंने मुनीष कुमार व प्रभात ध्यानी से मिलने आये एस.डी.एम. को बाहर से ही खदेड़ किया। अगले दिन 1 अप्रैल को रामनगर में मौजूद इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन और प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, आरडीएफ, उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी, देव भूमि व्यापार मण्डल व अन्य तमाम जनसंगठनों ने बाजार बंद का आहवान किया। 1 अप्रैल को रामनगर में बाजार बंद रहा। एक विशाल जुलूस निकाला गया और खनन माफिया और प्रशासन के गठजोड़ के खिलाफ नारे लगाये गये।
‘नागरिक’ अखबार के सम्पादक मुनीष कुमार और राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी पर जानलेवा हमले का विरोध करो
भू-माफिया शासन-प्रशासन गठजोड़ मुर्दाबाद!
दिनांक 31 मार्च को उत्तराखण्ड के रामनगर कस्बे से 20 किमी दूर स्थित थारी गांव में ‘नागरिक’ पत्र के सम्पादक मुनीष कुमार व उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी पर ढिल्लन स्टोन क्रेशर के मालिक सोहन सिंह के गुण्ड़ों द्वारा हमला किया गया। ये दोनों ही लोग वीरपुर लच्छी गांव से लौट रहे थे। इन लोगों के मोबाइल व टेबलेट छीन लिये गये। हमले में प्रभात ध्यानी को सिर में गम्भीर चोटें लगीं हैं। उन्हें हल्द्वानी अस्पताल में भर्ती किया गया है। मुनीष कुमार के सिर पर हेलमेट पहने होने की वजह से कम चोटें लगीं।
24 March 2015
भगत सिंह की बात सुनो ! समाजवाद की राह चुनो !!
.“.......निकट भविष्य में यह युद्ध अन्तिम रूप से लड़ा जाएगा और तब यह निर्णायक युद्ध होगा। साम्राज्यवाद एवं पूंजीवाद कुछ समय के मेहमान हैं। यही वह युद्ध है जिसमें हमने प्रत्यक्ष रूप में भाग लिया है। हम इसके लिए अपने पर गर्व करते हैं कि इस युद्ध को न तो हमने प्रारम्भ ही किया है न यह हमारे जीवन के साथ समाप्त ही होगा....”
(फांसी से 3 दिन पूर्व पंजाब के गवर्नर को लिखे पत्र का अंश)
(फांसी से 3 दिन पूर्व पंजाब के गवर्नर को लिखे पत्र का अंश)
10 January 2015
साथी दानवीर को श्रद्धांजली.....
साथियो, हमें बेहद दुःख के साथ आप सभी को सूचित करना पड़ रहा है कि साथी दानवीर अब हमारे बीच नहीं रहे। 7 जनवरी की रात बरेली में उनकी असमय मृत्यु हो गयी। 1995 से ही अपने राजनीति जीवन के शुरुआती दिनों में वे परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) से जुड़कर क्रांतिकारी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे।
22 December 2014
साम्प्रदायिकता के खिलाफ जुलूस-प्रदर्शन
19 दिसम्बर काकोरी के शहीदों की शहादत दिवस के अवसर पर परिवर्तनकामी छात्र
संगठन ने रामलीला मैदान से जंतर-मंतर तक एक रैली निकाली तथा जंतर-मंतर पर
साम्प्रदायिकता के खिलाफ एक सभा की।
सभा को संबोधित करते हुए पछास के महेन्द्र ने कहा कि काकोरी के शहीद अशफाक और बिस्मिल साम्प्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल हैं। उन्होनें धर्म भेद भुलाकर एक साथ ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध करते हुए शहादत दी। लेकिन अशफाक-बिस्मिल-रोशन सिंह-राजेन्द्र नाथ लहिड़ी के देश में RSS-BJP जैसे संगठन साम्प्रदायिकता फैलाकर उनके विचारों को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
सभा को संबोधित करते हुए पछास के महेन्द्र ने कहा कि काकोरी के शहीद अशफाक और बिस्मिल साम्प्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल हैं। उन्होनें धर्म भेद भुलाकर एक साथ ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध करते हुए शहादत दी। लेकिन अशफाक-बिस्मिल-रोशन सिंह-राजेन्द्र नाथ लहिड़ी के देश में RSS-BJP जैसे संगठन साम्प्रदायिकता फैलाकर उनके विचारों को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
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