1 April 2016

सड़ती-बजबजाती पूंजीवादी राजनीति से नाता तोड़ें- इंकलाब से नाता जोड़ें।।

 उत्तराखण्ड में सत्ता संघर्ष
साथियो, 
        पिछले दिनों हमारे राज्य उत्तराखण्ड में जिस तरह पार्टियों के बीच सत्ता-सुख के लिए आपस में तू-तू ,मैं-मैं से लेकर खरीद फरोख्त चली, उससे हम सभी वाकिफ हैं। पिछले दो हफ्तों में भाजपा कांग्रेस में यह साबित करने की मानो होड़ मची थी कि कौन कितना धूर्त, चालाक, शातिर व षड्यंत्रकारी है। कौन किसके कितने विधायकों को तोड़, खरीद सकता है। कांग्रेसी सरकार और विपक्षी भाजपा का यह बेशर्म खेल अभी चल ही रहा था कि केन्द्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर दिखा दिया कि भारतीय लोकतंत्र में केन्द्र के आगे राज्यों की कोई औकात नहीं है जो भी राज्य मोदी सरकार की इच्छानुसार नहीं चलेंगे, उन्हें अरुणाचल, उत्तराखण्ड की तरह केन्द्र धारा 356 का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति शासन लगा सबक सिखायेगा। मोदी सरकार की यह फासीवादी तानाशाही बेहद घृणित है। हालांकि न्यायालय ने इसी दौरान सुनवाई कर सत्ता संघर्ष के खेल को दोबारा चालू करा केन्द्र की योजना पर पानी डाल दिया है।

25 March 2016

हैदराबाद विश्वविद्यालय के संघर्षरत छात्रों के समर्थन में

        रोहित वेमुला की ‘हत्या’ के बाद एक बार फिर हैदराबाद विश्वविद्यालय में पुलीसिया कहर बरपा हुआ है। 24 छात्र, 2 शिक्षक व 1 पत्रकार जेल की सलाखों के पीछे हैं। वि.वि. के हाॅस्टल की लाइट, मेस बंद कर दिए गए हैं। छात्रों के एटीएम काम नही कर रहे हैं। हाॅस्टल में मेस बंद होने पर खुले में खाना बनाने के ‘अपराध’ में एक छात्र उदय भानू को पुलिस द्वारा इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वो आई.सी.यू. में एडमिट है। वकील, समाजिक कार्यकर्ताओं आदि लोगों को वि.वि. में घुसने से रोक लगा दी गयी है तथा वि.वि. को अघोषित समय के लिए बंद कर दिया गया है।

23 March 2016

भगत सिंह और गणेश शंकर विद्यार्थी की विरासत को आगे बढ़ाओ!

साथियो, 
        23 मार्च भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरू की शहादत का दिन है और 25 मार्च गणेश शंकर विद्याथीं का। 23 मार्च 1931 को जहां भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरू ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से लोहा लेते हुए एवं समाजवादी भारत बनाने के लिए संघर्ष करते हुए अमर हो गये। वहीं 25 मार्च 1931 को कानपुर में सांप्रदायिक दंगा रोकने में गणेश शंकर विद्यार्थी शहीद हुए।

14 March 2016

फासीवाद या क्रांति? तय करो किस ओर हो तुम !

        जेएनयू प्रकरण ने इस बात को बहुत अच्छी तरह से स्थापित किया है कि देश में फासीवादी खतरा हमारे समाने मुंह बांए खड़ा है। इसी प्रकरण ने ये भी स्थापित किया कि ये संघी सरकार अपने घृणित मंसूबों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाकर छल-कपट कर सकती है। मीडिया के जरिए फर्जी वीडियो को प्रचारित कर जनता के बीच अंधराष्ट्रवादी माहौल तैयार किया गया। पुलिस का इस्तेमाल कर जेएनयू को छावनी में तबदील कर दिया गया। व्यवस्था का एक-एक पुर्जा तथाकथित देशभक्ति की आड़ में तथाकथित देशद्रोहियों को कुचलने को तैयार हो गया। तमाम तरह के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित संघी सरकार के सामने देश के छात्र-नौजवानों का चुनौती प्रस्तुत करना निश्चित ही काबिले तारीफ है। सटीक क्रांतिकारी समझ और क्रांतिकारी जुझारूपन इस संघर्ष को नयी उंचाईयां देगा, संघी फासीवाद की कब्र को और गहरा करेगा। 

21 February 2016

वक्त आ गया है बता दें, हमारे शरीर में शहीद भगत सिंह का खून दौड़ता है

        भारतीय समाज जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रकरण के बाद दो विशाल शिविरों में बंट सा गया है। एक तरफ तथाकथित राष्ट्रवादी हैं तो दूसरी तरफ करोड़ों-करोड़ सामान्य जन। एक तरफ हैं वे जिनका राष्ट्रवाद निर्दोष विद्यार्थियों, शिक्षकों, पत्रकारों पर हमला करने से प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। दूसरी तरफ वे लोग हैं जो कदम-कदम पर ऐसी ताकतों को चुनौतियां दे रहे हैं, जो भारत को हिन्दू फासीवाद की अंधी गली में धकेलना चाहते हैं।

14 February 2016

जेएनयू को पुलिस छावनी में तब्दील किये जाने का विरोध करो!

      संघ मंडली के छद्म राष्ट्रवाद को बेनकाब करो!
        छात्रों पर लगाये देशद्रोह के मुकदमें वापस लो! 
साथियो,
        देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) आजकल पुलिस छावनी में तब्दील है। पुलिस द्वारा जेएनयू के मुख्य द्वार की नाकेबंदी कर परिसर एवं हाॅस्टलों में छात्र-छात्राओं के कमरों की तलाशी एवं गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। पुलिस की कार्यवाही तथा मीडिया द्वारा इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है कि मानो जेएनयू देश विरोध एवं देशद्रोहियों के अड्डे में तब्दील हो गया हो। कई मीडिया चैनल तो बाकायदा ‘ट्रायल’ बैठाकर जेएनयू के छात्रों को देशद्रोही का आरोपी घोषित कर सख्त सजा सुनाने पर आमादा हैं। ये मीडिया चैनल न्यायिक जांचों और न्यायालय से भी ‘ऊपर’ हो गये हैं।

20 January 2016

ये दुखी होकर बैठने का नहीं हत्यारी व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरने का समय है

रोहित वेमुला की ‘आत्महत्या’ प्रकरण

        17 जनवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय के एक दलित छात्र रोहित ने हास्टल में आत्महत्या कर ली। 28 वर्षीय रोहित पी.एच.डी. द्वितीय वर्ष का छात्र था। लगभग, पिछले 15 दिनों से रोहित व अन्य छात्रों को हास्टल से निष्कासित कर दिया गया था। ये पांचों छात्र दलित थे तथा अंबेडकर स्टूडेंट एसोसियेशन(ए.एस.ए.) के सक्रिय सदस्य थे।

19 January 2016

It's a Murder, Not Suicide! Punish the Murderers of Rohith !

        Rohith Vemula’s suicide  has shaken the entire student community and once again laid bare the oppressive norms of caste operating in our University  premises. It also exposes how the combined force of the ruling government, Vice-Chancellor of University of Hyderabad, MHRD minister Smriti Irani and ABVP president Susheel Kumar has put an end to the dreams of a Dalit student who wanted to be a man of science and a witer like Carl Sagan but unfortunately only got to write his own suicide letter.

6 January 2016

डीयू को साम्प्रदायिक ताकतों का केन्द्र बनाए जाने का विरोध करो!

‘न त्रिशूल-न तलवार’ , हमें चाहिए रोजगार!!
        
        आने वाली 9 जनवरी को डीयू में अरूंधति वशिष्ठ परिषद पीठ(जोकि विश्व हिन्दू परिषद से जुड़ा संगठन है) द्वारा ‘राम जन्म भूमि’ के मामले पर एक सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें अयोध्या में मंदिर बनाए जाने के मामले पर जनमत तैयार करने की योजना बनाए जाने पर चर्चा की जाएगी। शुरू से ही यह मुद्दा विवादों से भरा रहा है राजनीतिक दल अपने-अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप इसे हवा देते आयें हैं। जिनका परिणाम बड़े पैमाने के साम्प्रदायिक दंगों और मेहनतकश आबादी के बीच साम्प्रदायिक विभाजन के मजबूत होने के तौर पर सामने आया है। अब फिर से RSS व BJP यही सब करने की घृणित मंशा पाल रही हैं। 

25 December 2015

कड़ा कानून नहीं, पूंजीवाद के खिलाफ कड़ा विरोध जरूरी

        निर्भया हत्याकाण्ड के तीन वर्ष बाद एक बार फिर सख्त कानून की बहस जोरों पर है। राज्यसभा ने कानून बनाकर जघन्य अपराधों के दोषियों के लिए उम्र 18 से घटाकर 16 कर दी है। लोकसभा इसे पहले ही पास कर चुकी है।