गुजरात अंबुजा सिडकुल मजदूर अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले माह 28 जनवरी से संघर्षरत हैं। यह कंपनी उत्तराखंड राज्य के ऊधम सिंह नगर जिले के एक औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल सितारगंज में स्थित है। कंपनी मक्के से स्टार्च का निर्माण करती है और उसे अन्य कंपनियों को सप्लाई करती है। इसी से शहद, होरलिक्स, आदि खाद्य पदार्थों का निर्माण होता है। कंपनी मालिक के साथ उत्तराखंड सरकार मजदूरों की मांगों को नहीं सुन रही है। उत्तराखंड सरकार भी पूजीपतियों के साथ खड़ी है और हर संभव तरीके से आंदोलन का दमन करने में लगी है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन गुजरात अंबुजा के मजदूरों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए उत्तराखंड सरकार से मांग करता है कि वह अपनी मजदूर विरोधी दमनकारी नीतियों को छोड़ते हुए मजदूरों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करे।
26 February 2020
संघर्षरत गुजरात अंबुजा के मजदूरों के समर्थन में....
गुजरात अंबुजा सिडकुल मजदूर अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले माह 28 जनवरी से संघर्षरत हैं। यह कंपनी उत्तराखंड राज्य के ऊधम सिंह नगर जिले के एक औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल सितारगंज में स्थित है। कंपनी मक्के से स्टार्च का निर्माण करती है और उसे अन्य कंपनियों को सप्लाई करती है। इसी से शहद, होरलिक्स, आदि खाद्य पदार्थों का निर्माण होता है। कंपनी मालिक के साथ उत्तराखंड सरकार मजदूरों की मांगों को नहीं सुन रही है। उत्तराखंड सरकार भी पूजीपतियों के साथ खड़ी है और हर संभव तरीके से आंदोलन का दमन करने में लगी है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन गुजरात अंबुजा के मजदूरों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए उत्तराखंड सरकार से मांग करता है कि वह अपनी मजदूर विरोधी दमनकारी नीतियों को छोड़ते हुए मजदूरों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करे।
6 January 2020
जेएनयू छात्रों पर कायराना हमले के विरोध में
5 जनवरी की शाम 7 बजे के आस पास जेएनयू में कुछ गुंडे डंडे, लाठियों और चाकू को हाथ में लेकर कैंपस में घुस गए और हाॅस्टल में छात्रों के साथ मारपीट की और तोड़फोड़ की। छात्र संघ अध्यक्ष सहित कई छात्रों को बुरी तरह से घायल कर दिया। परिवर्तनकमी छात्र संगठन इस कायराना हमले की कठोर शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि इस हमले के दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाय।
13 December 2019
'सीएबी' संघी फासीवादियों का नया विभाजनकारी एजेण्डा
‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ (सीएबी) लोक सभा और राज्य सभा दोनों में पास हो गया है। इस विधेयक के जरिये भाजपा ने अपने घोर सांप्रदायिक चरित्र को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस विधेयक में धर्म को आधार मानकर नागरिकता देने का प्रबंध भाजपा की सरकार ने कर दिया है। इसके जरिये भाजपा ‘हिन्दू राष्ट्र’ के अपने फासीवादी एजेण्डे को लागू कर रही है। लंबे समय से संघ और भाजपा अपने हिन्दू राष्ट्र का सपना पाले हुए थे। अब वे इसे तेजी से जमीन पर उतारने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। यह विधेयक इसी उद्देश्य से प्रेरित है।
यौन हिंसा एनकाउण्टर और हमारा समाज
27 नवम्बर हैदराबाद में 26 वर्षीय वेटनरी डॉक्टर की गैंग रेप कर नृशंस हत्या कर दी गयी। समाज में महिलाअें के खिलाफ हो रहे ऐसे नृशंस अपराधों में क्षुब्ध व आक्रोशित तमाम लोगों द्वारा हैदराबाद सहित पूरे देश में ढेरों प्रदर्शन किये गये। रोज ब रोज महिलाओं के साथ आपराधिक घटनायें हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है। घृणित पूंजीवादी व्यवस्था महिलाओं को सुरक्षा व बराबरी देने में सर्वथा अक्षम रही है। या ज्यादा सही कहें तो यह पूंजीवादी व्यवस्था ही मुख्यतः, मूलतः ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार है। यह व्यवस्था पुरुषप्रधानता की सोच को बनाये हुए है। अश्लील उपभोक्तावादी संस्कृति को पाल-पोस रही है और समाज में कुण्ठित-विकृत मानसिकता के लोगों को पैदा कर रही है।
2 December 2019
20 November 2019
फीस वृद्धि के हमलों का बहादुरी से सामना करते छात्र
छात्रों का बहादुराना संघर्ष जिंदाबाद !
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र पिछले कई दिनों से फीसवृद्धि का विरोध कर रहे हैं। सरकार द्वारा बोले गये इस बड़े हमले का विरोध जरूरी था। छात्रों के बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन करने और फीसवृद्धि वापस करने की मांग को कुलपति ने अनसुना कर दिया। कान में तेल डाले और आंखों पर काली पटटी बांधे जेएनयू कुलपति संघी सरकार के कुशल स्वंयसेवक का रोल अदा करते हुए अड़ियल रुख पर कायम हैं। वकीलों से झगड़ा होने पर न्याय की गुहार लगाने वाली दिल्ली पुलिस छात्रों से बर्बरता से निपट रही है। दिल्ली पुलिस ने सरकार के इशारे पर जेएनयू छात्रों का सिर फोड़ा और उनके कपड़े खून से रंग दिये। उनको सड़कों पर घसीटा और जेलों में कैद कर दिया। इतने जुल्मों सितम के बाद भी जेएनयू के छात्र बहादुरी के साथ मैदान में डटे हैं। वे सरकार के शिक्षा को महंगा करने और शिक्षा के निजीकरण की इस मुहिम के सामने लोहे की दीवार की तरह खड़े हैं।
13 July 2019
रेलवे के निजीकरण का पुरजोर विरोध करें
दुबारा सत्ता संभालते ही मोदी सरकार ने जनविरोधी फैसलों की झड़ी लगा दी है। ऐसा ही फैसला रेलवे के निजीकरण की रफ्तार को बढ़ाना है। इसका रेलवे कर्मचारियों सहित कई लोगों ने विरोध किया है।
रेलवे का निजीकरण टुकड़ों-टुकड़ों में पिछले तीन दशक से जारी है। इस प्रक्रिया को तेजी से आर्थिक सुधार लागू करने के अपने एजेण्डे के तहत मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में काफी तेजी ला दी। अब सत्ता संभालते ही इसकी गति और तेज कर दी गयी है।
19 June 2019
बिहार में बच्चों की मौत
मानव विरोधी पूंजीवादी व्यवस्था की भेंट चढ़ते मासूम बच्चे
परिवर्तनकामी छात्र संगठन बिहार में दिमागी बुखार से मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। दुख की इस घड़ी में परिवर्तनकामी छात्र संगठन शोकाकुल परिजनों के साथ है।
बिहार के मुजफ्फरपुर व आस-पास के इलाकों में दिमागी बुखार "(चमकी बुखार)" से अब तक 138 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत का सिलसिला अभी जारी है।
8 June 2019
फर्जी डिग्री का एक और मानव संसाधन विकास मंत्री
मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल की मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी थीं। इन दोनों शख्सियतों में एक समानता रही। वह समानता है डिग्रियों के फर्जी होने की। रमेश पोखरियाल अपने नाम के आगे डाॅ. लगाते हैं। यह पदवी पेशे से डाॅक्टर या पी.एच.डी. किया हुआ कोई व्यक्ति ही उपयोग करता है।
रमेश पोखरियाल को श्रीलंका स्थित ओपन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ने डी.लिट. की मानद उपाधी दी। मानद उपाधी प्राप्त कोई व्यक्ति भी अपने नाम के आगे डाॅ. पदवी लगा सकता है। परन्तु जब इस पर जांच की गयी तो श्रीलंका के यूजीसी से पता चला कि श्रीलंका में इस नाम से कोई भी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट पंजीकृत नहीं है।
26 May 2019
एकाधिकारी पूंजी की चाहत मोदी तो ताज भी मोदी के सर
देश में हुए लोक सभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। इन चुनाव में भाजपा को बहुमत मिला और वह एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है। यह चुनाव पूरी तरह मोदी के नाम पर लड़ा गया। चुनाव की जीत को मोदी-शाह की जीत के रूप में कहा जा रहा है। मोदी के ‘‘करिश्मे’’ और अमित शाह के कुशल चुनावी मैनेजमैन्ट के बगैर चुनाव के यह परिणाम नहीं आते। जो कि किसी हद तक सही भी है। किन्तु यह चुनाव और कई सारी वजहों से भी जीता गया। इन वहजों में सबसे प्रमुख है भारत के एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग यानी अम्बानी-टाटा-बिड़ला का अपने खजाने का मुंह मोदी-भाजपा के लिये खोलना, उसके पैसे से चलने वाले मीडिया के द्वारा पूरा माहौल बनाना और इसके साथ हिन्दू फासीवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के देश भर में फैले संगठनों, कार्यकर्ताओं व सर्मथकों का मकड़जाल। वित्तीय पूंजी औऱ हिन्दू फासीवाद के गठजोड़ ने फिर से मोदी सरकार बनवा दी।
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