Parivaratankami Chhatra Sangthan(PACHHAS) is going to hold its 9th conference from 31st October to 1st
November in Delhi. The closed session will take place from 31st October to 1st Novemebr 3’o clock. During this session we
will discuss about the three divisions of Political report namely
International, National and student
movements. Later on we will take up national-international situation and
discuss about the challenges faced by our student organization.
21 October 2015
पछास का 9वां सम्मेलन जिन्दाबाद
परिवर्तनकामी छात्र संगठन का 9वां सम्मेलन 31 अक्टूबर व 1 नवम्बर 2015 को दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। 31 अक्टूबर से 1 नवम्बर की दोपहर तक बंद सत्र चलाया जायेगा। इस सत्र के दौरान अंतराष्ट्र्रीय, राष्ट्र्रीय व छात्र जगत तीन हिस्सों में बटी राजनीतिक रिपोर्ट पर चर्चा की जायेगी। उसके उपरांत देश-दुनिया के राजनीतिक हालातों का जायजा लेकर संगठन की समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा की जायेगी।
24 September 2015
कालेज-कैम्पसों को ‘जेल’ बनाए जाने का विरोध करो!
कालेजों-विश्वविद्यालयों में जनवादी माहौल हो, इसके लिए छात्र-छात्राओं ने इतिहास में जुझारू संघर्षो को खड़ा किया है। पूंजीवादी शासकों की भरसक कोशिश रही है कि युवा हमेशा उनके इसारे पर नाचते रहें। पूंजीवादी शसक छात्रों की जनवादी-क्रांतिकारी सोच व संघर्ष से भय खाते रहे हैं। देश में जनवाद, लोकतंत्र का राग अलापने के बरक्स वह छात्रों के राजनीतिक अधिकारों को सैकड़ों तरीको से कुचलते रहे है। किन्तु छात्र समुदाय ने अपने व देश-दुनिया के क्रांतिकारी संघर्षो से जो चेतना हासिल की, उसके कारण वह अपने जनवादी अधिकारों के प्रति सचेत रहा है। परन्तु शासक वर्ग इस सीमित जनवाद को भी खत्म करना चाहता है। UGC(विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा अप्रैल 2015 में जारी की गयी गाइडलाइन भी शासक वर्ग की इसी चाहत को पूरा करती प्रतीत होती है।
13 September 2015
महाराष्ट व छत्तीसगढ सरकार ने लगाया मास पर प्रतिबंध
हम जो चाहेगें सब वही खायेंगे
जैन धर्म पर्व का बहाना बनाकर महाराष्ट व छत्तीसगढ सरकार ने मास की ब्रिक्री पर दो दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। पहले यह प्रतिबंध महाराष्ट में 4 व छत्तीसगढ में 9 दिनों के लिए लगाया गया था। दोनों प्रदेश सरकारों द्वारा सुनाया गया यह फरमान सवर्णवादी- ब्राहमणवादी सोच से भरा हुआ है। भाजपा सरकार लगतार समाज में ब्राहमणवादी मूल्य थोप रही है। किसी भी सरकार को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि लोग क्या खायें क्या पहने। किन्तु देश में भाजपा सरकार यही सब कर रही है।
साम्राज्यवादी कुकर्मों के कारण दर-दर भटकते लोग
सीरिया से बड़े पैमाने पर लोग अपना घर-बार छोड़कर दर-दर भटक रहे हैं।ये सभी यूरोपीय देशों में शरण लेने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। असुरक्षित यात्रा में कई लोग भूख-प्यास से भी मर जा रहे हैं। बीबीसी के अनुसार इस वर्ष 3 लाख 40 हजार लोग अपना वतन छोड़कर शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं। सीरियाई लोगों का दर्द देखकर यूरोपीय देशों के नागरिकों ने उनका साथ देने के लिए प्रदर्शन किये। इसके बावजूद पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासक शरणार्थियों को अनचाहा बोझ समझकर तरह-तरह के बहाने बनाकर इसे रोकना चाहते हैं। हंगरी ने तो शरणार्थियों को रोकने के लिए तार-बाड़ खड़ी कर दी है। साम्राज्यवादी आईएसआईएस की उनके देश में घुसपैठ का बहाना बनाकर शरणार्थियों को शरण देने में अडंगे लगा रहा है। इस सबके बावजूद एक दिन भी ऐसा नहीं गया जबकि पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासकों ने मानवता के नाम पर झूठे आंसू ना बहाये हों।
4 September 2015
बदलाव लाने में अक्षम यह लोक लुभावन फैसला
इलाहबाद उच्च न्यायलय ने 18 अगस्त 2015 को बेहद ‘लोकप्रिय’ फैसला सुनाया। यह फैसला कहता है कि सभी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, जज, जनप्रतिनिधि अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ायेंगे। न्यायलय के इस फैसले के बाद तमाम बुद्धिजीवी बेहद खुश नजर आ रहे हैं। वे इसे सरकारी स्कूलों के हालात में सुधार व पैसे के आधार पर शिक्षा में भेदभाव की समाप्ति के तौर पर देख रहे हैं।
3 September 2015
प्रो. एम.एम. कुलबर्गी की हत्या का विरोध करो!
प्रो0 एम0एम0 कुलबर्गी को तर्कपरकता और धार्मिक अंधविश्वास का विरोध करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। प्रो0 कुलबर्गी हम्पी यूनिवर्सिटी के पूर्व वायस चांसलर (कुलपति) थेे और अपने लेखों व लिखी किताबों के द्वारा धार्मिक पोंगापंथ का विरोध करने का काम करते रहे थे। उनकी 30 अगस्त को उनके घर पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गयी। अपने काम के कारण उनको लंबे समय से हिन्दू फासीवादी संगठनों द्वारा आलोचना व धमकी का शिकार होना पड़ा था।
28 August 2015
जलता गुजरात और आरक्षण की राजनीति
पिछले एक सप्ताह से गुजरात जल रहा है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि सरकार को सेना लगानी पड़ रही है। आगजनी और उपद्रव में अब तक 10 से अधिक लोग मारे जा चुके है। गुजरात में दबंग माने जाने वाले पटिदारों (पटेलों) की अपने लिए आरक्षण की मांग के लिए चलाए जा रहे आंदोलन के चलते ये परिस्थितियां पैदा हुयी है।
20 August 2015
FTII के संघर्षरत छात्रों की गिरफ्तारी का विरोध करो!
अभी कुछ ही दिन बीते हैं जब लाल किले के प्राचीर से हमें आजादी के हसीन
ख्वाब दिखाए जा रहे थे। ये आजादी कितनी अधूरी है, इसे 1947 के बाद से ही आम
मेहनतकश जनता रोज-बा-रोज के अपनी जिंदगी के कटु अनुभवों से देखती आ रही
है। इन्हीं उदाहरणों में एक और इजाफा हुआ है। भारतीय फिल्म एण्ड टेलीविजन
संस्थान (FTII) पुणे, के 5 छात्रों को 18 अगस्त को आधी रात में पुलिस ने
गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार कर लिया। ये छात्र पिछले 68 दिनों से
संस्थान में गजेन्द्र चैहान समेत 5 अयोग्य
व्यक्तियों की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे। इन पांचों को संघ व भाजपा से
जुड़े होने व संघी विचारधारा पर चलने के चलते इनाम स्वरूप ये पद दिए गए थे।
23 July 2015
शिक्षा के साम्प्रदायिकरण का विरोध करो! FTII के छात्रों का साथ दो!!
FTII ( भारतीय फिल्म एण्ड टेलीविजन संस्थान) पुणे, के छात्र पिछली 12 जून से हड़ताल पर हैं। उन्होंने ये कदम सरकार द्वारा गजेन्द्र चैहान को संस्थान का चेयरमैन बनाए जाने के विरोध में उठाया है। यही नहीं छात्र गवर्निंग बाॅॅडी में चुने गए 4 अन्य सदस्यों की नियुक्ति का भी विरोध कर रहे हैं। कला के नाम पर इन पांचों व्यक्तियों के पास संस्थान को देने के लिए कुछ भी नहीं है।
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