अपने जन्म से ही संघ व संघ जैसे दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा जनता के बीच मुस्लिमों की कट्टरता, क्रूरता को लेकर एक से बढ़कर एक झूठ फैलाए गए हैं। CAA, NRC/NPR विरोधी आंदोलन की शुरूआत में राज्य द्वारा प्रायोजित हिंसा को भी वो मुस्लिमों द्वारा की गयी हिसा के रूप में प्रचारित करने में सफल रहे। परंतु उसके बाद पैदा हुए शाहीन बाग आंदोलन ने उसे बैकफुट पर धकेल दिया।
भारत के इतिहास में ये एक नए तरीके का आंदोलन था। जिसमें मुस्लिम महिलाओं (जिन्हें सबसे पिछड़ा हुआ माना जाता था) ने भारी संख्या में भागीदारी की। बात केवल भागीदारी तक नहीं रही अधिकांश जगहों पर मुस्लिम महिलाओं ने इस आंदोलन का नेतृत्व भी किया। पूरे आंदोलन का स्वरूप अहिंसावादी और धर्मनिरपेक्ष बनाकर रखा गया। सभी धर्मो के लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की गयी। पुराने नेतृत्व को नकारते हुए लगभग सभी जगह नए नेतृत्व ने आंदोलन की कमान संभाली। सदियों से जिनसे बोलने का हक छीन लिया गया था वो स्टेज पर चढ़कर घंटो भाषण देने लगे। यही नही बाहर से भागीदारी करने वाले प्रगतिशील संगठनों द्वारा भी इस आंदोलन की चेतना को आगे बढ़ाने का काम किया गया।



