10 June 2021

कामरेड नगेंद्र को लाल सलाम! ✊✊✊

       बेहद दुःखद सूचना है कि इंकलाबी मज़दूर केंद्र (इमके) के उपाध्यक्ष कामरेड नगेंद्र का 47 वर्ष की अल्पायु में निधन हो गया है। आज दिनांक 10 जून को रात करीब 8 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। साथी पिछले 2 साल से अधिक समय से कैंसर से जूझ रहे थे।

साथी नगेन्द्र लम्बे समय तक परिवर्तनकामी छात्र संगठन से जुड़े रहे। साथी पछास के उपाध्यक्ष भी रहे। साथी ने लंबे समय तक 'परचम' पत्रिका के संपादन की जिम्मेदारी उठाई। मौजूदा समय में साथी 'नागरिक' समाचार पत्र के संपादन की जिम्मेदारी उठा रहे थे।

19 May 2021

फिलीस्तीन पर इस्राइली हमलों का विरोध करो!

इस्राइली शासकों द्वारा फिलीस्तीनियों के नरसंहार का विरोध करो!!


     पिछली 10 मई से इस्राइली शासकों द्वारा फिलीस्तीनियों पर हमले जारी हैं। अब तक इन हमलों में 200 से भी अधिक लोगों की हत्या की जा चुकी है। इन हमलों में मासूम बच्चों को भी मिसाइली हमले का शिकार बनाया गया है। भारी संख्या में इस्राइली मिसाइलों ने फिलीस्तीन के अस्पतालों, स्कूलों व घरों को निशाना बनाया है। फिलीस्तीन की तरफ से कट्टरपंथी संगठन हमास भी इस्राइली हमले का जवाब दे रहा है। लेकिन हमास के हमले इस्राइली हमलों के आगे कहीं नहीं ठहरते। इस्राइल हमास के ज्यादातर मिसाइलों को हवा में नष्ट कर दे रहा है। अमेरिकी और यूरोपीय साम्राज्यवादियों की मदद से अपना सैन्यकरण करने वाले इस्राइल के पास जनसंहारक हथियार हैं। वह इन हथियारों का इस्तेमाल फिलीस्तीन पर कर रहा है। जिसकी कीमत फिलीस्तीन के मासूम बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।

17 May 2021

प्रो. लाल बहादुर वर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि

     प्रसिद्ध इतिहासकार व वामपंथी बुद्धिजीवी प्रो. लाल बहादुर वर्मा जी का 17 मई को देहरादून में निधन हो गया। वह 5 मई को कोरोना से संक्रमित पाये गये थे। लम्बे इलाज के दौरान ह्रदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गयी।
  

ये मौतें नहीं नरसंहार है!

     इस समय हमारा देश और हम एक ऐसा दर्द सह रहे हैं जिससे बचा जा सकता था। इस समय हमारा देश एक ऐसा देश बना दिया गया है जहां अपने प्रिय परिजनों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए रोते-गिड़गिड़ाते लोगों और ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण तड़प-तड़प कर मर जाने वाले लोगों का मंजर, आम मंजर बन गया है। इस वक्त हमारा देश ऐसा देश बना दिया गया है जहां पर लोग अपने प्रियजनों की लाशों को अपने ही कंधों पर ढोने को मजबूर कर दिये गये हैं। हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि मृृतकों के लिए शमशान, लकड़ी और कब्रें भी कम पड़ गयी हों और सैकड़ों की संख्या में लाशें नदी में तैर रही हैं। इन तैरती लाशों को कुत्ते नोंच रहे हैं। कई परिवार तो ऐसे हैं जहां एक की मौत का मातम भी पूरा नहीं हुआ था कि दूसरी, तीसरी,.... मौतें हो गयीं। लोग अपने एक प्रिय की मौत पर सही से रो भी नहीं पाए थे कि अन्य प्रियजनों को बीमारी ने आ घेरा। कई परिवार तो ऐसे हो गये हैं जहां सिर्फ दुधमुहें बच्चे ही बचे हैं, जिनके सिर पर अब किसी का भी आसरा नहीं बचा।

23 February 2021

एक अविस्मणीय व्यक्तित्व



क्रांतिकारी अजीत सिंह

इस समय जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन फैलता जा रहा है। सम्पूर्ण देश में एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग के हितों के लिए लाए गए कृषि कानूनों का विरोध जारी है तब बरबस ही सरदार अजीत सिंह का जिक्र भी सामने आ जाता है। सरदार अजीत सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह के चाचा थे। सन् 1906 में ब्रिटिश उपनिवेशवादी शासन द्वारा लाए गए किसान विरोधी तीन काले कानूनों के खिलाफ उन्होंने सन् 1907 में किसानों के आन्दोलन की अगुवाई की थी। ये काले कानून थे- दोआब बारी एक्ट, पंजाब लैंड काॅलोनाइजेशन एक्ट और पंजाब लैंड एलियनेशन एक्ट।

25 November 2020

26 नवंबर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में ....

छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !

 


26 नवंबर को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व विभिन्न मजदूर संगठनों द्वारा देशव्यापी आम हड़ताल करना तय किया गया है। इस हड़ताल के साथ ही किसान संगठनों ने भी देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन मजदूरों की आम हड़ताल व किसानों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करता है। साथ ही, छात्रों का आह्वान करता है कि देश के मजदूरों-किसानों के संघर्ष से जोड़ते हुए छात्रों व शिक्षा पर हो रहे हमलों के विरोध में एकजुट आवाज उठाएं।

14 September 2020

मैं अपनी जिंदगी से परेशान हो गया हूँ ...


ये 32 वर्षीय राजीव सुसाइड नोट के अंतिम शब्द हैं। जिसने इलाहाबाद में बेरोजगारी के चक्र में फँसकर आत्महत्या का रास्ता चुना। राजीव ने पीसीएस इंटरव्यू में असफल होने के बाद ये कदम उठाया। इसके जैसे हज़ारों बेबस मज़दूर, किसान, छात्र तथा नौजवान रोज ऐसे ही मौत को गले लगा ले रहे हैं।

योगी सरकार का नया फैसला देश के युवाओं के साथ धोखा है!


भारत आज बेरोजगारी के चरम दौर से गुजर रहा है। देश का युवा रोजगार को तरस रहा है। वो हताश, निराश, बेबस है। रोज हताश बेरोजगारों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हों। ऐसे में उन्हें रोजगार देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के बजाए यूपी की योगी सरकार एक युवा विरोधी फैसला लागू करने जा रही है। प्रदेश की सरकार एक नया बिल कैबिनेट के समक्ष पेश करने जा रही है। इस बिल के अनुसार समूह ख और ग के तहत भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों को 5 साल के लिए संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के तौर पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित रखा जायेगा।

11 September 2020

नशे के खिलाफ जुझारू आंदोलन और पूंजीवादी व्यवस्था

कच्ची शराब व अवैध नशों के खिलाफ आंदोलन


लालकुआं (नैनीताल) उत्तराखंड के बिन्दुखत्ता गांव में पिछले माह के 1 अगस्त से ग्रामीण व जनसंगठन कच्ची शराब, चरस, स्मैक, अफीम, ड्रग आदि अवैध नशों के खिलाफ संघर्षरत हैं। यह आंदोलन एक गांव की सफलता के बाद दूसरे, तीसरे गांव में फैलता चला जा रहा है। 

4 September 2020

नौजवानों-किसानों को मौत बांटती पूंजीवादी व्यवस्था

एन आर सी बी के आंकड़े


नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन सी आर बी) देश में हत्या दुर्घटना, आत्महत्या, सहित अपराध के आंकड़े जारी करने वाली सरकारी संस्था है। 2 सितंबर 2020 को इसने वर्ष 2019 में दुर्घटना और आत्महत्या के आंकड़े पेश किए। जिसमें बताया गया कि 2018 में 1,34,516 आत्महत्या की घटनाएं हुई और 2019 में 3.4% की बढ़ोतरी के साथ यहां आंकड़ा 1,39,123 हो गया। विकास के दावों और "सब चंगा सी" के बीच आत्महत्या के मामले अपनी कहानी आप ही बयां करते हैं।