निर्भया हत्याकाण्ड के तीन वर्ष बाद एक बार फिर सख्त कानून की बहस जोरों पर है। राज्यसभा ने कानून बनाकर जघन्य अपराधों के दोषियों के लिए उम्र 18 से घटाकर 16 कर दी है। लोकसभा इसे पहले ही पास कर चुकी है।
25 December 2015
15 December 2015
शासकों के दमन के बाद भी जल रही है आक्यूपाई यूजीसी आंदोलन की मशाल
यू.जी.सी. द्वारा अक्टूबर में नाॅन नेट फेलोशिप को खत्म किये जाने की घोषणा के बाद से शुरू हुआ आक्यूपाई यू.जी.सी. आंदोलन निरंतर जारी है। 21 अक्टूबर से शुरू हुए इस आंदोलन को निरंतर ही सरकार के दमन का सामना करना पड़ा है। 23 अक्टूबर, 27 अक्टूबर के बाद अब 9 दिसम्बर को छात्रों को पुलिसिया दमन सहना पड़ा। 9 दिसम्बर को छात्रों की पहले से ही प्रस्तावित रैली पर दिल्ली पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया। यू.जी.सी. भवन से संसद मार्ग तक शांतिपूर्वक रैली निकाल रहे छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, वाटर कैनन से उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया। पुलिस द्वारा छात्राओं को टारगेट करके हमला किया गया। लगभग 150 छात्रों को गिरफ्तार करके थाने ले जाया गया जहां देर रात उन्हें छोड़ दिया गया। पुलिस के इस हमले में लगभग डेढ़ दर्जन छात्र/छात्राएं घायल हुए। इस भारी दमन के बाद भी छात्रों का हौंसला टूटा नहीं है और उन्होंने 14 दिसम्बर को इस पुलिसिया दमन के खिलाफ तथा आंदोलन के समर्थन में पूरे देश में प्रदर्शन करने की अपील सभी छात्र संगठनों से की है।
18 November 2015
असहिष्णुता के खिलाफ पुरस्कार वापसी
इन दिनों साहित्यकारों और कलाकारों द्वारा पुरस्कार वापसी की बाढ़ आ गयी है। उदय प्रकाश से लेकर अरूंधति राय समेत दर्जनों लोग पुरस्कार वापसी कर चुके हैं। यह क्रम अभी भी जारी है। साहित्यकारों, कलाकारों की यह क्षुब्धता बीते समय में देश में बढ़ी असहष्णिुता का प्रतिकार है। कन्नड़ विद्वान कलबुर्गी की हत्या जैसी घटनाएं समाज में बढ़ी हैं। वहीं दादरी में अखलाक की दर्दनाक हत्या ने पूरे समाज को ही क्षुब्धता से भर दिया है। देश कहां जा रहा है? जैसा सवाल तीखे ढंग से सभी के सामने आ उपस्थित हुआ है।
9 November 2015
पछास का 9वां सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न
पछास का 2 दिवसीय 9वां सम्मेलन 31 अक्टूबर-1 नवंबर को दिल्ली में आयोजित किया गया। सम्मेलन में संगठन के उत्तराखण्ड, यूपी तथा दिल्ली से आए प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। 31 अक्टूबर को पूरे दिन व 1 नवंबर की दोपहर तक बंद सत्र चलाया गया। बंद सत्र के दौरान पिछले 2 सालों में देश-दुनिया में आए बदलावों पर गहन विचार-विमर्श करते हुए तथा इन बदलावों की रोशनी में अपने लिए नए कार्यभार चुनते हुए राजनीतिक व सांगठनिक रिर्पोट को ध्वनि मत से पारित किया गया। संगठन को आगामी सम्मेलन तक नेतृत्व देने के लिए नए नेतृत्व का चुनाव भी बंद सत्र के दौरान किया गया।
23 October 2015
UGC द्वारा नाॅन-नेट फेलोशिप को खत्म किए जाने का विरोध करो!
UGC ने 7 अक्टूबर को दिए गए अपने एक फैसले के द्वारा अगले सत्र से केन्द्रीय विद्यालयों में M.Phil. व Ph.D. छात्रों को मिलने वाली नाॅन-नेट फेलोशिप को खत्म करने का फैसला कर लिया है। इससे पहले इन छात्रों को शोध के लिए क्रमशः 5 व 8 हजार रूपये प्रति माह मिलते थे। सरकार द्वारा दी जा रही इस आर्थिक सहायता से छात्रों को अपने परिवारों पर बोझ बने बिना अध्ययन करने का मौका मिल पाता था। जिससे वो आसानी से अपना शोध जारी रख सकते थे। परंतु UGC के इस फैसले के बाद केवल आर्थिक रूप से समृद्ध छात्र ही शोध के क्षेत्र में पहुंच पाएगें।
21 October 2015
Parivaratankami Chhatra Sangthan's 9Th Conference Long Live
Parivaratankami Chhatra Sangthan(PACHHAS) is going to hold its 9th conference from 31st October to 1st
November in Delhi. The closed session will take place from 31st October to 1st Novemebr 3’o clock. During this session we
will discuss about the three divisions of Political report namely
International, National and student
movements. Later on we will take up national-international situation and
discuss about the challenges faced by our student organization.
पछास का 9वां सम्मेलन जिन्दाबाद
परिवर्तनकामी छात्र संगठन का 9वां सम्मेलन 31 अक्टूबर व 1 नवम्बर 2015 को दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। 31 अक्टूबर से 1 नवम्बर की दोपहर तक बंद सत्र चलाया जायेगा। इस सत्र के दौरान अंतराष्ट्र्रीय, राष्ट्र्रीय व छात्र जगत तीन हिस्सों में बटी राजनीतिक रिपोर्ट पर चर्चा की जायेगी। उसके उपरांत देश-दुनिया के राजनीतिक हालातों का जायजा लेकर संगठन की समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा की जायेगी।
24 September 2015
कालेज-कैम्पसों को ‘जेल’ बनाए जाने का विरोध करो!
कालेजों-विश्वविद्यालयों में जनवादी माहौल हो, इसके लिए छात्र-छात्राओं ने इतिहास में जुझारू संघर्षो को खड़ा किया है। पूंजीवादी शासकों की भरसक कोशिश रही है कि युवा हमेशा उनके इसारे पर नाचते रहें। पूंजीवादी शसक छात्रों की जनवादी-क्रांतिकारी सोच व संघर्ष से भय खाते रहे हैं। देश में जनवाद, लोकतंत्र का राग अलापने के बरक्स वह छात्रों के राजनीतिक अधिकारों को सैकड़ों तरीको से कुचलते रहे है। किन्तु छात्र समुदाय ने अपने व देश-दुनिया के क्रांतिकारी संघर्षो से जो चेतना हासिल की, उसके कारण वह अपने जनवादी अधिकारों के प्रति सचेत रहा है। परन्तु शासक वर्ग इस सीमित जनवाद को भी खत्म करना चाहता है। UGC(विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा अप्रैल 2015 में जारी की गयी गाइडलाइन भी शासक वर्ग की इसी चाहत को पूरा करती प्रतीत होती है।
13 September 2015
महाराष्ट व छत्तीसगढ सरकार ने लगाया मास पर प्रतिबंध
हम जो चाहेगें सब वही खायेंगे
जैन धर्म पर्व का बहाना बनाकर महाराष्ट व छत्तीसगढ सरकार ने मास की ब्रिक्री पर दो दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। पहले यह प्रतिबंध महाराष्ट में 4 व छत्तीसगढ में 9 दिनों के लिए लगाया गया था। दोनों प्रदेश सरकारों द्वारा सुनाया गया यह फरमान सवर्णवादी- ब्राहमणवादी सोच से भरा हुआ है। भाजपा सरकार लगतार समाज में ब्राहमणवादी मूल्य थोप रही है। किसी भी सरकार को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि लोग क्या खायें क्या पहने। किन्तु देश में भाजपा सरकार यही सब कर रही है।
साम्राज्यवादी कुकर्मों के कारण दर-दर भटकते लोग
सीरिया से बड़े पैमाने पर लोग अपना घर-बार छोड़कर दर-दर भटक रहे हैं।ये सभी यूरोपीय देशों में शरण लेने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। असुरक्षित यात्रा में कई लोग भूख-प्यास से भी मर जा रहे हैं। बीबीसी के अनुसार इस वर्ष 3 लाख 40 हजार लोग अपना वतन छोड़कर शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं। सीरियाई लोगों का दर्द देखकर यूरोपीय देशों के नागरिकों ने उनका साथ देने के लिए प्रदर्शन किये। इसके बावजूद पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासक शरणार्थियों को अनचाहा बोझ समझकर तरह-तरह के बहाने बनाकर इसे रोकना चाहते हैं। हंगरी ने तो शरणार्थियों को रोकने के लिए तार-बाड़ खड़ी कर दी है। साम्राज्यवादी आईएसआईएस की उनके देश में घुसपैठ का बहाना बनाकर शरणार्थियों को शरण देने में अडंगे लगा रहा है। इस सबके बावजूद एक दिन भी ऐसा नहीं गया जबकि पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासकों ने मानवता के नाम पर झूठे आंसू ना बहाये हों।
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