25 November 2020

26 नवंबर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में ....

छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !

 


26 नवंबर को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व विभिन्न मजदूर संगठनों द्वारा देशव्यापी आम हड़ताल करना तय किया गया है। इस हड़ताल के साथ ही किसान संगठनों ने भी देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन मजदूरों की आम हड़ताल व किसानों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करता है। साथ ही, छात्रों का आह्वान करता है कि देश के मजदूरों-किसानों के संघर्ष से जोड़ते हुए छात्रों व शिक्षा पर हो रहे हमलों के विरोध में एकजुट आवाज उठाएं।

14 September 2020

मैं अपनी जिंदगी से परेशान हो गया हूँ ...


ये 32 वर्षीय राजीव सुसाइड नोट के अंतिम शब्द हैं। जिसने इलाहाबाद में बेरोजगारी के चक्र में फँसकर आत्महत्या का रास्ता चुना। राजीव ने पीसीएस इंटरव्यू में असफल होने के बाद ये कदम उठाया। इसके जैसे हज़ारों बेबस मज़दूर, किसान, छात्र तथा नौजवान रोज ऐसे ही मौत को गले लगा ले रहे हैं।

योगी सरकार का नया फैसला देश के युवाओं के साथ धोखा है!


भारत आज बेरोजगारी के चरम दौर से गुजर रहा है। देश का युवा रोजगार को तरस रहा है। वो हताश, निराश, बेबस है। रोज हताश बेरोजगारों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हों। ऐसे में उन्हें रोजगार देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के बजाए यूपी की योगी सरकार एक युवा विरोधी फैसला लागू करने जा रही है। प्रदेश की सरकार एक नया बिल कैबिनेट के समक्ष पेश करने जा रही है। इस बिल के अनुसार समूह ख और ग के तहत भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों को 5 साल के लिए संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के तौर पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित रखा जायेगा।

11 September 2020

नशे के खिलाफ जुझारू आंदोलन और पूंजीवादी व्यवस्था

कच्ची शराब व अवैध नशों के खिलाफ आंदोलन


लालकुआं (नैनीताल) उत्तराखंड के बिन्दुखत्ता गांव में पिछले माह के 1 अगस्त से ग्रामीण व जनसंगठन कच्ची शराब, चरस, स्मैक, अफीम, ड्रग आदि अवैध नशों के खिलाफ संघर्षरत हैं। यह आंदोलन एक गांव की सफलता के बाद दूसरे, तीसरे गांव में फैलता चला जा रहा है। 

4 September 2020

नौजवानों-किसानों को मौत बांटती पूंजीवादी व्यवस्था

एन आर सी बी के आंकड़े


नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एन सी आर बी) देश में हत्या दुर्घटना, आत्महत्या, सहित अपराध के आंकड़े जारी करने वाली सरकारी संस्था है। 2 सितंबर 2020 को इसने वर्ष 2019 में दुर्घटना और आत्महत्या के आंकड़े पेश किए। जिसमें बताया गया कि 2018 में 1,34,516 आत्महत्या की घटनाएं हुई और 2019 में 3.4% की बढ़ोतरी के साथ यहां आंकड़ा 1,39,123 हो गया। विकास के दावों और "सब चंगा सी" के बीच आत्महत्या के मामले अपनी कहानी आप ही बयां करते हैं।

22 August 2020

बेरोजगारों के लिए नया झुनझुना भर है NRA और CET

        2020 के बजट में सरकार ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी (NRA) के गठन के बारे में बताया था। जिसको 19 अगस्त 2020 को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी। NRA विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CRT) करवाएगा। मंत्रिमंडल से मंजूरी के बाद प्रधानमंत्री से लेकर विभिन्न मंत्रियों ने दावा किया है कि इससे रोजगार मिलने में मदद मिलेगी।

                                     

13 August 2020

गोवा में भाजपा सरकार ने IIT को आवंटित जगह का एक हिस्सा मंदिर को सौंपा


गोवा में IIT स्थापित करने की योजना के तहत 10 लाख वर्ग मीटर जमीन दिये जाने की जुलाई में सरकार द्वारा घोषणा की गयी थी। गोवा के गुलेली गांव में यह जमीन आवंटित भी कर दी गई। स्थानीय लोगों ने जमीन दिये जाने का विरोध किया। जिस पर केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद सरकार का कहना है कि स्थानीय लोगों के विरोध के कारण 45,000 वर्ग मीटर जमीन  धार्मिक कार्यों के लिए दे दी जायेगी। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा- 'हमने 45,000 वर्ग मीटर जमीन मंदिर के लिये चिन्हित की है। उनका ध्यान भटकेगा और अंतिम योजना से दूर रहेंगे...... यह गांव वालों के फायदे और विरोध को शांत करने के लिए किया गया। यह गांव वालों के भले में है।'

आज आधुनिक समाज में कोई साधारण सा व्यक्ति भी मंदिर और IIT में से IIT को ही अधिक महत्व देगा। पर सरकार क्या कहती है- 'मंदिर लोगों के हित में है।' साफ है कि आज संघी फासीवादी सरकार के लिए शिक्षा के बजाय मंदिर बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। जमीनों को उद्योगपतियों और औद्योगिक क्षेत्र के लिए तो सरकार जबरन आवंटित कर देती है। गांव के गांव उजाड़ दिये जाते हैं पर IIT के लिए जमीन का विरोध होने पर जमीन मंदिर को आवंटित कर दी गयी। जुलाई में कई गयी घोषणा अगस्त में वापस ले ली जाती है। शिक्षा से समझौता किया जाएगा पर मंदिर से नहीं। अगर कुछ लोग किसी वजह से विरोध कर भी रहे थे तो क्या उन्हें इस बारे में शिक्षित कर, उनके बीच आईआईटी की जरूरत का प्रचार कर उनको मनाया नहीं जा सकता था बिलकुल मनाया जा सकता था परन्तु भाजपा सरकार जिसका पूरा जीवन तन्त्र मंदिर की राजनीति से चलता हो उससे इस तरह के कदम उठाए जाने की उम्मीद करना बेईमानी ही है।

और ये सब कोरोना काल में हो रहा है जिसने पूरे समाज में मजबूती से यह साबित किया है कि सामान्य समय के अलावा इस संकट के समय भी शिक्षा, उच्च शिक्षा, शोध, आदि ही अधिक जरूरी हैं।

संघी फासीवादियों का यही नजरिया है कि ज्ञान-विज्ञान के विकास के बजाय अज्ञान-अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जाए। इस कूपमंडूकता में ही ये पूरे देश और समाज को धकेलना चाहते हैं। निश्चित ही छात्रों-नौजवानों को इसका जवाब ज्ञान-विज्ञान, प्रगति और क्रांति के विचारों से देना होगा। यही आज समय की मांग है।

क्रांतिकारी अभिवादन सहित
परिवर्तनकामी छात्र संगठन
(पछास)

31 July 2020

नई शिक्षा नीति : पूंजीपतियों के हितों के मुताबिक शिक्षा में बदलाव की कोशिश


नई शिक्षा नीति (न्यू एजुकेशन पॉलिसी - नेप) के मसौदे को शिक्षा मंत्रालय और केन्द्र सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। इसी के साथ ही सत्ताधारी पार्टी के नेताओं द्वारा एक-दूसरे को बधाई देने और सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री को धन्यवाद देने का दौर शुरू हो गया। नई शिक्षा नीति में शिक्षा में व्यापक बदलाव करने की अनुशंसा सरकार से की गई है। हालांकि प्राथमिक शिक्षा में थोड़े बहुत बदलावों/सुधारों की बातें हैं लेकिन उच्च शिक्षा, तकनीकि और पेशेवर शिक्षा में व्यापक बदलाव की बातें की गयी हैं। एक तरह से अभी तक चली आ रही उच्च शिक्षा के रूप और अंतर्वस्तु दोनों को ही बदलने की बातें हैं।

1 July 2020

जनता को लूटकर अपना खजाना भरती सरकारें

पेट्रोल- डीजल के दामों में भारी बढ़ोत्तरी


पिछली 7 जून 2020 से भारत में तेल की खुदरा कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी जारी है। 7 जून से देश में डीज़ल के दामों में लगातार 21 दिन तक वृद्धि हुई तथा इन 21 दिनों में पेट्रोल के दाम भी 20 बार बढ़े। दिल्ली में इन दिनों में पेट्रोल के दाम 9.17 रुपये बढ़कर 80.38 रुपये तो डीजल के दाम 11.23 रुपये बढ़कर 80.40 रुपये हो गए। वहीं मुम्बई में पेट्रोल के दाम 87.14 रूपये व डीजल के दाम 78.71 रूपये हो गए। सब कुछ 'ऐतिहासिक' करने वाली मोदी सरकार के काल में तेल की खुदरा कीमतें भी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गयी। तेल के दामों में यह भारी वृद्धि तब हुयी है जब कोरोना महामारी के चलते विश्व में तेल की मांग में गिरावट आने के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी ज्यादा गिर गए। 

26 June 2020

लचर सरकारी स्वास्थ्य तन्त्र, आलीशान निजी अस्पताल और कोरोना के खिलाफ जंग

कोरोना महामारी की शुरुआत दुनिया भर में दिसंबर के समय चीन से हो चुकी थी। उस समय भारत सरकार का रुख उदासीनता भरा था। यहां तक की 30 जनवरी को भारत में कोरोना का पहला मरीज मिलने के बावजूद सरकार के रुख में कोई गंभीरता नहीं आई। पहला लॉकडाउन लगाए जाने तक सरकार ने फरवरी-मार्च के माह तक भी कोई विशेष तैयारी नहीं की थी। इस दौरान चर्चाएं चीन को महामारी से होने वाले नुकसान का फायदा भारतीय उद्योग व अर्थव्यवस्था को मिलने के कयास लगाए जा रहे थे, ट्रंप के स्वागत में भीड़भाड़ भरे भव्य कार्यक्रम, मध्यप्रदेश में सरकार बनाने बिगाड़ने का खेल, विदेश से आने वाले लोगों पर भी कोई रोक या समुचित जांच न करना, आदि सरकार की मुख्य हरकतें थी। इस बीच कोरोना के बारे में खतरनाक तरीके से अंधविश्वासों और कूपमंडूकता भरी बातों ने जगह पाई। गाय के गोबर, गोमूत्र, हल्दी, लहसुन, अदरक, गिलोय, आदि से कोरोना के इलाज के दावे किए जाने लगे। मांसाहार को कोरोना का कारण गिनाया जाने लगा। लेकिन वक्त के साथ संकट (कोरोना) के अधिकाधिक वास्तविक होते जाने के बाद अंधविश्वास और कूपमंडूकता भरी बातें कमजोर तो हुईं, पर सरकार से लेकर मीडिया तक ने उनके लिए जगह बचाये रखी। 

22 June 2020

अन्धराष्ट्रवाद, युद्धोन्माद- मुर्दाबाद!

बीते कई दिनों से भारत-चीन सीमा पर पैदा हुआ सीमा विवाद कई सैनिकों की मृत्यु का कारण बना। 20 भारतीय सैनिक इस विवाद की भेट चढ़े, तो दूसरी तरफ चीन ने अपने हताहत व घायल सैनिकों की कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की है। हालांकि लगभग 40 चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर भारत के मीडिया व सोशल मीडिया में चल रही हैं

18 June 2020

अभिनेता सुशांत का यों चले जाना क्या बताता है...

14 जून को हिंदी सिनेमा जगत के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या की खबर आई। काई पो चे, ब्योमकेश बख्शी, पीके, छिछोरे, सोनचिड़िया, आदि फिल्मों में अपने अभिनय के लिए सुशांत जाने गए।

25 April 2020

पछास के साथी महेश पर लगाया फर्जी मुकदमा वापस लो


लॉकडाउन की मार झेल रहे गरीब मजदूरों - छात्रों के लिए घर पर रहकर भूख हड़ताल करने पर दर्ज किया मुकदमा

परिवर्तनकामी में छात्र संगठन के लालकुआं इकाई सचिव महेश पर पुलिस ने फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। अखबार के हवाले से यह मुकदमा पुलिस ने सोशल मीडिया पर उकसाने के आरोप में दर्ज किया है। पुलिस ने यह मुकदमा धारा 188, 269, 270 और आपदा प्रबंधन एक्ट 51 के तहत दर्ज किया है। 

20 April 2020

बिहार में लाखों शिक्षकों की हड़ताल और 42 शिक्षकों की मौत

ठेकाकरण की नीतियों की भेंट चढ़ते शिक्षक


        भारत में नई आर्थिक नीतियों के आगमन के बाद 'सर्वांगीण विकास' के लिए अपनाई गई लगभग सभी नीतियों के बेहद गंभीर नकारात्मक परिणाम हर क्षेत्र जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य आदि पर दिखाई देने लगे हैं।

10 April 2020

लाॅकडाउन के बहाने मजदूरों व मजदूर नेताओं का दमन-उत्पीड़न बंद करो!

मजदूर नेता अभिलाख के बाद अब इमके अध्यक्ष कैलाश भटट का उत्पीड़न!


उत्तराखंड राज्य के उधम सिंह नगर पुलिस द्वारा इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भटट को दिनांक 9/04/2020 को फोन कर रूद्रपुर कोतवाली बुलाया गया। कोतवाली में पुलिस ने उनके द्वारा एक व्हाट्सएप ग्रुप में डाले गये फोटो पर देशद्रोह का मुकदमा लगाने की धमकी दी है। आश्चर्य की बात यह है कि देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की बात उस फोटो पर की गयी है जो कि पिछले दिनों सोशल मीडिया में लगभग पूरे ही देश में घूम रहे थे। यह फोटो लाॅकडाउन के दौरान पुलिस द्वारा मजदूरों को मुर्गा बनाकर पीटने का है। जाहिर सी बात है कि लाॅकडाउन की सबसे ज्यादा मार मजदूरों-मेहनतकशों पर पड़ी है। और जब लगभग पूरे देश में ही ये मजदूर अपने घरों की तरफ पैदल ही मार्च करने को मजबूर हुए तो पुलिस द्वारा उनके साथ मारपीट की गयी। जो पूरी तरह अमानवीय व्यवहार है। 

3 April 2020

मजदूर नेता अभिलाख पर लगाया गया फर्जी राजद्रोह का मुकदमा वापस लो !

लाॅकडाउन में पुलिस द्वारा मजदूरों के किए जा रहे दमन को सोशल मीडिया में उठाने पर पुलिस ने दर्ज किया फर्जी मुकदमा !!


उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन शर्म करो !!!
छात्र-मजदूर एकता जिंदाबाद !!!!

अभिलाख सिंह पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर, जिला उधम सिंह नगर (उत्तराखंड) में विगत लगभग 2 दशकों से एक मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। 1 अप्रैल की सुबह पंतनगर पुलिस द्वारा उन पर राजद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।

27 March 2020

कोरोना महामारी के दौरान मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करो।

इस दौरान भ्रांतियां और अंधविश्वास फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करो।


कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया जूझ रही है। भारत समेत कई देशों की सरकारों द्वारा इस महामारी से निपटने को ‘लाॅक डाउन’ जैसे आपातकालीन कदम उठाये गये हैं।


25 March 2020

इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है

प्रिय साथियों,
आशा है आप स्वस्थ होंगे

'कोरोना' नामक महामारी के चलते हमारे संगठन की गतिविधियां बुरी तरह से बाधित हो गई हैं। हम अपने साथियों सहित जनता से कट गए हैं। यह स्थिती अभी कई दिन कायम रहनी है।

6 March 2020

8 मार्च: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

शिगूफे- प्रपंच की कोई जगह नहीं

8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस जो कि वास्तव में महिला मजदूरों की पूंजीवाद के खिलाफ लंबी संघर्ष गाथा का एक प्रतीक दिवस है। पूरी दुनिया में ही मजदूर-मेहनतकश महिलायें इस दिवस को मनाने की जोर-शोर से तैयारी कर रही हैं। विगत दशकों में देश-दुनिया का कोई भी ऐसा संघर्ष नहीं रहा जिसमें महिलाओं की शानदार, प्रेरणादाई भूमिका ना रही हो। भारत में ही देखें तो पूरे देश भर में सीएए/एनआरसी/एनपीआर के विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं की शानदार भूमिका रही है। शाहीन बाग जैसा संघर्ष का मजबूत किला महिलाओं के दम पर ही बनाया जा सका। तमाम दुख,कष्ट, दमन का इन महिलाओं द्वारा बहुत बहादुरी से मुकाबला किया गया। इनके हौसले के सामने दुख और दमन दम तोड़ता नजर आया।

5 March 2020

दिल्ली सुनियोजित हमलों द्वारा शाहीन बाग आंदोलन को कुचलने की संघी कोशिश को ध्वस्त करो

अपने जन्म से ही संघ व संघ जैसे दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा जनता के बीच मुस्लिमों की कट्टरता, क्रूरता को लेकर एक से बढ़कर एक झूठ फैलाए गए हैं। CAA, NRC/NPR विरोधी आंदोलन की शुरूआत में राज्य द्वारा प्रायोजित हिंसा को भी वो मुस्लिमों द्वारा की गयी हिसा के रूप में प्रचारित करने में सफल रहे। परंतु उसके बाद पैदा हुए शाहीन बाग आंदोलन ने उसे बैकफुट पर धकेल दिया।

भारत के इतिहास में ये एक नए तरीके का आंदोलन था। जिसमें मुस्लिम महिलाओं (जिन्हें सबसे पिछड़ा हुआ माना जाता था) ने भारी संख्या में भागीदारी की। बात केवल भागीदारी तक नहीं रही अधिकांश जगहों पर मुस्लिम महिलाओं ने इस आंदोलन का नेतृत्व भी किया। पूरे आंदोलन का स्वरूप अहिंसावादी और धर्मनिरपेक्ष बनाकर रखा गया। सभी धर्मो के लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की गयी। पुराने नेतृत्व को नकारते हुए लगभग सभी जगह नए नेतृत्व ने आंदोलन की कमान संभाली। सदियों से जिनसे बोलने का हक छीन लिया गया था वो स्टेज पर चढ़कर घंटो भाषण देने लगे। यही नही बाहर से भागीदारी करने वाले प्रगतिशील संगठनों द्वारा भी इस आंदोलन की चेतना को आगे बढ़ाने का काम किया गया। 

26 February 2020

संघर्षरत गुजरात अंबुजा के मजदूरों के समर्थन में....


गुजरात अंबुजा सिडकुल मजदूर अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले माह 28 जनवरी से संघर्षरत हैं। यह कंपनी उत्तराखंड राज्य के ऊधम सिंह नगर जिले के एक औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल सितारगंज में स्थित है। कंपनी मक्के से स्टार्च का निर्माण करती है और उसे अन्य कंपनियों को सप्लाई करती है। इसी से शहद, होरलिक्स, आदि खाद्य पदार्थों का निर्माण होता है। कंपनी मालिक के साथ उत्तराखंड सरकार मजदूरों की मांगों को नहीं सुन रही है। उत्तराखंड सरकार भी पूजीपतियों के साथ खड़ी है और हर संभव तरीके से आंदोलन का दमन करने में लगी है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन गुजरात अंबुजा के मजदूरों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए उत्तराखंड सरकार से मांग करता है कि वह अपनी मजदूर विरोधी दमनकारी नीतियों को छोड़ते हुए मजदूरों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करे।

6 January 2020

जेएनयू छात्रों पर कायराना हमले के विरोध में

5 जनवरी की शाम 7 बजे के आस पास जेएनयू में कुछ गुंडे डंडे, लाठियों और चाकू को हाथ में लेकर कैंपस में घुस गए और हाॅस्टल में छात्रों के साथ मारपीट की और तोड़फोड़ की। छात्र संघ अध्यक्ष सहित कई छात्रों को बुरी तरह से घायल कर दिया। परिवर्तनकमी छात्र संगठन इस कायराना हमले की कठोर शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि इस हमले के दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाय।